आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के संघर्ष, कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर आने वाले फैसलों पर टिकी रहेगी। इसके अलावा, कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव और मैक्रो-इकोनॉमिक आंकड़ों के कारण इस हफ्ते निवेशकों का रुख सतर्क रह सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली शिपिंग गतिविधियों और क्रूड ऑयल के दामों में उतार-चढ़ाव से वैश्विक बाजार का मूड तय होगा। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। हालांकि बाजार में ब्याज दरों के यथावत बने रहने की उम्मीद है, लेकिन महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर फेड रिजर्व की टिप्पणियां वैश्विक बाजारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगी। घरेलू मोर्चे पर, निवेशक देश के जून महीने के औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे।
इस हफ्ते कई बड़ी कंपनियां अपने तिमाही (Q1) नतीजे जारी करने वाली हैं, जिनमें कोल इंडिया, BEL, लार्सन एंड टुब्रो, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अदाणी एंटरप्राइजेज, एशियाई पेंट्स, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, ITC और सन फार्मा शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रदर्शन से बाजार के अलग-अलग सेक्टरों में हलचल देखने को मिल सकती है।
बीते हफ्ते शेयर बाजार में भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला था, जिसके चलते BSE सेंसेक्स 2,091.68 अंक यानी 2.67 प्रतिशत लुढ़क गया था, जबकि NSE निफ्टी में 566.85 अंक यानी 2.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। क्रूड ऑयल की कीमतों में आए अचानक उछाल के बाद से निवेशकों में महंगाई और वैश्विक आर्थिक ग्रोथ को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं, जिसके चलते बाजार में डिफेंसिव रुख बना हुआ है।