थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप्स ने नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचे के तहत प्लेटफॉर्म शुल्क पर प्रतिबंध का विरोध किया है। सूत्रों के अनुसार, उनका कहना है कि इससे उन्हें यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से प्रोसेस होने वाले प्रत्येक बिल भुगतान पर नुकसान होगा।
मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, मंगलवार को एनपीसीआई की यूपीआई सेवा एवं संचालन समिति की बैठक के दौरान यह आपत्ति उठाई गई।
यूपीआई ऐप्स अब तक भारत कनेक्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रोसेस किए जाने वाले बिजली, पानी, गैस और क्रेडिट कार्ड बिल जैसे भुगतानों पर उपयोगकर्ताओं से 3 रुपये से 5 रुपये तक का प्लेटफॉर्म शुल्क लेते रहे हैं। एनपीसीआई का नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचा, जो 15 अक्टूबर से प्रभावी होने वाला है, उस विकल्प को पूरी तरह से हटा देता है।
एनपीसीआई ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची में स्पष्ट किया, ‘नहीं, यूपीआई ऐप प्रदाता यूपीआई के माध्यम से किए गए किसी भी भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क या कोई अन्य शुल्क नहीं लेंगे। यूपीआई लेनदेन पर प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने के लिए यूपीआई ऐप्लिकेशन स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित हैं।’
एक वरिष्ठ फिनटेक अधिकारी ने कहा, ‘थर्ड पार्टी यूपीआई ऐप्स को यूपीआई के माध्यम से बिल भुगतान करने में समस्या आने वाली है। प्लेटफॉर्म शुल्क प्रतिबंधित हैं, इसलिए वे ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं ले सकते। उन्हें पहले से ही बीबीपीएस (भारत बिल भुगतान प्रणाली) को कमीशन देना पड़ता है, जो यूपीआई एमडीआर के माध्यम से मिलने वाले कमीशन से कहीं अधिक है।’
उद्योग सूत्रों के अनुसार, ऐप कंपनियां 2,000 रुपये से अधिक के अन्य व्यक्ति-से-व्यापारी भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर में अपने हिस्से से बिल भुगतान पर होने वाले नुकसान की भरपाई करने की उम्मीद कर रही हैं।
नए ढांचे के तहत, 2,000 रुपये से अधिक के बिल भुगतान पर प्रति लेनदेन 5 रुपये का एक समान एमडीआर लगता है, जिसमें से यूपीआई ऐप प्रदाताओं को 1 रुपया मिलता है, और शेष राशि यूपीआई चेन में अन्य प्रतिभागियों के बीच वितरित की जाती है। 2,000 रुपये या उससे कम के बिल भुगतान पर कोई एमडीआर नहीं लगता है, इसलिए ऐप्स को इन पर कुछ भी कमाई नहीं होती है।
उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, कमीशन और प्रोसेसिंग लागतों को ध्यान में रखने के बाद, ऐप्स प्रत्येक बिल भुगतान पर उससे होने वाली कमाई से अधिक खर्च करेंगे।प्लेटफॉर्म शुल्क प्रतिबंध सभी यूपीआई भुगतानों पर लागू होता है, इसलिए ऐप्स उपयोगकर्ताओं से 2,000 रुपये या उससे कम के बिलों पर भी शुल्क नहीं ले सकते हैं, जिन पर कोई एमडीआर नहीं होता है।
First Published - September 16, 2026 | 10:48 PM IST
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