प्रत्यक्ष विदेशी सूचीबद्घता में पूंजीगत लाभ पर अनिश्चितता

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 4:32 AM IST

भारतीय कंपनियों की प्रत्यक्ष वैश्विक सूचीबद्घता में समय लग सकता है, क्योंकि इसे लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है कि क्या ऐसे लेनदेन पर पूंजीगत लाभ कर लगेगा या नहीं।
सरकार के दो अधिकारियों के अनुसार, इसके अलावा, जहां केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2020 में विदेशी प्रत्यक्ष सूचीबद्घता को स्वीकृति (भारत में सूचीबद्घता के बगैर) दी थी, वहीं उन विदेशी क्षेत्राधिकारों को अंतिम रूप देने में विलंब हुआ है, जहां कंपनियां अपने शेयर सूचीबद्घ करा सकती हैं।
एक अधिकारी  ने कहा कि वित्त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालयों के साथ साथ नियामकों ने भी अब तक इस मामले पर किसी तरह की सहमति नहीं बनाई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इस मुद्दे पर मार्च-अप्रैल में मंत्रालयों और नियामकीय स्तरों पर कई बार बातचीत हुई थी।’ उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा वैश्विक सौदों से पैदा हुए लाभ पर कर का सुझाव दिए जाने के बाद इस मुद्दे पर चर्चाएं हुई थीं।
यह पता चलता है कि कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय (एमसीए) नियमों को अंतिम रूप देने से पहले विदेशी सूचीबद्घता मामले पर राजस्व विभाग की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
अधिकारी ने कहा, ‘हमारा मानना है कि हमें उन भारतीय कंपनियों को निराश नहीं करना चाहिए जो विदेश में सूचीबद्घता चाहती हैं। यदि आपके ऐसा कर ढांचा है जो अन्य देशों के अनुरूप नहीं है तो इससे भारतीय कंपनियों को नुकसान होगा और इससे दुनिया में इसे लेकर गलत संदेश जाएगा कि भारत सुधारों की रफ्तार बनाए रखने के लिए तैयार नहीं है।’
राजस्व विभाग के विपरीत, अन्य मंत्रालय और विभाग भी इस मुद्दे पर अनिश्चितता से जूझ रहे हैं कि क्या भारतीय शेयरों को अमेरिकन डिपोजिटरी रिसीप्ट (एडीआर) और ग्लोबल डिपोजिटरी रिसीप्ट (जीडीआर) योजनाओं के अनुरूप समझा जाना चाहिए। मौजूदा समय में भारतीय कंपनियों के एडीआर/जीडीआर में कारोबार कर रहे विदेशी निवेशकों को अपने मुनाफे पर कोई पूंजीगत लाभ कर चुकाने की जरूरत नहीं है।
सरकार में एक अन्य अधिकारी ने कहा किआम सहमति बनाए जाने के लिए संबद्घ मंत्रालयों ने प्रावधान लागू करने की संभावना तलाशी है जिससे कि विदेश में सूचीबद्घ शेयरों पर कराधान के लिए नियम लागू किए जा सकें। कंपनियों पर उनके मुनाफे, निवेश पूंजी, चुकता पूंजी और कारोबार के आधार पर कराधान की सीमा लगाए जाने को लेकर उच्च स्तर पर चर्चा हुई है। उदाहरण के लिए, कम निवेश पूंजी वाली कंपनियों को सूचीबद्घता की अनुमति नहीं होगी।
अन्य योजना गुजरात में इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटीज गिफ्ट सेंटर के साथ बातचीत शुरू करने की बनाई जा रही है, क्योंकि इसे करों से पहले ही छूट दी गई है। एक अधिकारी ने यह स्वीकार करते हुए कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर का विदेशी सूचीबद्घता संबंधित कार्य में भी विलंब हुआ था।
माना जा रहा है कि सरकार को भारतीय कंपनियों के लिए प्रत्यक्ष सूचीबद्घता के लिए नियमों की अधिसूचना को लेकर विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों से पूछताछ प्राप्त हुई है। अधिकारी ने कहा, ‘यूनिकॉर्न बनने के लिए उत्साहित कंपनियां स्टॉक एक्सचेंजों के लिए आकर्षण हैं।’
विदेशी सूचीबद्घता के लिए एक प्रमुख योजना आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा पेश की जानी थी और सूचीबद्घता कंपनियों के लिए नियम बाजार नियामक सेबी द्वारा तैयार किए जाने होंगे। यह योजना पेश किए जाने के बाद कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय गैर-सूचीबद्घ कंपनियों के लिए नियम बनाएगा।

First Published : May 23, 2021 | 11:19 PM IST