facebookmetapixel
Advertisement
BiharOne: बिहार में डिजिटल गवर्नेंस की नई शुरुआत, CIPL के साथ बदलाव की बयारईरानी तेल खरीद का दावा गलत, रिलायंस ने रिपोर्टों को बताया बेबुनियादरनवे से रियल्टी तक: जेवर एयरपोर्ट ने बदली नोएडा की प्रोपर्टी की कहानी, 2027 तक आ सकती है 28% और तेजी‘हेडलाइन्स’ से कहीं आप भी तो नहीं हो रहे गुमराह? SIP पर जारी रखें ये स्ट्रैटेजीAM/NS India में बड़ा बदलाव: दिलीप ओम्मन होंगे रिटायर, अमित हरलका बनेंगे नए सीईओभारत में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं, 60 दिन का स्टॉक मौजूद: सरकारभारत की तेल जरूरतें क्यों पूरी नहीं कर पा रहा ईरानी क्रूड ऑयल? चीन की ओर मुड़े जहाजलाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनी

बैंकिंग सिस्टम में नकदी का संकट? RBI डालेगा ₹1 लाख करोड़, टैक्स भुगतान के दबाव के बीच बड़ी राहत

Advertisement

आरबीआई ने अग्रिम कर भुगतान और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बैंकिंग प्रणाली में नकदी की कमी को दूर करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के ओएमओ (OMO) की घोषणा की है

Last Updated- March 08, 2026 | 10:56 PM IST
Reserve bank of india (rbi)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक ने  अल्पकालिक दबावों को दूर करने के लिए नकदी प्रबंधन का सुनियोजित तरीका अपनाया है। रिजर्व बैंक सतत ढंग से नकदी उपलब्ध करा रहा है। इस क्रम में रिजर्व बैंक ने 1 लाख करोड़ रुपये के ओपन मार्केट ऑपरेशंस की नवीनतम घोषणा की है। इस घोषणा का ध्येय इस महीने अग्रिम कर के कारण नकदी प्रबंधन से निकासी होने के कारण बैंकिंग प्रणाली में आई कमी को आसान बनाना है।

बहरहाल, तात्कालिक कारण मौसमी कर भुगतान है। इस सिलसिले में बाजार के जानकारों का कहना है कि यह कदम प्रणाली में स्थायी तरलता पर व्यापक दबाव को भी दर्शाता है। दरअसल, नकदी पर पहले के खरीद-बिक्री स्वैप समझौतों की परिपक्वता और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच रुपये को स्थिर करने के लिए रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप का असर पड़ा है।

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को बैंकिंग प्रणाली में 3.02 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि थी। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा था कि वह 50,000 की अलग-अलग दो किस्तों में ओएमओ खरीदारी करेगा। बाजार के प्रतिभागियों के अनुसार यह कदम नकदी की कमी को पाटने के उद्देश्य से किया गया है। 

दरअसल, अग्रिम कर भुगतान और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) निपटान के कारण नकदी की कमी होने की आशंका है।  करूर वैश्य बैंक में ट्रेजरी प्रमुख वीआरसी रेड्डी ने कहा, ‘ रिजर्व बैंक ने ओएमओ के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपये की दो किस्तों में 1 लाख करोड़ रुपये की टिकाऊ नकदी डालने का फैसला किया है। यह ऐसे समय में हुआ है जब अग्रिम कर और जीएसटी निकासी के कारण नकदी प्रणाली के अस्थायी रूप से घाटे में जाने की उम्मीद है। हालांकि, इन दबावों से परे, बाय/सेल स्वैप की मैच्योरिटी और वेस्ट एशिया संकट के बढ़ने के बाद डॉलर/रुपये बाजार में लगातार हस्तक्षेप से टिकाऊ नकदी भी प्रभावित हुई है।’

बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि अग्रिम सौदे उच्च स्तर पर बने हुए हैं।  इसका कारण यह है कि रिजर्व बैंक ने रुपये को स्थिर करने के लिए स्पॉट डॉलर की सीधी बिक्री के बजाय फॉरवर्ड और स्वैप हस्तक्षेपों पर तेजी से भरोसा किया है। इससे वह विदेशी मुद्रा भंडार के तत्काल आहरण से बच सके। हालांकि, बड़ी फॉरवर्ड बुक का मतलब है कि इन अनुबंधों के परिपक्व होने पर भविष्य में पर्याप्त डॉलर देनदारियां होंगी। इससे आने वाले महीनों में घरेलू नकदी स्थितियों और मुद्रा बाजार की गतिशीलता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

जनवरी के अंत तक रुपये के फॉरवर्ड बाजार में रिजर्व बैंक की बकाया नेट शॉर्ट डॉलर पोजीशन दिसंबर के अंत तक 62.35 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 68.42 अरब डॉलर हो गई।

Advertisement
First Published - March 8, 2026 | 10:54 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement