प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
ईटुई ट्रांसपोर्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर की डीपटेक क्षेत्र की सहायक कंपनी नोवा कंट्रोल टेक्नॉलजिक्स और टाटा एलेक्सी ने भारत की स्वदेशी स्वचालित रेल सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली कवच 4.0 की अगली पीढ़ी मिलकर विकसित करने का फैसला किया है। उम्मीद है कि अगले छह से सात वर्षों में कवच के चरण-1 के कार्यान्वयन के दौरान भारतीय ट्रेन सुरक्षा बाजार में लगभग 50,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिलेंगे। कंपनियों के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।
कंपनियां दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया समेत निर्यात बाजार को भी लक्ष्य बना रही हैं, जो लंबे समय में उनके कारोबार को बढ़ावा दे सकते हैं। नोवा ने अक्टूबर में कवच 4.0 को मिलकर विकसित करने के लिए टाटा एलेक्सी के साथ रणनीतिक साझेदारी का ऐलान किया था। नोवा कवच 4.0 के लिए प्राथमिक मूल उपकरण विनिर्माता (ओईएम) के रूप में काम करेगी और विनिर्माण, परीक्षण तथा एकीकरण के लिए जिम्मेदार होगी, जबकि टाटा एलेक्सी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर डिजाइन, प्रोटोटाइपिंग, सुरक्षा प्रमाणन और साइबर सुरक्षा इंजीनियरिंग का नेतृत्व करेगी।
नोवा के निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी सौरजित मुखर्जी ने कहा, ‘कवच प्रणाली स्थापित करने की प्रति किलोमीटर औसत लागत 50 लाख से 60 लाख रुपये है और भारतीय रेलवे में शुरू में लगभग 40,000 किलोमीटर कवर किए जाने की संभावना है। प्रत्येक रेल इंजन के लिए शुरुआती निवेश 70 लाख से 80 लाख रुपये होगा। इसका मतलब है कि सुरक्षा श्रेणी में इस क्षेत्र के लिए कंपनियों की भारी मांग दिखने की उम्मीद है। कुल मिलाकर कवच के चरण-1 में लगभग 50,000 करोड़ रुपये का निवेश हो सकता है।’ उन्होंने कहा कि कवच को छह से सात वर्षों के भीतर भारतीय रेलवे नेटवर्क में लागू किए जाने की उम्मीद है।
उद्योग की यह उम्मीद तब है, जब भारतीय रेलवे द्वारा सुरक्षा पर कुल खर्च साल 2013-14 के 39,463 करोड़ रुपये की तुलना में तकरीबन दोगुना होकर साल 2025-26 में 1.16 लाख करोड़ रुपये हो चुका है।
टाटा एलेक्सी के प्रमुख (एरोस्पेस, रेल और ऑफ-हाईवे) जयराज राजापांडियन ने कहा, ‘तकनीक के नजरिए से हम अपने आर्किटेक्चर को भविष्य के लिहाज से तैयार कर रहे हैं ताकि जब कवच 5.0 आए, जिसमें साइबर सुरक्षा और मूविंग ब्लॉक शामिल हैं, तो मौजूदा समाधान में इसे अपनाना आसान हो जाए। इस तरह कवच 4.0 के बाद इसमें बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी। उद्योग में दूसरों के मुकाबले हमारे पास ज्यादा तैयार आर्किटेक्चर होगा।’
कवच स्वदेशी रूप से विकसित ऐसी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है, जो रेल इंजन के पायलटों को निर्दिष्ट गति सीमा के भीतर ट्रेनों को चलाने में मदद करता है, अगर पायलट ऐसा करने में विफल रहता है, तो ब्रेक अपने आप लग जाते हैं। यह खराब मौसम के दौरान भी ट्रेनों को सुरक्षित रूप से चलाने में मदद करता है।
यात्री ट्रेनों पर पहला असल परीक्षण फरवरी 2016 में शुरू हुआ और कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। अक्टूबर 2025 तक सरकार कवच पर लगभग 2,354 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी हैं। साल 2025-26 के लिए आवंटन 1,673 करोड़ रुपये है।