भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति के बाद की प्रेस मीट में कहा कि बैंकिंग तंत्र में अतिरिक्त लिक्विडिटी सितंबर के आसपास सबसे अधिक रह सकती है। लेकिन अर्थव्यवस्था की सामान्य जरूरतों के कारण यह अतिरिक्त लिक्विडिटी धीरे-धीरे कम हो जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने की योजना से बैंकिंग तंत्र में आने वाली अतिरिक्त रकम का असर केवल अस्थायी रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त नकदी तीन मुख्य वजहों से कम होगी। पहली, लोगों के पास नकदी का चलन बढ़ेगा। दूसरी, बैंकों में जमा बढ़ने के साथ उन्हें अधिक नकदी सुरक्षित रखना होगा। तीसरी, विदेशी मुद्रा से जुड़े कुछ अग्रिम अनुबंध तय समय पर पूरे हो जाएंगे।
संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘यह अतिरिक्त लिक्विडिटी केवल थोड़े समय रहेगी। इसका सबसे अधिक असर दूसरी तिमाही यानी सितंबर के आसपास दिख सकता है। इसके बाद यह सामान्य आर्थिक गतिविधियों के कारण अपने से कम हो जाएगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग तंत्र में आने वाली अतिरिक्त रकम न तो बहुत ज्यादा होगी और न ही असामान्य।
आरबीआई हर साल खुले बाजार परिचालन और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसे उपायों के जरिये लगभग इतनी ही लिक्विडिटी उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि आखिरकार एफसीएनआर (बी) योजना के तहत बैंक कितनी राशि जुटाते हैं, उसी से लिक्विडिटी पर असर का पता चलेगा।
आरबीआई ने पिछले महीने बैंकों को एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने के लिए रियायती स्वैप सुविधा देने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य विदेशों से अधिक पूंजी आकर्षित करना है।