आयकर रिटर्न फाइल करते समय छोटी-मोटी गलतियां होना काफी आम बात है। कई बार जल्दबाजी में गलत आय दर्ज हो जाती है, तो कभी कर योग्य आय में कटौती अथवा छूट (डिडक्शन) का दावा रह जाता है। आपको 31 जुलाई की तय तारीख तक रिटर्न दाखिल करने के बाद एहसास हुआ है कि आपने भी कोई चूक कर दी थी तो घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर अधिनियम के तहत आपको अपनी भूल सुधारने का मौका दिया जाता है। आप संशोधित यानी रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर अपनी चूक ठीक कर सकते हैं।
आसान शब्दों में कहें तो रिवाइज्ड रिटर्न का मतलब आयकर रिटर्न के पुराने फॉर्म में की गई गलतियां या उसमें रह गई कमियां सुधारकर नया रिटर्न फॉर्म दाखिल करना है। अगर आपने अपनी आय की गलत जानकारी भर दी है, कर योग्य आय में कटौती का दावा करना भूल गए हैं, बैंक खाते का विवरण गलत हो गया है या टीडीएस अथवा टीसीएस का ब्योरा भरना रह गया है तो आप रिवाइज्ड रिटर्न के जरिये इसे ठीक कर सकते हैं।
इतना ही नहीं, अगर आपने आयकर रिटर्न भरते समय गलत फॉर्म चुन लिया था तो आप संशोधन करते समय उसे भी सही कर सकते हैं। कर विशेषज्ञ बलवंत जैन कहते हैं, ‘रिटर्न भरते समय भूल से आप गलत फॉर्म चुन गए हैं तो भी घबराने की जरूरत नहीं है। कानून आपको रिवाइज्ड रिटर्न के जरिये तमाम तरह की गलतियां सुधारने का मौका देता है। मान लीजिए पूंजीगत लाभ होने की वजह से आपको आईटीआर-2 भरना चाहिए था मगर गलती से आपने आईटीआर-1 भर दिया तो रिवाइज्ड रिटर्न भरते समय आप सही फॉर्म चुन सकते हैं।’
जैसे ही आप रिवाइज्ड रिटर्न भरते हैं वह आपके पुराने यानी मूल रिटर्न की जगह ले लेता है। इसके बाद आयकर विभाग की नजर में आपका नया यानी रिवाइज्ड रिटर्न ही मान्य हो जाता है।
आयकर कानून में कोई पाबंदी नहीं है और तय मियाद के भीतर आप कितनी भी बार संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। संशोधित रिटर्न भरने के बाद अगर आपको लगता है कि आप कोई और गलती भी कर गए थे और उसे ठीक नहीं किया था तो विभाग द्वारा तय समय सीमा के भीतर आप उस गलती को सुधारते हुए नया रिवाइज्ड रिटर्न भर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आप ऐसा बार-बार कर सकते हैं।
लेकिन जैन की सलाह है कि रिटर्न में बार-बार संशोधन करने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि पहले अपने मूल आयकर रिटर्न की अच्छी तरह जांच कर लें, सभी गलतियां एक जगह लिख लें और एक बार में ही उन्हें सुधारकर रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करें। इससे प्रक्रिया आसान रहती है और कर विभाग का ध्यान भी आपकी ओर नहीं जाता।
क्लियरटैक्स की कर विशेषज्ञ चांदनी आनंदन कहती हैं कि रिवाइज्ड यानी संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करते समय कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना जरूरी है:
ऑफलाइन रिटर्न: अगर आपने मूल रिटर्न कागज पर यानी ऑफलाइन दाखिल किया था तो आपको संशोधित रिटर्न भी कागजी शक्ल में ही भरना होगा। आप ऑनलाइन रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।
समय सीमा: किसी भी कर निर्धारण वर्ष यानी असेसमेंट ईयर के लिए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख उस कैलेंडर वर्ष का आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर होती है। इसका मतलब है कि यदि आपसे रिटर्न में कोई चूक हो गई है तो उसी साल की 31 दिसंबर तक उसे सुधारकर रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है।
विलंब शुल्क: अगर किसी वजह से आप 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड रिटर्न नहीं भर पाए तो भी घबराने की बात नहीं है। आपको अगले तीन महीने यानी अगले साल की 31 मार्च तक रिटर्न संशोधित करने का मौका मिलेगा मगर इसके लिए आपको विलंब शुल्क भरना होगा। अगर आपकी कुल आय 5 लाख रुपये से अधिक नहीं है तो 1,000 रुपये विलंब शुल्क लगेगा और उससे ज्यादा आय होने पर 5,000 रुपये भरने होंगे।
जैन बताते हैं कि अगर आप रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से भी चूक जाते हैं तो आपके पास अपडेटेड रिटर्न भरने का मौका होता है। असेसमेंट ईयर खत्म होने के 48 महीने के भीतर यह रिटर्न भरकर अपनी गलती सुधारी जा सकती है। मगर यह महंगा पड़ जाता है क्योंकि इसमें बकाया कर और उस पर लगने वाला ब्याज तो देना ही पड़ता है, अतिरिक्त कर भी चुकाना पड़ता है। अतिरिक्त कर इस बात पर निर्भर करता है कि अपडेटेड रिटर्न आपने कितनी देर से दाखिल किया है।
अगर आप असेसमेंट ईयर खत्म होने के एक साल के भीतर अपडेटेड रिटर्न भर देते हैं तो आपको बकाया कर चुकाना होगा, उस पर लगने वाला ब्याज भरना होगा और 25 फीसदी अतिरिक्त कर भी जमा करना पड़ेगा। लेकिन अगर साल भर बीत जाने के बाद आप अपडेटेड रिटर्न दाखिल करते हैं तो आपको महंगा पड़ेगा। उस सूरत में आपको बकाया कर चुकाना होगा, ब्याज भरना होगा और इन दोनों के 50 फीसदी के बराबर अतिरिक्त कर भी देना होगा।
जैन और चांदनी आगाह करते हैं कि रिटर्न में हुई चूक को नजरअंदाज करना करदाता पर भारी पड़ सकता है। अगर आपने गलत रिटर्न फॉर्म भर दिया है या जरूरी जानकारी छिपा ली है तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को अमान्य घोषित कर सकता है। उस सूरत में आप पर तगड़ी चोट पड़ सकती है। यदि आपका कोई आयकर रिफंड बनता है तो वह अटक सकता है। इसके अलावा आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है और यदि आप पर आयकर बकाया है तो वह कर, ब्याज और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
नुकसान यहीं पर नहीं रुक जाते। सामान्य और सही रिटर्न दाखिल करने पर आपको पूंजीगत नुकसान या कारोबारी नुकसान अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने का जो मौका मिल जाता है, वह गलत रिटर्न दाखिल करने पर खत्म हो सकता है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर गलती नहीं सुधारते हैं तो कर विभाग यह भी मान सकता है कि आपने रिटर्न दाखिल ही नहीं किया।