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लघु बचत दरों पर सीतारमण का बड़ा बयान: महंगा कर्ज मंजूर, पर बचतकर्ताओं का नुकसान नहीं होना चाहिए

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वरिष्ठ नागरिकों के हितों की रक्षा हेतु लघु बचत दरों को स्थिर रखने की प्रतिबद्धता जताई है, भले ही सरकार के लिए यह महंगा हो

Last Updated- April 07, 2026 | 5:04 PM IST
FM Nirmala Sitharaman
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण | फाइल फोटो

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि लघु बचत करने वालों के लिए ब्याज की दरों में गिरावट नहीं आए, चाहे लघु बचत से उधार लेना सरकार के लिए महंगी ही क्यों ने हो जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर लघु बचत से इकट्ठा हो रहा धन भी कम नहीं होगा।

सीतारमण ने कहा, ‘सरकार के लिए मैं दोहरी मार पड़ने जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहती और यह नहीं कह सकते कि हमें यह महंगा पड़ रहा है, हमें वह महंगा पड़ रहा है। सरकार को दोनों पक्षों का ध्यान रखना होता है।’

पूर्व आरबीआई डिप्टी गवर्नर श्यामला गोपीनाथ की अध्यक्षता में बनी समिति की छोटी बचत योजनाओं पर सिफारिशों से संबंधित नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी के पूर्व निदेशक एम गोविंदा राव के सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने यह कहा।

सीतारमण ने कहा कि आज बचत को विभिन्न प्लेटफार्मों पर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय में हर तिमाही रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर श्यामला गोपीनाथ की अध्यक्षता वाली समिति की बचत दर पर की गई सिफारिशों के अनुसार दरें तय करने पर चर्चा होती है। उन्होंने कहा, ‘हम श्यामला गोपीनाथ की सिफारिशों से बहुत दूर हैं। ऐसा इसलिए भी है कि ब्याज दरें इस समय एक अलग स्तर पर चली गई हैं।’

वित्त मंत्री ने कहा कि मंत्रालय में बैठकर ब्याज दरों को नीचे लाकर वरिष्ठ नागरिकों को चोट पहुंचाने को लेकर ‘बहुत बड़ा धर्मसंकट’ था, क्योंकि वे इसी से कमाते हैं, इसी के सहारे जीवनयापन करते हैं, लेकिन साथ ही अगर हम सिर्फ राष्ट्रीय लघु बचत कोष को देखें तो यही वह कोष है, जहां से हम उधारी लेते हैं।

गोपीनाथ के नेतृत्व में बनी समिति की सिफारिश के मुताबिक लघु बचत की दरें तय करने का फॉर्मूला यह है कि तिमाही आधार पर दरें तय की जाएं और उससे होने वाले मुनाफे को सरकारी प्रतिभूतियों के 4 महीने के शुरआती तीन महीने के औसत तिमाही मुनाफे से जोड़ा जाए।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘लोगों को लगता है कि वे अपने निवेश या बचत का ध्यान रख सकते हैं, जिसे वे बाजार में लगाते हैं।’

सरकार ने 30 मार्च को जारी अधिसूचना में विभिन्न लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया था, जिसमें सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) और राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) शामिल हैं। लगातार आठवीं तिमाही में दरें यथावत रखी गई हैं।   सरकार ने 2023-24 की चौथी तिमाही के दौरान कुछ लघु बचत योजनाओं की दरों में बदलाव किया था, जिसे डाकघर और बैंक चलाते हैं।

राष्ट्रीय बचत योजना के तहत प्राप्त सभी जमाओं को राष्ट्रीय लघु  बचत कोष (एनएसएसएफ) में जमा किया जाता है। जमाकर्ताओं द्वारा सभी निकासी फंड में संचय से की जाती है। फंड में शेष राशि का निवेश केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर तय किए गए मानदंडों के अनुसार राज्य और केंद्र सरकारों की विशेष प्रतिभूतियों में किया जाता है।

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First Published - April 7, 2026 | 5:04 PM IST

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