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समुद्री सुरक्षा से साइबर खतरों तक सहयोग मजबूत: भारत-ईयू के बीच हुआ पहला विस्तृत रक्षा व सुरक्षा करार 

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ये दोनों उपलब्धि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान हासिल हुईं

Last Updated- January 27, 2026 | 10:10 PM IST
India EU defence partnership
मार्च 2025 में प्रस्तुत यूरोपीय आयोग के रीआर्म यूरोप प्लान/रेडीनेस 2030 में रक्षा खर्च में 800 अरब यूरो से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ साइबर खतरों से लेकर आतंकवाद विरोधी उपायों तक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मकसद से अपनी तरह की पहली व्यापक रक्षा और सुरक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए।

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर सफल बातचीत के साथ-साथ भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी हस्ताक्षर हुए। ये दोनों उपलब्धि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान हासिल हुईं। यूरोपीय संघ के ये दोनों प्रमुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। 

मंगलवार को संयुक्त बयान के दौरान दोनों तरफ की लीडरशिप ने इसका जिक्र किया। बढ़ते भरोसे और दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे को विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखने के संकेत के रूप में एक सूचना सुरक्षा समझौते पर बातचीत शुरू की गई। इसके बारे में साझा बयान में कहा गया कि यह गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाएगा और सुरक्षा और रक्षा में मजबूत सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।

जब यूरोपीय संघ नियमित रूप से तीसरे देशों के साथ गोपनीय जानकारी का आदान-प्रदान करता है तो वह कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौतों के तहत ऐसा करता है। इसके तहत ऐसी जानकारी का आदान-प्रदान और संरक्षण दोनों सुनिश्चित किए जाते हैं। इन समझौतों को सूचना सुरक्षा समझौतों के रूप में जाना जाता है।

भारत-ईयू के संयुक्त बयान में कहा गया है, नेताओं ने भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर का स्वागत किया है। यह दोनों पक्षों के बीच इस तरह का पहला व्यापक रक्षा और सुरक्षा ढांचा है। इससे समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी, साइबर और हाइब्रिड खतरों, अंतरिक्ष और आतंकवाद निरोधक जैसे क्षेत्रों में संबंध और प्रगाढ़ होंगे।

दोनों पक्षों ने भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और अंतर-क्षेत्रीय सुरक्षा के बढ़ते खतरों को देखते हुए भारत-यूरोपीय संघ के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेंगे और समुद्री सुरक्षा से लेकर हाइब्रिड खतरों, आतंकवाद-निरोधक उपायों, अंतरिक्ष सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराध तक के क्षेत्रों में अपनी तैयारियों में इजाफा करेंगे। उन्होंने संकट प्रबंधन में सहयोग और बढ़ाने तथा पारस्परिक रूप से लाभकारी रक्षा-उद्योग सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।

भारत और यूरोपीय संघ के नेताओं ने टुवर्ड्स 2030: इंडिया-ईयू जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक एजेंडा भी स्वीकार किया। बयान में कहा गया है कि इसका मकसद दोनों पक्षों के बीच सामरिक सहयोग को बढ़ावा देना है। बयान के अनुसार, संयुक्त व्यापक सामरिक एजेंडा का लक्ष्य पांच प्रमुख पायों-  समृद्धि और स्थिरता, प्रौद्योगिकी और नवाचार, सुरक्षा और रक्षा, कनेक्टिविटी और वैश्विक चुनौतियां के साथ-साथ कौशल, गतिशीलता, व्यापार और जनता के बीच संबंधों- जैसे सहायक कारकों में प्रगति को रफ्तार देना है।

ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुए हैं जब नई दिल्ली सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं यूरोपीय संघ के सदस्य देश महत्वाकांक्षी पुनर्शस्त्रीकरण अभियान शुरू कर रहे हैं।

मार्च 2025 में प्रस्तुत यूरोपीय आयोग के रीआर्म यूरोप प्लान/रेडीनेस 2030 में रक्षा खर्च में 800 अरब यूरो से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव यूक्रेन के भीतर और बाहर रूसी आक्रामकता को लेकर यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच बढ़ती चिंता और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका के प्रति बढ़ती अविश्वास की भावना के बीच आया है।

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First Published - January 27, 2026 | 9:57 PM IST

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