facebookmetapixel
Advertisement
आईटी सेक्टर से म्युचुअल फंड्स का भरोसा घटा, होल्डिंग 8 साल के निचले स्तर पर; AI से बढ़ी चिंता SME IPO बाजार में उछाल, मई में बढ़ी लिस्टिंग; छोटे इश्यूज ने दिखाई मजबूती SpiceJet को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कलानिधि मारन केस में ₹144 करोड़ जमा के लिए समय बढ़ाने से इनकारBoeing के फ्यूल-कंट्रोल स्विच की जांच तेज, भारतीय अधिकारी सिएटल में करेंगे परीक्षण की निगरानीPharmEasy की पेरेंट कंपनी एपीआई होल्डिंग्स का नया फॉर्मूला: पहले मुनाफा, फिर ग्रोथरुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: लगातार सातवें दिन गिरावट के साथ 96.53 प्रति डॉलर पर बंद हुई भारतीय मुद्राक्विक कॉमर्स को बड़ी राहत की तैयारी: डार्क स्टोर और गोदामों के लिए आसान होंगे GST पंजीकरण के नियमवेतन बढ़ोतरी में कटौती और सस्ती ब्याज दरों से कंपनियों की बल्ले-बल्ले, Q4 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा मुनाफाPepsiCo India का बड़ा दांव: 2030 तक क्षमता विस्तार पर ₹5,700 करोड़ निवेश करेगी कंपनीसाल 2032 तक $15 अरब की होगी हर IPL टीम, NFL को मिलेगी टक्कर; हुरुन इंडिया की रिपोर्ट में दावा

समुद्री सुरक्षा से साइबर खतरों तक सहयोग मजबूत: भारत-ईयू के बीच हुआ पहला विस्तृत रक्षा व सुरक्षा करार 

Advertisement

ये दोनों उपलब्धि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान हासिल हुईं

Last Updated- January 27, 2026 | 10:10 PM IST
India EU defence partnership
मार्च 2025 में प्रस्तुत यूरोपीय आयोग के रीआर्म यूरोप प्लान/रेडीनेस 2030 में रक्षा खर्च में 800 अरब यूरो से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ साइबर खतरों से लेकर आतंकवाद विरोधी उपायों तक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मकसद से अपनी तरह की पहली व्यापक रक्षा और सुरक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए।

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर सफल बातचीत के साथ-साथ भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी हस्ताक्षर हुए। ये दोनों उपलब्धि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान हासिल हुईं। यूरोपीय संघ के ये दोनों प्रमुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। 

मंगलवार को संयुक्त बयान के दौरान दोनों तरफ की लीडरशिप ने इसका जिक्र किया। बढ़ते भरोसे और दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे को विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखने के संकेत के रूप में एक सूचना सुरक्षा समझौते पर बातचीत शुरू की गई। इसके बारे में साझा बयान में कहा गया कि यह गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाएगा और सुरक्षा और रक्षा में मजबूत सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।

जब यूरोपीय संघ नियमित रूप से तीसरे देशों के साथ गोपनीय जानकारी का आदान-प्रदान करता है तो वह कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौतों के तहत ऐसा करता है। इसके तहत ऐसी जानकारी का आदान-प्रदान और संरक्षण दोनों सुनिश्चित किए जाते हैं। इन समझौतों को सूचना सुरक्षा समझौतों के रूप में जाना जाता है।

भारत-ईयू के संयुक्त बयान में कहा गया है, नेताओं ने भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर का स्वागत किया है। यह दोनों पक्षों के बीच इस तरह का पहला व्यापक रक्षा और सुरक्षा ढांचा है। इससे समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी, साइबर और हाइब्रिड खतरों, अंतरिक्ष और आतंकवाद निरोधक जैसे क्षेत्रों में संबंध और प्रगाढ़ होंगे।

दोनों पक्षों ने भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और अंतर-क्षेत्रीय सुरक्षा के बढ़ते खतरों को देखते हुए भारत-यूरोपीय संघ के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेंगे और समुद्री सुरक्षा से लेकर हाइब्रिड खतरों, आतंकवाद-निरोधक उपायों, अंतरिक्ष सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराध तक के क्षेत्रों में अपनी तैयारियों में इजाफा करेंगे। उन्होंने संकट प्रबंधन में सहयोग और बढ़ाने तथा पारस्परिक रूप से लाभकारी रक्षा-उद्योग सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।

भारत और यूरोपीय संघ के नेताओं ने टुवर्ड्स 2030: इंडिया-ईयू जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक एजेंडा भी स्वीकार किया। बयान में कहा गया है कि इसका मकसद दोनों पक्षों के बीच सामरिक सहयोग को बढ़ावा देना है। बयान के अनुसार, संयुक्त व्यापक सामरिक एजेंडा का लक्ष्य पांच प्रमुख पायों-  समृद्धि और स्थिरता, प्रौद्योगिकी और नवाचार, सुरक्षा और रक्षा, कनेक्टिविटी और वैश्विक चुनौतियां के साथ-साथ कौशल, गतिशीलता, व्यापार और जनता के बीच संबंधों- जैसे सहायक कारकों में प्रगति को रफ्तार देना है।

ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुए हैं जब नई दिल्ली सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं यूरोपीय संघ के सदस्य देश महत्वाकांक्षी पुनर्शस्त्रीकरण अभियान शुरू कर रहे हैं।

मार्च 2025 में प्रस्तुत यूरोपीय आयोग के रीआर्म यूरोप प्लान/रेडीनेस 2030 में रक्षा खर्च में 800 अरब यूरो से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव यूक्रेन के भीतर और बाहर रूसी आक्रामकता को लेकर यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच बढ़ती चिंता और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका के प्रति बढ़ती अविश्वास की भावना के बीच आया है।

Advertisement
First Published - January 27, 2026 | 9:57 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement