भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को उत्कर्ष 2029 ढांचे के तहत अप्रैल, 2026 से मार्च, 2029 तक की अपनी मध्यम अवधि की रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसका उद्देश्य केंद्रीय बैंक को विश्व स्तरीय बनाना और पूर्ण सेवा के रूप में स्थिति को मजबूत करना है।
इस ढांचे के अंतर्गत केंद्रीय बैंक मुद्रा प्रबंधन के आधुनिकीकरण के लिए प्रोजेक्ट सा-मुद्रा जैसी दीर्घकालिक पहलों, अधिक कुशल सीमा पार भुगतानों के लिए केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) के विस्तार, समावेशी ऋण वितरण को सक्षम बनाने के लिए एकीकृत ऋण इंटरफेस (यूएलआई) के विस्तार और वित्तीय क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता व क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए नियामक ढांचे विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
इसके अतिरिक्त उत्कर्ष 2029 के तहत रिजर्व बैंक उत्कर्ष 2.0 के तहत रखी गई नींव पर आगे बढ़ेगा। इसमें भारतीय रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण और यूपीआई का वैश्विक विस्तार शामिल है, ताकि सीमा पार भुगतानों में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सके। रिजर्व बैंक के अप्रैल-मार्च वित्तीय वर्ष के अनुरूप यह ढांचा गतिविधि-आधारित बजट के माध्यम से संसाधन आबंटन और उपयोग में सुधार लाने का प्रयास करता है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘तेजी से हो रहे तकनीकी विकास, बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और जलवायु संबंधी उभरती चुनौतियों से भरे इस युग में उत्कर्ष 2029 नियमों को सरल बनाने, ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने, वित्तीय बाजारों को मजबूत करने, प्रौद्योगिकी को उन्नत करने और कर्मचारियों के कौशल को बढ़ाने जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है।’