facebookmetapixel
Advertisement
नोकिया ने भारत में नेतृत्व ढांचा बदला, समर मित्तल और विभा मेहरा को नई जिम्मेदारीनिप्पॉन स्टील इंडिया के सीईओ उम्मेन जून में सेवानिवृत्त होंगेजेएसडब्ल्यू मोटर्स ने दसॉ सिस्टम्स से किया करार, ईवी डिजाइन और उत्पादन को मिलेगी रफ्तारफेम-2 के बकाये अटके, ऑटो कंपनियां अब भी भुगतान के इंतजार मेंएलपीजी संकट में क्लबों का जुगाड़, लकड़ी के चूल्हे और इलेक्ट्रिक कुकिंग का सहारागैस पाइपलाइन विस्तार को रफ्तार, सरकार ने मंजूरी प्रक्रिया तेज कीदेश में एलपीजी सप्लाई की कोई कमी नहीं, घबराने की जरूरत नहीं: सरकारStock Market Update: शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 800 से ज्यादा अंक टूटा; निफ्टी 23100 के करीबStocks to Watch Today: IREDA से लेकर RIL और Infosys तक, शुक्रवार को इन 10 स्टॉक्स में रखें नजरअगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसन

पश्चिम एशिया संकट के बीच में PM मोदी ने मंत्रियों संग की बैठक, ईंधन और खाद्य सुरक्षा पर हुआ बड़ा मंथन

Advertisement

बैठक में प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि मंत्रियों और सचिवों का एक समूह बनाया जाए जो 'संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण' से समर्पित होकर काम करे

Last Updated- March 22, 2026 | 10:13 PM IST
Narendra Modi
वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी | फोटो: PTI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार को आयोजित वरिष्ठ मंत्रियों और प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति वाली कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष और बदलती क्षेत्रीय स्थिति के मद्देनजर रखते हुए कच्चे तेल, गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता, साथ ही बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि मंत्रियों और सचिवों का एक समूह बनाया जाए जो ‘संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण’ से समर्पित होकर काम करे। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि क्षेत्रीय समूह हितधारकों से परामर्श करके काम करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संघर्ष अभी बढ़ रहा है और इससे पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में प्रभावित है। उन्होंने कहा, ‘ऐसी स्थिति में नागरिकों को इस संघर्ष के प्रभाव से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।’ उन्होंने सरकार के सभी अंगों से मिलकर काम करने का आग्रह किया ताकि नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो। साथ ही उन्होंने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने को कहा ताकि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी न हो।

बैठक में कैबिनेट सचिव ने दुनिया के हालात और अब तक उठाए गए कदमों तथा सभी संबद्ध मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा अपनाए जा रहे निवारक उपायों पर प्रस्तुति दी। इस दौरान कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, ऊर्जा, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य प्रभावित क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव और उन्हें संबोधित करने के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा की गई। बैठक में देश की समग्र व्यापक आर्थिक स्थिति और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार किया गया।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पावधि में, मध्यम अवधि में और लंबी अवधि में बहुत गहरा असर होगा। बैठक में भारत पर इसके असर का आकलन किया गया। इसके लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के बचाव संबंधी उपायों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर आम नागरिकों  की महत्त्वपूर्ण आवश्यकताओं मसलन खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा आदि की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया। आवश्यक जरूरतों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर तरह के संभावित उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस बैठक में मौजूदा हालात के किसानों पर प्रभाव और खरीफ मौसम के लिए उनकी उर्वरक आवश्यकता का आकलन किया गया। पिछले कुछ वर्षों में पर्याप्त उर्वरक भंडार बनाए रखने के लिए उठाए गए कदम समय पर उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। भविष्य में निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक उर्वरक स्रोतों पर भी चर्चा की गई। यह भी निर्धारित किया गया कि सभी विद्युत संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार की आपूर्ति भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होने देगी। रसायन, औषधि, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक आयात स्रोतों में विविधता लाने के कई उपायों पर चर्चा की गई।

इसी तरह भारतीय वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए भविष्य में नए निर्यात गंतव्य विकसित किए जाएंगे। विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रस्तावित कई उपायों को सभी हितधारकों से परामर्श के बाद आने वाले दिनों में तैयार और लागू किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि मंत्रियों और सचिवों का एक समूह बनाया जाए जो पूरे सरकार के दृष्टिकोण से समर्पित होकर काम करे। प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि क्षेत्रीय समूह सभी हितधारकों से परामर्श करके काम करें।

सरकार की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि  बैठक में यह भी निर्धारित किया गया कि सभी विद्युत संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार की आपूर्ति की सुनिश्चितता भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होने देगी। इसके साथ ही  रसायन, औषधि, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक आयात स्रोतों में विविधता लाने के कई उपायों पर चर्चा की गई। सरकार ने कहा कि भारतीय वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में नए निर्यात गंतव्य विकसित किए जाएंगे। विभिन्न मंत्रालयों को उपाय सुझाने का कार्य सौंपा गया है, जिन्हें आने वाले दिनों में सभी हितधारकों से परामर्श के बाद लागू किया जाएगा।

पश्चिम एशिया में छिड़ा संघर्ष चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और होर्मुज स्ट्रेट नौवहन के लिए बंद है। ऐसे में भारत ने उर्वरक और तेल आयात के लिए रूस, जॉर्डन, मोरक्को और ट्यूनीशिया सहित अन्य देशों से संपर्क किया है। प्रधानमंत्री ने जॉर्डन, खाड़ी देशों, मलेशिया और ईरान के नेताओं को ईद की शुभकामनाएं दी हैं।

रविवार शाम को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित सीसीएस बैठक पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद दूसरी बैठक थी। इससे पहले शनिवार दोपहर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से हुई बातचीत की गई थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात की। सोमवार को जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव वर्चुअल रूप से एक सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसमें दोनों पक्षों के विशेषज्ञ खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच चुनौतियों पर विचार करेंगे। अमेरिकी रक्षा अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी भी इस सप्ताह भारत आने वाले हैं।

प्रधानमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद अधिकारियों ने कहा कि सरकार देशभर में निर्बाध आपूर्ति, स्थिर लॉजिस्टिक्स और कुशल वितरण सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है और उपभोक्ताओं तथा उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए वैश्विक घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रही है।

Advertisement
First Published - March 22, 2026 | 10:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement