मध्य पूर्व में चल रही जंग अब अपने चौथे हफ्ते में पहुंच चुकी है और हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। शनिवार को ईरान के सबसे अहम परमाणु संवर्धन केंद्र ‘नतांज’ पर एक बार फिर हवाई हमला किया गया। इस हमले की पुष्टि ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘मिजान’ ने की है। एजेंसी के मुताबिक, राहत की बात यह है कि इस हमले के बाद किसी भी तरह के रेडिएशन (विकिरण) के रिसाव की कोई खबर नहीं है।
नतांज परमाणु केंद्र शुरू से ही ईरान के दुश्मनों के निशाने पर रहा है। युद्ध के पहले हफ्ते में भी यहां हमला हुआ था, जिसमें कई इमारतों को नुकसान पहुंचा था। तब संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने कहा था कि रेडियोलॉजिकल खतरों की आशंका नहीं है। बता दें कि तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दूर स्थित यह वही जगह है जिसे जून 2025 में ईरान और इजरायल के बीच हुए 12 दिनों के युद्ध के दौरान भी इजरायली और अमेरिकी हमलों का सामना करना पड़ा था।
एक तरफ जहां युद्ध के मैदान में बारूद बरस रहा है, वहीं अमेरिका से मिल रहे संदेशों ने दुनिया को उलझन में डाल दिया है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को पूरा करने के करीब है और वह मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों को “समेटने” (वाइंडिंग डाउन) पर विचार कर रहे हैं। लेकिन जमीन पर हकीकत ट्रंप के दावों के उलट नजर आ रही है।
अमेरिका एक तरफ कह रहा है कि वो मध्य पूर्व में अपने सैन्य अभियान कम करने पर सोच रहा है, लेकिन दूसरी तरफ वहां अपनी ताकत लगातार बढ़ा भी रहा है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका तीन नए युद्धपोत और करीब 2,500 अतिरिक्त मरीन सैनिक इलाके में भेज रहा है। इससे पहले भी इतनी ही संख्या में सैनिक प्रशांत क्षेत्र से यहां लाए जा चुके हैं, जिससे अब मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50,000 से ज्यादा हो गई है।
इसके साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस से इस युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर का अतिरिक्त बजट भी मांगा है। इससे साफ है कि फिलहाल यह लड़ाई जल्दी खत्म होती नहीं दिख रही।
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ईरान ने अब इस लड़ाई को मध्य पूर्व से बाहर ले जाने के संकेत दिए हैं। ईरान के सैन्य प्रवक्ता जनरल अबुल फजल शेकरची ने चेतावनी दी है कि अब दुनिया भर में ईरान के दुश्मनों के लिए ‘पार्क, पिकनिक स्पॉट और पर्यटन स्थल’ सुरक्षित नहीं रहेंगे। इस धमकी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है कि ईरान अब दबाव बनाने के लिए विदेशों में उग्रवादी हमलों का सहारा ले सकता है।
ईरान के भीतर की स्थिति भी काफी धुंधली है। सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने ‘नौरोज’ (फारसी नववर्ष) के मौके पर एक लिखित संदेश जारी कर जनता के साहस की तारीफ की, लेकिन वे खुद लंबे समय से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की इजरायली हमले में मौत के बाद वे खुद भी घायल हुए थे। ईरान में भारी सेंसरशिप की वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वहां के परमाणु और सैन्य ठिकानों को असल में कितना नुकसान हुआ है और सत्ता की कमान इस वक्त किसके हाथ में है।
तीन हफ्तों से चल रही इस जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें जो युद्ध से पहले 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, अब 106 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। अमेरिका में शेयर बाजार गोता लगा रहे हैं और महंगाई आसमान छू रही है। इसी दबाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए उन ईरानी तेल जहाजों से प्रतिबंध हटा लिए हैं, जिन पर शुक्रवार तक तेल लोड हो चुका था। यह छूट 19 अप्रैल तक रहेगी।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस कदम से तेल की सप्लाई में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होगी क्योंकि ईरान पहले से ही चोरी-छिपे तेल बेचता रहा है। इससे पहले अमेरिका ने रूस के तेल पर भी इसी तरह की अस्थायी छूट दी थी, जिसकी काफी आलोचना हुई थी। फिलहाल, युद्ध का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है; सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों पर भी लगातार ड्रोन हमले हो रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया में ईंधन और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। लेबनान में भी इजरायली हमले जारी हैं, जहां अब तक 1,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
(एजेंसी के इनपुट के साथ)