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ब्याज दर और बढ़े उससे पहले फिक्स्ड दर पर कार ऋण लें

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Last Updated- December 11, 2022 | 5:31 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने मई से अब तक रीपो दर में 90 आधार अंक की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे वाहन ऋण भी पहले से महंगा हो गया है। लगता तो यही है कि ब्याज दर में आगे और इजाफा हो सकता है। इसलिए अगर आप कार खरीदने की सोच रहे है तो स्थिर यानी फिक्स्ड ब्याज दर पर कर्ज लेना ही समझदारी होगी।
फ्लोटिंग से बेहतर फिक्स्ड
वाहन ऋण पर ब्याज की दर फिक्स्ड भी होती है और फ्लोटिंग भी। फ्लोटिंग दर में समय-समय पर परिवर्तन होता रहता है, जबकि फिक्स्ड दर में कर्ज पर ब्याज की दर नहीं बदलती। पैसा बाजार के वरिष्ठ निदेशक साहिल अरोड़ा कहते हैं, ‘अधिकतर सरकारी बैंक फ्लोटिंग दर पर कार ऋण देते हैं, जबकि निजी बैंक फिक्स्ड दरों पर कार ऋण की पेशकश करते हैं। कुछ ऋणदाता दोनों विकल्प देते हैं।’विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार की हालिया स्थिति देखते हुए फिक्स्ड दर पर कार ऋण लेना बेहतर विकल्प है। अरविंद राव ऐंड असोसिएट्स के संस्थापक और प्रमाणित वित्तीय योजनाकार अरविंद ए राव कहते हैं, ‘अगले 18 से 24 महीनों में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना है। इसलिए फिक्स्ड दर पर ही कार ऋण लेना चाहिए ताकि आने वाले महीनों में एकाएक मासिक किस्त (ईएमआई) बढ़ने का झटका नहीं झेलना पड़े।’
बैंकबाजार डॉटकॉम के मुख्य कारोबार अधिकारी पंकज बंसल की भी यही राय है। वह कहते हैं, ‘फिक्स्ड दर पर कार ऋण लेना ज्यादा सही है क्योंकि इसमें कर्ज की पूरी अवधि में ब्याज दर एक ही रहती है।’ वाहन ऋण ज्यादा से ज्यादा 8 साल तक का हो सकता है।

प्री-पेमेंट शुल्क का रखें ध्यान
फिक्स्ड दर पर कार ऋण लेने वालों को इसकी एक खामी भी समझ लेनी चाहिए। अरोड़ा बताते हैं कि आरबीआई ने फ्लोटिंग दर पर कार ऋण देने वाले संस्थानों को कर्ज का एक हिस्सा पहले ही एकमुश्त चुकाने यानी प्री-पेमेंट करने या पूरा कर्ज वक्त से पहले चुकाने यानी फोरक्लोजर पर किसी भी तरह का शुल्क वसूलने से रोक दिया है। मगर फिक्स्ड दर पर कार ऋण लेने वालों को यह शुल्क चुकाना पड़ सकता है।
कर्ज देने वाली संस्थाएं कभी-कभी प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर से रोकने वाली शर्तें भी लगा देती हैं। अरोड़ा के हिसाब से ऐसा होने पर प्री-पेंमेंट के फायदे आपको नहीं मिलेंगे।

पुरानी गाड़ियों पर कर्ज महंगा
पिछले कुछ साल में कार की कीमतें बढ़ने और कर्ज महंगा होने के कारण कई लोग पुरानी या इस्तेमालशुदा कार भी खरीदने लगे हैं। ऐसी कारों के लिए फिक्स्ड दर पर कर्ज देने वाली कंपनी पूनावाला फिनकॉर्प के अध्यक्ष और चीफ ऑफ स्टाफ मनीष चौधरी कहते हैं, ‘नई कार के लिए कर्ज पर ब्याज की दर 7 फीसदी से शुरू हो सकती है मगर इस्तेमाल की गई कार पर कर्ज के लिए ब्याज 11 फीसदी से शुरू होता है। पुरानी कार बतौर संपत्ति ज्यादा जोखिम भरी होती है, इसलिए उस पर ब्याज कुछ ज्यादा लिया जाता है।’
कर्ज देने वाली हर संस्था के पास पुरानी कार की कीमत तय करने का अपना तरीका होता है। चौधरी समझाते हैं, ‘मंजूर की गई ऋण राशि इस बात पर निर्भर करती है कि ऋणदाता ने उसकी कीमत किस तरह लगाई है।’ यही वजह है कि हर ऋणदाता की मंजूर की गई रकम अलग-अलग होती है। चौधरी सलाह देते हैं कि पुरानी कार खरीदने से पहले यह जरूर देख लिया जाए कि पुराने मालिक ने पूरा कार लोन चुका दिया है या अभी तक चल रहा है।

केवल ब्याज दर न देखें
अगर आप डीलरशिप से मिलने वाला ऑफर ही ले लेते हैं तो हो सकता है कि आपको सबसे सस्ता कर्ज न मिल पाए, इसलिए दूसरी जगहों पर भी टटोलें। अरोड़ा की सलाह है कि अलग-अलग ऋणदाता की ब्याज दर, प्रोसेसिंग शुल्क और लोन टु वैल्यू (एलटीवी) की तुलना कर लेनी चाहिए।
साथ ही प्री-पेमेंट और फोरक्लोजर से जुड़ी शर्तों समेत अन्य नियम-शर्तें भी देख लेनी चाहिए। बंसल के हिसाब से आपको उस ऋणदाता के पास जाना चाहिए, जिसकी शर्तें आप पर कम से कम बंदिशें लगा रही हों। अरोड़ा का सुझाव है कि कर्ज लेने के लिए सबसे पहले उन बैंकों या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के पास जाएं, जिनके साथ आपका पहले से कोई रिश्ता है। इसके बाद कार कंपनी की अपनी फाइनैंस कंपनी से बात करनी चाहिए। वहां सस्ता कर्ज मिल सकता है। अंत में कर्ज की शर्तें और खासियत तोलने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए।
जब आप पर ऋण चलता है तब तक आपकी गाड़ी एक तरह से बैंक या एनबीएफसी के पार रेहन रहती है और कर्ज नहीं चुकाने पर वह आपकी गाड़ी जब्त कर सकता है। कर्ज खत्म करने पर आपको रेहन भी खत्म कराना होता है। बंसल की राय में ऐसी कंपनी से कर्ज लीजिए, जो रेहन खत्म करने और गाड़ी पूरी तरह आपके नाम करने में कोई परेशानी नहीं करती हो।
बंसल यह सलाह भी देते हैं कि ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना के बीच ज्यादा कर्ज लेने से बचना चाहिए। वह कहते हैं, ‘आपकी सारी मासिक किस्त मिला लें तो उनकी रकम आपके हाथ में आने वाली तनख्वाह के 40 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। 50 फीसदी से ज्यादा किसी कीमत पर नहीं होनी चाहिए।’जिन्हें कर्ज चाहिए, उन्हें अपने क्रेडिट स्कोर पर भी ध्यान देना चाहिए। अरोड़ा बताते हैं कि 750 से अधिक क्रेडिट स्कोर अच्छा माना जाता है। जिनका क्रेडिट स्कोर इतना होता है, उन्हें कम ब्याज दर पर कर्ज मिलने की अधिक संभावना होती है।

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First Published - July 18, 2022 | 1:12 AM IST

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