अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देना कंपनियों के लिए काफी महंगा हो सकता है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एच-1बी वीजा की कुछ अर्जियों पर 1,03,265 डॉलर की फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। भारतीय पेशेवरों के लिए यह खबर अहम है, क्योंकि एच-1बी वीजा के जरिए बड़ी संख्या में भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, वित्त और दूसरे क्षेत्रों में अमेरिका में काम करते हैं।
हालांकि, सबसे जरूरी बात यह है कि यह फीस अभी लागू नहीं हुई है। साथ ही, इसका भुगतान एच-1बी कर्मचारी को नहीं, बल्कि उसे नौकरी देने वाली कंपनी को करना होगा।
प्रस्ताव के मुताबिक यह फीस उन एच-1बी अर्जियों पर लागू होगी, जो हर साल तय होने वाली एच-1बी सीमा में आती हैं।
इसमें शामिल हैं:
उदाहरण के लिए, अगर कोई भारतीय छात्र अमेरिका से मास्टर की पढ़ाई पूरी करता है, फिर एफ-1 ऑप्ट के तहत नौकरी करता है और एच-1बी लॉटरी में चुन लिया जाता है, तो उसकी एच-1बी अर्जी दाखिल करते समय कंपनी को यह फीस देनी पड़ सकती है।
यह फीस मौजूदा एच-1बी आवेदन फीस और दूसरी लागू फीस के अतिरिक्त होगी।
इस प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में काम करने वाले हर एच-1बी कर्मचारी पर 1,03,265 डॉलर की फीस लगेगी।
यह फीस सिर्फ सालाना एच-1बी सीमा के तहत आने वाली अर्जियों पर लागू होगी। यानी हर एच-1बी विस्तार या दूसरी तरह की अर्जी पर यह फीस अपने आप नहीं लगेगी।
इसके अलावा, सीमा से बाहर वाली एच-1बी अर्जियों को भी इस फीस से बाहर रखा गया है। इनमें कई ऐसी अर्जियां शामिल हैं, जो:
प्रस्तावित फीस का संबंध हर एच-1बी आवेदन से नहीं, बल्कि हर साल तय होने वाली एच-1बी सीमा से है।
इसका मतलब है कि यह फीस हर एच-1बी विस्तार, ट्रांसफर या सीमा से बाहर आने वाले आवेदन पर अपने आप लागू नहीं होगी। मुख्य बात यह होगी कि संबंधित आवेदन सालाना तय एच-1बी सीमा के तहत आता है या नहीं।
पहले से मंजूर एच-1बी आवेदनों की स्थिति पर भी इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने यह रकम एक खास गणना के आधार पर तय की है।
विभाग का अनुमान है कि अमेरिका की कानूनी आव्रजन व्यवस्था को चलाने में संघीय सरकार को हर साल करीब 8.78 अरब डॉलर का खर्च आता है। इस रकम को हर साल एच-1बी सीमा के तहत आने वाले अनुमानित 85,000 आवेदनों से बांटा गया। इससे प्रति आवेदन करीब 1,03,265 डॉलर की फीस निकलती है।
अगर सभी 85,000 उपलब्ध सीटों का इस्तेमाल होता है, तो विभाग के अनुमान के मुताबिक इस फीस से हर साल करीब 8.8 अरब डॉलर की राशि जुट सकती है।
यह पैसा सिर्फ अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा को नहीं मिलेगा। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने इस रकम को आव्रजन व्यवस्था से जुड़ी कई सरकारी एजेंसियों के बीच बांटने का प्रस्ताव रखा है।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के मुताबिक इस राशि का इस्तेमाल आव्रजन आवेदनों की जांच, धोखाधड़ी पकड़ने, राष्ट्रीय सुरक्षा जांच, आव्रजन अदालतों, वाणिज्य दूतावास से जुड़ी प्रक्रिया, श्रम कानूनों के पालन और सरकारी प्रणालियों को आधुनिक बनाने जैसे कामों के लिए किया जाएगा।
इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर इसी बात पर पड़ सकता है कि कंपनियां इतनी बड़ी फीस देकर एच-1बी कर्मचारी को नौकरी देना जारी रखेंगी या नहीं।
अब तक कंपनियों को एच-1बी आवेदन के लिए आमतौर पर कुछ हजार डॉलर की फीस देनी पड़ती थी। यह रकम कंपनी और आवेदन के प्रकार के हिसाब से अलग-अलग होती है। ऐसे में 1,03,265 डॉलर की अतिरिक्त फीस कंपनियों के लिए बहुत बड़ा खर्च बन सकती है।
अगर कोई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी सैकड़ों कुशल कर्मचारियों को नौकरी देती है, तो उसका खर्च लाखों डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं, स्टार्टअप, छोटी टेक्नोलॉजी कंपनी, अस्पताल या सीमित भर्ती बजट वाली दूसरी संस्थाओं के लिए एच-1बी कर्मचारी को नौकरी देना काफी मुश्किल हो सकता है।
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने भी छोटी कंपनियों पर पड़ने वाले असर को माना है। प्रस्ताव के आर्थिक विश्लेषण में हजारों छोटी संस्थाओं के प्रभावित होने की बात कही गई है।
ऐसे में कंपनियां विदेश से किसी उम्मीदवार को नौकरी देने और उसके लिए एच-1बी वीजा की अर्जी लगाने पर दोबारा विचार कर सकती हैं। वे ऐसे व्यक्ति को नौकरी देना पसंद कर सकती हैं, जिसके पास पहले से अमेरिका में काम करने की अनुमति हो। कुछ कंपनियां अपनी कुछ नौकरियां अमेरिका के बाहर भेज सकती हैं या एच-1बी वीजा के लिए उपलब्ध उम्मीदवारों की कमी को देखते हुए वेतन बढ़ा सकती हैं।
भारतीय आईटी कंपनियों के लिए भी यह प्रस्ताव अतिरिक्त खर्च बढ़ा सकता है, क्योंकि वे कुशल कर्मचारियों को अमेरिका में भेजने के लिए एच-1बी कार्यक्रम का इस्तेमाल करती हैं।
प्रस्तावित 1,03,265 डॉलर की फीस, 2025 में ट्रंप प्रशासन की ओर से शुरू की गई 1 लाख डॉलर की एच-1बी भुगतान व्यवस्था से अलग है।
पहले वाली व्यवस्था राष्ट्रपति की घोषणा के जरिए लागू की गई थी और इसे लेकर अदालत में मामला चल रहा है। जून 2026 में मैसाचुसेट्स की एक संघीय जिला अदालत ने उस भुगतान व्यवस्था को लागू करने वाली गाइडलाइन को रद्द कर दिया था। सरकार की अपील अभी लंबित है।
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग यानी डीएचएस का कहना है कि नई प्रस्तावित फीस अलग कानूनी अधिकार के आधार पर लाई गई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर किसी नियोक्ता पर दोनों फीस लागू होती हैं, तो उसे दोनों का भुगतान करना पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में एक एच-1बी अर्जी की कुल लागत 2 लाख डॉलर से ज्यादा हो सकती है। हालांकि, पहले वाली 1 लाख डॉलर की फीस की कानूनी स्थिति और उसके लागू होने का समय अलग मामला है।
इस प्रस्ताव की आव्रजन वकीलों और नीति से जुड़े संगठनों की ओर से आलोचना शुरू हो गई है।
कॉरपोरेट इमिग्रेशन पार्टनर्स के प्रबंध वकील पीटर बेड ने कहा कि प्रस्ताव का दायरा काफी बड़ा है और प्रशासन की पिछली एच-1बी फीस नीति को लेकर कानूनी मामला पहले से चल रहा है। ऐसे में अगर डीएचएस इस प्रस्ताव को अंतिम नियम में बदलता है, तो इसे बड़ी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह बात ध्यान में रखना जरूरी है कि फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्तावित नियम है। डीएचएस को पहले लोगों से सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और इसके बाद तय करना होगा कि अंतिम नियम जारी किया जाए या नहीं। अभी इसे लागू करने की कोई तारीख घोषित नहीं हुई है।
प्रस्तावित नियम भविष्य में दाखिल होने वाली उन एच-1बी अर्जियों पर लागू होगा, जो सालाना सीमा के तहत आती हैं। पहले से मंजूर हो चुकी अर्जियों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। जब तक डीएचएस इस प्रस्ताव को अंतिम रूप नहीं देता, तब तक कोई बदलाव लागू नहीं होगा।
पीटर बेड ने कहा कि नियोक्ताओं को अपने आव्रजन सलाहकारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए और केवल इस प्रस्ताव के आधार पर कर्मचारियों से जुड़े फैसले नहीं लेने चाहिए।
अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन ने प्रस्तावित फीस को बेहद ज्यादा बताया है। संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी फीस की वजह से नियोक्ताओं के लिए शिक्षकों, शोधकर्ताओं, ग्रामीण इलाकों के डॉक्टरों और धार्मिक कर्मचारियों जैसे जरूरी पदों पर एच-1बी कर्मचारियों को नियुक्त करना मुश्किल हो सकता है।
संगठन के अध्यक्ष जेफ जोसेफ ने कहा कि एच-1बी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इतनी ज्यादा फीस उन नियोक्ताओं को बाहर कर सकती है, जो जरूरी कर्मचारियों की कमी पूरी करने के लिए एच-1बी वीजा का इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव अलग-अलग सरकारी एजेंसियों में कानूनी आव्रजन प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच के लिए पैसा जुटाने का एक अभूतपूर्व कदम है, जबकि इसके लिए कांग्रेस की ओर से विशेष मंजूरी नहीं दी गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले विदेश से नए कर्मचारियों को लाने वाले एच-1बी नियोक्ताओं पर फीस लगाने की ट्रंप प्रशासन की कोशिश से उम्मीद के मुताबिक राजस्व नहीं मिला था और संघीय अदालतों ने उसे गैरकानूनी माना था। उनके अनुसार, कांग्रेस और अदालतों को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
कैटो इंस्टीट्यूट के आव्रजन नीति विश्लेषक डेविड बियर ने भी डीएचएस के खर्च की भरपाई के तर्क पर सवाल उठाया है। उन्होंने पहले वाली 1 लाख डॉलर की फीस को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई का हवाला देते हुए कहा कि इतनी बड़ी फीस नियोक्ताओं के लिए बहुत मुश्किल पैदा कर सकती है।
अभी नहीं।
1,03,265 डॉलर की फीस फिलहाल नहीं देनी है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को पहले संघीय नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, लोगों और संस्थाओं से सुझाव लेने होंगे और उनकी समीक्षा करनी होगी। इसके बाद ही तय होगा कि अंतिम नियम जारी किया जाए या नहीं।
प्रस्ताव के अनुसार, इसे फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने के बाद 30 दिनों तक लोगों से सुझाव लिए जाएंगे। अमेरिकन हॉस्पिटल एसोसिएशन के अनुसार, सुझाव देने की अंतिम तारीख 24 सितंबर है।
जब तक अंतिम नियम जारी नहीं होता और उसकी लागू होने की तारीख तय नहीं होती, तब तक कंपनियों को 1,03,265 डॉलर को एच-1बी की मौजूदा फीस नहीं मानना चाहिए।
हालांकि, इस प्रस्ताव से अमेरिका की नई वीजा नीति की दिशा का संकेत जरूर मिलता है।
जो भारतीय छात्र अमेरिका में मास्टर डिग्री के बाद ऑप्ट से एच-1बी का रास्ता अपनाने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए प्रस्तावित नियम के तहत 1,03,265 डॉलर की फीस व्यक्तिगत रूप से नहीं देनी होगी। लेकिन इससे भविष्य में उनकी कंपनी एच-1बी वीजा के लिए कर्मचारी को प्रायोजित करने से पहले ज्यादा सोच सकती है।
यही इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी चिंता हो सकती है। इससे विदेशी कर्मचारी के लिए सीधे फीस बढ़ाए बिना एच-1बी लॉटरी के जरिए नौकरी पाने की लागत बढ़ सकती है।
प्रस्तावित नियम 25 अगस्त 2026 को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने वाला है। इसके बाद लोगों और संस्थाओं से सुझाव लिए जाएंगे। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग इन सुझावों की समीक्षा करने के बाद तय करेगा कि अंतिम नियम जारी किया जाए या नहीं।
फिलहाल मौजूदा एच-1बी धारकों या पहले से मंजूर आवेदनों में कोई बदलाव नहीं होगा।
भविष्य में एच-1बी के लिए आवेदन करने वाले लोगों, खासकर 65,000 सामान्य सीटों और अमेरिकी मास्टर डिग्री वालों के लिए 20,000 अतिरिक्त सीटों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या कंपनियां इतनी बड़ी प्रायोजन लागत उठाने के लिए तैयार रहेंगी।