शनिवार को ब्रिक्स नेताओं ने अपने राष्ट्रीय ऑडिटरों और सांख्यिकी एजेंसियों के बीच और सहयोग बढ़ाने का वादा किया। उन्होंने समूह की सर्वोच्च ऑडिट संस्थाओं के लिए नई कार्य योजना को मंजूरी दी और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) व वैकल्पिक डेटा स्रोतों का इस्तेमाल करके आधिकारिक डेटा सिस्टम को आधुनिक बनाने का आह्वान किया।
दो दिन तक चले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत में स्वीकार किए गए नई दिल्ली घोषणापत्र में नेताओं ने ‘सार्वजनिक प्रशासन में जवाबदेही, पारदर्शिता, प्रभावशीलता और सुशासन’ को बढ़ावा देने में सुप्रीम ऑडिट इंस्टीट्यूशंस (एसएआई) की भूमिका पर जोर दिया। एसएआई में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) शामिल हैं।
घोषणापत्र में इसे स्वीकार किया गया कि सभी देशों में ऑडिटर पारंपरिक वित्तीय और अनुपालन नियंत्रण से आगे बढ़कर ‘परिणाम-उन्मुखी, डेटा-आधारित और प्रभाव-केंद्रित तरीकों’ की ओर बढ़ रहे हैं। घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों के ऑडिटरों के बीच विशेषज्ञता के निरंतर आदान-प्रदान का स्वागत किया गया और शहरों के मोबिलिटी सिस्टम के ऑडिट में सहयोग का विशेष रूप से जिक्र किया गया।
ब्रिक्स के एसएआई प्रमुखों की पांचवीं बैठक में अपनाए गए ‘बेंगलूरु घोषणापत्र’ का जिक्र करते हुए नेताओं ने नागरिकों के जीवन को आसान बनाने में ऑडिट संस्थाओं की ‘प्रासंगिकता, प्रभाव और विश्वसनीयता’बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की और ‘ब्रिक्स एसएआई वर्क प्लान 2027-2028’ को लागू करने का समर्थन किया।
ब्रिक्स एसएआई वर्क प्लान 2027-28 ब्रिक्स देशों की सर्वोच्च ऑडिट संस्थाओं के बीच सहयोग के लिए भविष्य का एजेंडा है। इसे 8 मई, 2026 को बेंगलूरु में आयोजित 5वें ब्रिक्स एसएआई लीडर्स समिट के समापन पर स्वीकार किया गया था। सम्मेलन का विषय ‘शहरी गतिशीलता पर ध्यान देते हुए जीवन को आसान बनाना’ था।
आंकड़ों के मामले में नेताओं ने डेटा की बदलती दुनिया में नीति-निर्माण के लिए सांख्यिकीय सहयोग मजबूत करने के महत्त्व को फिर से दोहराया। उन्होंने सांख्यिकीय प्रणालियों के आधुनिकीकरण और नए तरीकों व डेटा स्रोतों को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।
खास बात यह है कि इस घोषणापत्र में सदस्य देशों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकीय सुधारों, जिनमें प्रशासनिक और वैकल्पिक डेटा स्रोतों,एआई और क्षमता-निर्माण की पहलों का इस्तेमाल शामिल है, से जुड़ी जानकारी को इकट्ठा करने और समय-समय पर अपडेट करने की जरूरत पर जोर दिया गया।
नेताओं ने सालाना ‘ब्रिक्स जॉइंट स्टैटिस्टिकल पब्लिकेशन’ और इसके स्नैपशॉट को जारी रखने का भी समर्थन किया और इन्हें पारदर्शिता, आपसी सीख और सहयोग का जरिया बताया। इस शिखर सम्मेलन के मसौदे का आधार वर्ष की शुरुआत में ही तैयार कर लिया गया था।
लखनऊ में 3-4 अगस्त को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के प्रमुखों की दो-दिवसीय बैठक में, ब्रिक्स देशों ने आधिकारिक सांख्यिकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस सहयोग में डिजिटल प्रसार, प्रशासनिक डेटा, एआई और राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपी) ने कहा कि एजेंडा डेटा की गुणवत्ता, नवाचार और लोगों पर केंद्रित सांख्यिकीय प्रणालियों के लिए भारत के प्रयासों को दर्शाता है, जो तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम है।
लखनऊ वार्ता में चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई- डेटा के प्रसार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों में सुधार, संभावित सहयोग के लिए नवाचार के साझा क्षेत्र और वृहद आर्थिक और क्षेत्र-केंद्रित सांख्यिकी को मजबूत करना।