ब्रिक्स देशों ने गुरुवार को रोजगार बाजार में तेजी से हो रहे बदलावों और भविष्य में जरूरी कौशल की पहचान के लिए नया सहयोग नेटवर्क ‘ब्रिक्स कनेक्ट’ शुरू किया है। यह पहल कामगारों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने के मकसद से की गई है। इसके तहत सदस्य देश रोजगार बाजार की जानकारी, कौशल विकास और डिजिटल रोजगार सेवाओं से जुड़े अनुभव साझा करेंगे।
इस पहल के चार प्रमुख क्षेत्र होंगे। इनमें सामाजिक सुरक्षा, महिलाओं की रोजगार में भागीदारी, कौशल व रोजगार क्षमता और डिजिटल सार्वजनिक ढांचा शामिल हैं। यह नेटवर्क पहले से चल रहे ब्रिक्स वर्चुअल लायजन ऑफिस पर आधारित है। यह सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग और जानकारी साझा करने का ऑनलाइन मंच है।
नया नेटवर्क एक लचीला मंच होगा, जहां सदस्य देश अपनी जरूरत के मुताबिक सहयोग कर सकेंगे। इसमें सहयोग स्वैच्छिक होगा और किसी सदस्य देश के लिए कोई बाध्यता नहीं होगी। इसका मकसद रोजगार और श्रम बाजार से जुड़ी जानकारी साझा करना और सदस्य देशों की क्षमता बढ़ाना है।
भविष्य में रोजगार की बदलती जरूरतों को देखते हुए कौशल का अनुमान लगाने पर भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान कई दौर की चर्चा हुई। मई में तिरुवनंतपुरम में हुई दूसरी ब्रिक्स रोजगार कार्य समूह की बैठक में सामाजिक सुरक्षा, महिलाओं की रोजगार में भागीदारी और कौशल विकास पर सहयोग को लेकर चर्चा हुई।
इसमें कौशल की जरूरतों की पहचान और मैपिंग को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया। बैठक में सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास के लिए स्वैच्छिक और आपसी सहमति पर आधारित क्षमता निर्माण व्यवस्था का भी प्रस्ताव रखा गया।
जुलाई में हैदराबाद में हुई 12वीं ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक में इन चर्चाओं को आगे बढ़ाया गया। मंत्रियों ने एक घोषणा पत्र जारी कर ब्रिक्स कनेक्ट का ढांचा शुरू किया। बैठक में सामाजिक सुरक्षा, रोजगार को औपचारिक बनाने, महिलाओं की रोजगार में भागीदारी, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक पर ध्यान दिया गया। रोजगार कार्य समूह की पिछली बैठक में चार प्राथमिक क्षेत्र तय किए गए थे।