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RBI MPC Meet: देश की बैंकिंग प्रणाली दमदार, सुरक्षित व मजबूत

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मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक के आचरण, शासन और विवेक से संबंधित नियम और साथ ही इसका पर्यवेक्षी ढांचा बैंकिंग प्रणाली को बेहतर और सुदृढ़ रखने में मदद करता है

Last Updated- April 08, 2026 | 10:46 PM IST
Banks

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को सभी हितधारकों को आश्वस्त किया कि भारत की बैंकिंग प्रणाली दमदार, सुरक्षित और मजबूत है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के आचरण, शासन और विवेक से संबंधित नियम और साथ ही इसका पर्यवेक्षी ढांचा बैंकिंग प्रणाली को बेहतर और सुदृढ़ रखने में मदद करता है। मल्होत्रा ​​की यह टिप्पणी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक सहित कुछ निजी क्षेत्र के बैंकों से संबं​धित साव​धि जमा से जुड़ी धोखाधड़ी के कई मामलों के सामने आने के मद्देनजर आई है।

एचडीएफसी बैंक से जुड़े मामले के संदर्भ में भी उनकी टिप्पणियां काफी अहम हो जाती हैं, जहां पूर्व अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस्तीफे की वजह बैंक में हो रहे कुछ ऐसे घटनाक्रमों को बताया था, जो उनके मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थे।

इससे बैंक में कथित तौर पर प्रशासन से जुड़ी समस्याओं को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। अलबत्ता भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ऐसी किसी भी चिंता को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि एचडीएफसी बैंक के आचरण या प्रशासन से संबं​धित ‘कोई भी बड़ी चिंता’ रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है।

मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मल्होत्रा ​​ने कहा कि जो घटनाएं सामने आई हैं, वे केवल उसी बैंक से जुड़ी हुई हैं और ज्यादातर आपराधिक घटनाओं वाली प्रकृति की हैं। मल्होत्रा ​​ने कहा, ‘हालांकि हमें सतर्क रहना होगा, लेकिन कानून लागू करने वाली एजेंसियां भी इन (घटनाओं) पर ध्यान देंगी।’

डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन ने कहा, ‘ये किसी खास संस्था से जुड़े घटनाक्रम हैं और फिलहाल इनसे बैंकिंग प्र​णाली को कोई बड़ा खतरा नहीं है। जैसे-जैसे ये मामले सामने आते हैं, हम उनसे द्विपक्षीय आधार पर निपटते हैं। समूची बैंकिंग प्रणाली मजबूत बनी हुआ है और हम आचरण तथा प्रशासन से जुड़े मामलों पर लगातार ध्यान दे रहे हैं। बैंक मुख्य रूप से पेशेवर तरीके से चलाए जाते हैं। जब भी कोई पर्यवेक्षण संबंधी बड़ी चिंता सामने आती है, तो हम उससे उस खास घटना के आधार पर निपटते हैं।’

उन्होंने कहा कि अगर प्रणाली के स्तर पर किसी नियामकीय बदलाव की जरूरत पड़ती है, तो हमें ऐसे कदम उठाने में कोई हिचक नहीं होगी, लेकिन अभी ऐसी कोई घटना नहीं हुई है जिसके लिए किसी बड़े एहतियाती कदम या नियामकीय बदलाव की जरूरत हो।

फरवरी के आखिर में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने इस बात का खुलासा किया था कि उसे चंडीगढ़ में अपनी एक शाखा में 590 करोड़ रुपये के घोटाले का पता चला है, जो हरियाणा राज्य सरकार से जुड़े खातों से संबंधित है। यह मामला तब सामने आया, जब एक सरकारी विभाग ने बैंक में अपना खाता बंद करके पैसा किसी दूसरे बैंक में स्थानांतरित करना चाहा। हालांकि विभाग द्वारा बताई गई रकम खाते में मौजूद बकाया रा​शि से मेल नहीं खा रही थी।

बैंक ने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को लगभग 650 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है और अब वह राज्य के अधिकारियों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर इस घोटाले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और बकाया रकम वसूलने पर काम कर रहा है।

एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक को भी हरियाणा सरकार के साव​धि जमा के मामले में ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा। बाद में मार्च में कोटक महिंद्रा बैंक ने कहा कि उसने पंचकूला पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

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First Published - April 8, 2026 | 10:42 PM IST

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