विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के सवालों का तीखा जवाब देते हुए मोदी सरकार की आतंकवाद विरोधी नीतियों और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जोरदार बचाव किया। उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी, के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने पाकिस्तान के बाहवालपुर और मुरीदके जैसे बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। जयशंकर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “जिन लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ कुछ नहीं किया, वे अब हमारी कार्रवाइयों पर सवाल उठा रहे हैं।”
जयशंकर ने पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव और फिर डी-एस्केलेशन की प्रक्रिया पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि भारत की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से सैन्य चैनल के जरिए रुकने का प्रस्ताव आया। उन्होंने स्पष्ट किया, “पाकिस्तान ने कहा कि वे रुकने को तैयार हैं, लेकिन हमने कहा कि यह प्रस्ताव डीजीएमओ के जरिए आना चाहिए।”
जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के उस दावे को सिरे से खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में मध्यस्थता की थी। विदेश मंत्री ने कहा, “22 अप्रैल से 17 जून तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रम्प के बीच कोई फोन कॉल नहीं हुई।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत की कूटनीति की वजह से पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने वाले द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया गया। साथ ही, जर्मनी, फ्रांस और यूरोपीय संघ जैसे देशों ने भारत के आतंकवाद विरोधी रुख का समर्थन किया। क्वाड और ब्रिक्स जैसे संगठनों ने भी इस हमले की निंदा की।
जयशंकर ने पाकिस्तान-चीन के बीच सहयोग को लेकर विपक्ष की चेतावनियों को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, “विपक्ष हमें चीन से निपटने का ज्ञान देता है, लेकिन ये वही लोग हैं जिन्होंने 2जी और 3जी में चीन को घुसने दिया। हमारी सरकार ने स्वदेशी 5जी बनाया।” उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत ने चीन के साथ ओलंपिक या किसी गुप्त सौदे के लिए बात नहीं की, बल्कि आतंकवाद, व्यापार और तनाव कम करने के लिए अपनी बात मजबूती से रखी।
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट में सबसे लंबे समय तक रखा गया, जो भारत की कूटनीतिक सफलता को दर्शाता है।