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देश बिल पर फिर से होगा काम!

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Last Updated- December 11, 2022 | 2:10 PM IST

 केंद्र को उद्यम विकास और सेवा केंद्र (देश) विधेयक में सुधार करना पड़ सकता है, क्योंकि वित्त मंत्रालय ने इसके अधीन प्रस्तावित कुछ राजकोषीय प्रावधानों पर चिंता जताई है। देश विधेयक मौजूदा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) कानून की जगह लेगा।
जानकारों ने बताया कि वाणिज्य विभाग के साथ हितधारकों के परामर्श में, वित्त मंत्रालय ने घरेलू बाजार के साथ विकास केंद्रों के एकीकरण के बड़े दायित्व या निर्यात पर ध्यान देने के लिए अधिक लचीलेपन की अनुमति देने पर आपत्ति व्यक्त की थी।  मौजूद एसईजेड के विपरीत, विकास केंद्र, नए एसईजेड नई विधेयक के तहत निर्यात उन्मुख नहीं होंगे। 
प्रस्तावित राजकोषीय ढांचे के अनुसार, इन केंद्रों में काम करने वाली इकाइयों को घरेलू बाजार में बिक्री करने की अनुमति होगी और शुल्क का भुगतान केवल आयातित कच्चे माल और इनपुट पर करना होगा न कि अंतिम उत्पाद पर।
मशीनरी, कंप्यूटर उपकरण और कच्चे माल जैसे पूंजीगत सामान पर लगने वाली सीमा शुल्क भी स्थगित कर दिया जाएगा।  बड़ा विचार इन इकाइयों की उत्पादन को बढ़ाना है, हालांकि नियमों को लागू करना मुश्किल हो सकता है।
चर्चा में एक व्यक्ति ने कहा, ‘यदि ये केंद्र पूरी तरह से घरेलू बाजार से एकीकृत हैं, तो राजस्व विभाग को चिंता है कि घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) इकाइयां भी इन लाभों को चाहती हैं और देश विधेयक के तहत इन केंद्रों को कार्यशील पूंजी लाभ के कारण स्थानांतरित कर सकती है, जो उन्हें करों के स्थगन से मिलेगा। ऐसी स्थिति में, माल को निर्यात करने के बजाय मुख्य रूप से घरेलू बाजार में स्थानांतरित/बेचा जा सकता है (क्योंकि कोई शुद्ध विदेशी मुद्रा मानदंड नहीं है)।’
उन्होंने कहा, ‘ऐसी स्थिति हो सकती है जहां इकाइयां एसईजेड/केंद्र के रूप में घोषित कर सकती हैं और शुल्क भुगतान को स्थगित कर सकती है क्योंकि अब कोई निर्यात दायित्व नहीं है।’डीटीए के साथ इन केंद्रों को अधिक एकीकरण की अनुमति देने, कच्चे माल पर सीमा शुल्क स्थगित करने के साथ-साथ नई और पुरानी फैक्टरियों की इकाइयों के लिए 2032 तक इकाइयों और केंद्रों के लिए मौजूदा कॉरपोरेट दर 15 फीसदी तक करने पर भी चिंताए हैं।
विकास केंद्रों के लिए इस तरह की रियायतें देने से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जहां अन्य विभाग भी उन योजनाओं के लिए ऐसी रियायतें मांग सकते हैं जो वे तैयार कर सकते हैं और शायद सभी कंपनियों को प्रोत्साहन देने पर बहस छेड़ सकते हैं।

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First Published - October 4, 2022 | 10:53 PM IST

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