कार्यस्थलों पर कर्मचारियों के बच्चों की देखभाल के लिए अनिवार्य क्रेच की व्यवस्था लागू हुए लगभग नौ साल हो गए हैं लेकिन केंद्र सरकार ने कोई अलग से आकलन या अनुपालन जांच नहीं कराई है। यह प्रावधान पहले संशोधित मातृत्व लाभ अधिनियम में जोड़ा गया था और बाद में इसे सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में भी जारी रखा गया।
गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने बताया कि सरकार के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है कि देश में कितने संस्थानों के लिए क्रेच की सुविधा देना अनिवार्य है और इनमें से कितने संस्थान इस नियम का पालन कर रहे हैं।
श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने सदन को बताया, ‘क्रेच की अनिवार्य व्यवस्था का कोई अलग से आकलन या अनुपालन जांच नहीं की गई है। सरकार के पास यह जानकारी भी नहीं है कि कितने संस्थानों को क्रेच की सुविधा उपलब्ध करानी है और उनमें से कितने इसका पालन कर रहे हैं।’
सरकार से जब पूछा गया कि क्या उसने इस प्रावधान के पालन की समीक्षा की है तब श्रम मंत्रालय ने कहा कि केवल क्रेच व्यवस्था की जांच के लिए कोई अलग अभियान नहीं चलाया गया। इसके बजाय, इंस्पेक्टर-फैसिलिटेटर नियमित निरीक्षण करते हैं और जहां नियमों का उल्लंघन मिलता है, वहां कार्रवाई की जाती है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि नियोक्ताओं को श्रम सुविधा पोर्टल 2.0 और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिये कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाती है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र के दायरे में आने वाले संस्थानों में निरीक्षणों की संख्या पिछले तीन वर्षों में लगातार घटी है। वर्ष 2023-24 में 402 निरीक्षण हुए थे, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 256 रह गए और वर्ष 2025-26 (मार्च तक) में केवल 142 निरीक्षण किए गए।
इसी दौरान नियमों के उल्लंघन के मामले भी कम हुए। वर्ष 2023-24 में 733 अनियमितताएं सामने आई थीं, जो वर्ष 2024-25 में 248 और वर्ष 2025-26 में घटकर 167 रह गईं। हालांकि, सुधारे गए मामलों की संख्या वर्ष 2024-25 के 77 से बढ़कर 2025-26 में 111 हो गई।
मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025-26 में नियमों के उल्लंघन पर 15 मुकदमे दर्ज किए गए। यह संख्या वर्ष 2024-25 में 10 और वर्ष 2023-24 में 11 थी। वर्ष 2025-26 में सिर्फ एक मामले में सजा हुई जबकि वर्ष 2024-25 में किसी भी मामले में सजा नहीं हुई थी। वर्ष 2023-24 में छह मामलों में सजा हुई थी।