Mahindra & Mahindra इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बाजार में लंबी रेस की तैयारी कर रही है। कंपनी का फोकस सिर्फ नई इलेक्ट्रिक SUV लॉन्च करने पर नहीं है। वह फैक्ट्री की क्षमता बढ़ा रही है, नए प्लांट तैयार कर रही है और आने वाले सालों की मांग को ध्यान में रखकर निवेश भी बढ़ा रही है। यही वजह है कि ब्रोकरेज मान रहे हैं कि M&M का EV कारोबार आने वाले समय में कंपनी की कमाई और ग्रोथ, दोनों को नई रफ्तार दे सकता है।
M&M का कहना है कि उसकी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बाजार से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। खासतौर पर XEV 9S की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी भरोसे के दम पर कंपनी अब अपने EV पोर्टफोलियो को और मजबूत करने में जुटी है।
अभी M&M हर महीने करीब 64,500 SUV बना सकती है। इसमें 56,500 पेट्रोल-डीजल SUV और 8,000 इलेक्ट्रिक SUV शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य FY27 के आखिर तक कुल क्षमता बढ़ाकर करीब 82,000 यूनिट प्रति महीना करना है। इसमें इलेक्ट्रिक SUV की क्षमता बढ़कर 12,000 यूनिट प्रति महीना हो जाएगी।
यानी कंपनी सिर्फ नई गाड़ियां लॉन्च नहीं कर रही, बल्कि पहले से यह भी सुनिश्चित कर रही है कि बढ़ती मांग के हिसाब से पर्याप्त उत्पादन हो सके।
FY27 के बाद भी M&M की विस्तार योजना जारी रहेगी। कंपनी FY28 में चाकण प्लांट में हर महीने 10,000 यूनिट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ेगी। इसके बाद नागपुर में नए ग्रीनफील्ड प्लांट के जरिए FY30 और FY31 में दो चरणों में बड़ी क्षमता जोड़ी जाएगी। इससे आने वाले वर्षों में नए इलेक्ट्रिक मॉडल का उत्पादन बढ़ाना आसान होगा।
कंपनी ने बताया है कि उसके आने वाले नए मॉडल NU-IQ प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे। इन लॉन्च के जरिए M&M उन सेगमेंट में भी एंट्री करना चाहती है, जहां अभी उसकी मौजूदगी कम है। यानी कंपनी सिर्फ मौजूदा मॉडल पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि नए ग्राहकों को भी जोड़ने की तैयारी कर रही है।
M&M की इलेक्ट्रिक SUV की हिस्सेदारी जून तिमाही में 12% रही, जबकि पूरे उद्योग का औसत 9% था। यह दिखाता है कि कंपनी फिलहाल EV सेगमेंट में इंडस्ट्री की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
ICICI Securities का कहना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की वजह से फिलहाल मार्जिन पर दबाव है। इसके बावजूद कंपनी की SUV की मांग मजबूत बनी हुई है और उत्पादन क्षमता बढ़ने से आगे ग्रोथ को सहारा मिलेगा। इसी वजह से ब्रोकरेज ने शेयर पर BUY की रेटिंग बरकरार रखते हुए 4,100 रुपये का टारगेट दिया है।
हालांकि, कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। अगर इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने की रफ्तार उम्मीद से धीमी रहती है या नए मॉडल को बाजार से अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिलता, तो EV प्लान की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)