गालाथेया बे इंटरनैशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (आईसीटीटी) परियोजना के कड़े विरोध के बावजूद केंद्र सरकार इस परियोजना को निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ाएगी। पोत परिवहन मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने इस विषय में संवाददाताओं से कहा, ‘यह नहीं रुकेगी। हम 2028 तक पहला चरण शुरु करेंगे।’
करीब 48,862 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना के दो चरणों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसे सरकार द्वारा दी जाने वाली 12,230 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतराल फंडिंग (वीजीएफ) की आवश्यकता होगी। फिलहाल इसे कैबिनेट की मंजूरी की प्रतीक्षा है। वित्त मंत्रालय की निजी-सार्वजनिक भागीदारी अप्रेजल समिति (पीपीपीएसी) इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है।
कांग्रेस लगातार इस परियोजना के विरुद्ध अभियान चला रही है। उसका कहना है कि यह पर्यावरण और आदिवासी समुदायों को नुकसान पहुंचाएगी। सोमवार को कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण राज्य मंत्री जयराम रमेश ने सोनोवाल को पत्र लिखकर प्रस्तावित परियोजना की स्वामित्व संरचना पर स्पष्टीकरण मांगा। उधर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार ने कोरल मैप्स को फिर से बनाया है और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए परामर्श प्रक्रिया को दरकिनार किया है।
राहुल गांधी ने 5 जून को द्वीपों का दौरा करने के बाद एक वीडियो में कहा था, ‘आप कैसा भारत विरासत में चाहते हैं? ऐसा भारत जहां वर्षा वनों को कसीनो के लिए जमींदोज कर दिया गया हो, कोरल रीफ्स को नक्शों से मिटा दिया गया हो, आदिवासी समुदायों को उनकी जमीन से बेदखल कर दिया गया हो और हमारी सांस लेने की हवा जहर में बदल गई हो? या ऐसा भारत जहां प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित हो, हमारे आदिवासी समुदाय सुरक्षित हों, और प्रगति प्रकृति के साथ चले, उसके खिलाफ नहीं।’
सोनोवाल ने इन दावों का खंडन किया कि स्थानीय समुदाय परियोजना के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने लोगों से मुलाकात की है। उनका मानना है कि हमें शीघ्र विकास शुरू करना चाहिए। उनका मानना है कि यह इलाका लंबे समय से अलग-थलग है और वे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, बंदरगाह, टाउनशिप और अन्य बुनियादी ढांचों की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि इन द्वीपों के लोग आर्थिक विकास चाहते हैं। इस परियोजना से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुल वन क्षेत्र का 1.82 प्रतिशत प्रभावित होगा जिसमें लगभग 18.6 लाख पेड़ हैं। सरकार ने कहा है कि अधिकतम 7,11,000 पेड़ काटे जाने की संभावना है जो 49.86 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में आते हैं। चूंकि द्वीपों में पहले से ही 75 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र है इसलिए स्थानीय स्तर पर प्रतिपूरक वनीकरण नहीं किया जा सकता। सरकार यह वनीकरण हरियाणा
में करेगी।
सोनोवाल ने कहा, ‘हमने सभी कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों से सक्रिय रूप से परामर्श किया है। दो प्रमुख चिंताएं थीं-लेदरबैक कछुए और कोरल जोन। हमने कछुओं के प्रजनन क्षेत्र को सुरक्षित रखा है और सुनिश्चित किया है कि कोई पर्यावरणीय विनाश न हो। हमने अपनी जांच परख में कोई जल्दबाजी नहीं की है।’