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बढ़ रहे विकल्प, मगर आधारभूत निवेश योजनाओं से जुड़े रहें

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Last Updated- December 12, 2022 | 7:11 AM IST

बाजार तेजी से चढ़ रहे हैं, इसलिए ऐक्टिव फंड प्रबंधकों के लिए सूचकांकों को मात देना मुश्किल साबित हो रहा है। ऐसे में निवेशक पैसिव फंडों की तरफ रुख कर रहे हैं, जो किसी सूचकांक का अनुसरण करते हैं। इस माहौल की तैयारी के लिए फंड हाउस बड़ी तादाद में पैसिव फंड शुरू कर रहे हैं। इस समय भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की वेबसाइट से आठ पैसिव फंडों के आवेदन आने का पता चलता है। हालांकि इतने अधिक विकल्प होने से यह भ्रम पैदा होने के आसार हैं कि निवेशक अपना मुख्य पोर्टफोलियो बनाने के लिए किस पैसिव फंड को अपनाए।
बुनियादी घटक
लार्ज-कैप को लेकर यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि ऐक्टिव फंडों के लिए अपने बेंचमार्कों को मात देना मुश्किल होता जा रहा है और इसलिए निवेशकों को पैसिव फंडों को अपनाना चाहिए। ज्यादातर खुदरा निवेशक महज दो पैसिव फंडों से अपना इक्विटी पोर्टफोलियो बना सकते हैं। डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में पैसिव निवेश के प्रमुख अनिल घेलानी ने कहा, ‘अपने पोर्टफोलियो के बुनियादी घटकों के रूप में निफ्टी50 फंड और निफ्टी नेक्स्ट 50 फंड का इस्तेमाल करें।’ ये दोनों फंडों से आप लार्ज कैप में निवेश कर पाएंगे और आपको मिडकैप का भी स्वाद मिलेगा क्योंकि आम तौर पर निफ्टी नेक्स्ट 50 सूचकांक में कुछ मिड कैप शेयर (आम तौर पर 8 से 10 फीसदी) होते हैं। अगर आप अपने पोर्टफोलियो में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं करना चाहते हैं तो अकेला निफ्टी 50 फंड ही पर्याप्त होगा। बहुत से सलाहकार मिड-कैप खंड में किसी पैसिव फंड का सुझाव नहीं देना चाहते हैं। उनका मानना है कि इसमें ऐक्टिव फंड प्रबंधकों के अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करने की गुंजाइश है। कुछ अन्य अड़चनों की वजह से इस श्रेणी में पैसिव फंड चलाना मुश्किल है। इस श्रेणी के शेयरों में कंपनी को चलाने और प्रबंधन की गुणवत्ता से संबंधित अड़चनें हो सकती हैं। आंख मूंदकर सभी 150 मिडकैप शेयर चुनने से नुकसान हो सकता है। वहीं कम तरलता भी एक बड़ी समस्या है। कई बार शेयरों की उपलब्धता के अभाव से भी फैसिव फंड प्रबंधकों के लिए प्राप्त धनराशि को निवेश करना मुश्किल हो जाता है। यह स्थिति ऐक्टिव फंड प्रबंधकों से अलग है। उनके पास धीरे-धीरे धनराशि को निवेश करने की गुंजाइश नहीं होती है। कम तरलता की वजह से इम्पैक्ट लागत अधिक होती है, जिसका मतलब है कि किसी शेयर की कीमत बड़े पैमाने पर खरीदारी पर चढ़ती और बड़े पैमाने पर बिकवाली से गिरती है। इसलिए बहुत से सलाहकार निवेशकों को इस श्रेणी में ऐक्टिव फंड को अपनाने की सलाह देते हैं। अगर आप किसी पैसिव फंड को चुनते हैं तो ऐसा फंड चुनें, जो इस पूरी श्रेणी में चुनिंदा शेयरों को चुनता है। इस लिहाज से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मिडकैप सलेक्ट ईटीएफ के बारे में विचार किया जा सकता है, जो एसऐंडपी बीएसई मिडकैप सलेक्ट सूचकांक का अनुसरण करता है। यह सूचकांक नियम आधारित है और एसऐंडपी बीएसई मिडकैप कंपनियों में से 30 सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा तरल कंपनियों को चुनता है। इस पोर्टफोलियो का हिस्सा बनने के लिए किसी शेयर को डेली फ्लोट-एडजस्टेड मार्केट कैप और सालाना कारोबारी मूल्य पर कुछ निश्चित मापदंड पूरे करने होते हैं। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड के प्रमुख (उत्पाद एवं रणनीति) चिंतन हरिया ने कहा, ‘इन फिल्टरों की बदौलत निवेशक पोर्टफोलियो के तरलता पहूल को लेकर आश्वस्त हो सकते हैं। यह फंड उन्हें किफायती लागत में फंडामेंटल के हिसाब से मजबूत मिडकैप कंपनियों में निवेश का मौका देता है।’ गुणवत्ता और तरलता की समस्याएं स्मॉल कैप श्रेणी में और अधिक हैं। निवेशकों के लिए इस श्रेणी से बचना ही बेहतर हो सकता है क्योंकि इसमें उतार-चढ़ाव अधिक रहता है। अगर वह चाहें तो इसमें किसी ऐक्टिव फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेश
इसके बाद अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का 15 से 20 फीसदी हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेश करें। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और फिड््यूशरीज के संस्थापक अविनाश लूथरिया ने कहा, ‘आप विदेशी बाजार में निवेश के लिए एसऐंडपी 500 आधारित फंड या नैस्डेक 100 आधारित फंड इस्तेमाल कर सकते हैं।’ कुछ सलाहकार एसऐंडपी 500 आधारित फंड के पक्ष में हैं क्योंकि यह ज्यादा डायवर्सिफाइड है। अन्य नैस्डेक 100 आधारित उत्पाद को तरजीह देते हैं क्योंकि इसका भारत के प्रमुख सूचकांकों से कम सह-संबंध है। इससे निवेशकों को तकनीकी कंपनियों (हमारी दिग्गज सूचना तकनीकी कंपनियां सेवा प्रदाता हैं) में निवेश का मौका मिलता है।
आगे क्या?
अगर आप डेट में पैसिव फंड तलाश रहे हैं तो एडलवाइस का भारत बॉन्ड फंड ऑफ फंड (एफओएफ) और मोतीलाल ओसवाल का पांच साल का जी-सेक ईटीएफ अच्छा विकल्प हैं। दोनों में ही मामूली क्रेडिट जोखिम है। बहुत से कारक आधारित सूचकांक शुरू किए गए हैं, लेकिन अभी उनका पर्याप्त ट्रैक-रिकॉर्ड नहीं है। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार पर्सनल फाइनैंस प्लान के संस्थापक दीपेश राघव ने कहा, ‘जब उनका ट्रैक रिकॉर्ड बन जाएगा तो आप उनके बारे में ऐक्टिव फंडों के प्रतिस्थापन के रूप में विचार कर सकते हैं।’
ईटीएफ, इंडेक्स फंड या फंड ऑफ फंड?
ज्यादातर खुदरा निवेशकों के लिए ईटीएफ के बजाय इंडेक्स फंड बेहतर होगा। बहुत से निवेशकों के पास डीमैट खाता नहीं होता है। निवेशकों को ईटीएफ में खर्च अनुपात के अलावा अन्य शुल्क भी वहन करने होते हैं, जिनमें सालाना डीमैट फीस, ब्रोकरेज फीस आदि शामिल हैं। लूथरिया ने कहा, ‘अगर आप कोई ईटीएफ इस्तेमाल करते हैं तो शून्य लागत ब्रोकरेज का विकल्प चुनें।’ सलाहकारों के इंडेक्स फंडों के सुझाव देने की सबसे बड़ी वजह यह है कि अगर ईटीएफ में कारोबारी मात्रा कम है और बोली पेशकश अंतर अधिक है तो उससे आपका प्रतिफल कम हो सकता है।  राघव ने कहा, ‘आम तौर पर ईटीएफ की बाजार कीमत नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) से अलग होती है। इससे निवेशक पर अतिरिक्त लागत आती है।’ लूथरिया ने कहा, ‘बिना तरलता वाले ईटीएफ अप्रासंगिक उत्पाद हैं और इनसे बचा जाना चाहिए।’ किसी इंडेक्स फंड में निवेशक एनएवी पर किसी फंड हाउस से यूनिट खरीदता या बेचता है। निवेशक उनमें सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान भी चला सकता है। फंड हाउस ईटीएफ की दिक्कतों से बचने के लिए उन्हें एफओएफ फॉरमेट में भी पेश करते हैं। किसी एफओएफ का खर्च अनुपात अधिक होता है, लेकिन उनमें बोली पेशकश अंतर जैसे मुद्दों का समाधान हो जाता है।
लागत पर दें ध्यान
कोई पैसिव उत्पाद चुनते समय उसके खर्च अनुपात पर ध्यान दें। इन दिनों खर्च अनुपात घटकर आकर्षक स्तरों पर आ गए हैं। अगर आप किसी ईटीएफ को चुनते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि उसमें तरलता मौजूद है। कारोबारी मात्रा को लेकर सूचना एक्सचेंजों पर उपलब्ध है।

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First Published - March 11, 2021 | 11:25 PM IST

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