अर्थव्यवस्था

चीन से क्या सीखकर बदलेगा भारत का भविष्य? अमिताभ कांत ने बताया रास्ता

बीएस मंथन में अमिताभ कांत ने कहा, सस्ती जमीन, सस्ती बिजली और आसान कर्ज से चीन बना विनिर्माण ताकत, भारत को लागत घटाकर प्रतिस्पर्धा बढ़ानी होगी

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- February 25, 2026 | 11:45 AM IST

BS Manthan 2026: दुनिया की सप्लाई चेन में दरारें पड़ रही हैं। एआई की दौड़ तेज हो चुकी है। बड़े देश अपनी रणनीति बदल रहे हैं। ऐसे समय में सवाल उठता है, क्या यह उथल-पुथल भारत के लिए खतरा है या सुनहरा मौका? बिजनेस स्टैंडर्ड के बीएस मंथन सम्मेलन में नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि यह दौर भारत के लिए एक पीढ़ी में एक बार आने वाला अवसर है। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक व्यवस्था में दरार आती है, तो उभरते देशों के पास आगे बढ़ने का मौका होता है, बशर्ते वे अपनी बुनियादी कमियों को ठीक करें।

दुनिया में बदलाव, भारत के लिए मौका

कांत ने कहा कि दुनिया की सप्लाई चेन में समस्या आई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वैश्वीकरण खत्म हो गया है। अब देश ऐसे देशों के साथ व्यापार करना चाहते हैं जिन पर उन्हें भरोसा हो और जहां स्थिरता हो। उनका कहना है कि जब वैश्विक व्यवस्था में कमजोरी आती है, तब उभरते देशों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। सामान का व्यापार थोड़ा कम हुआ है, लेकिन सेवाओं, डेटा और पूंजी का लेन-देन बढ़ा है। उन्होंने साफ कहा कि अगर भारत को दुनिया के बाजार में मजबूत जगह बनानी है, तो उसे बड़े स्तर पर उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ अपने उद्योगों को बचाने के लिए नियम और रोक लगाना काफी नहीं है। भारत को अच्छा और सस्ता सामान बनाकर दुनिया से मुकाबला करना होगा, तभी सफलता मिलेगी।

कारोबार आसान नहीं, सस्ता बनाना होगा

कांत ने कहा कि भारत में अक्सर कहा जाता है कि यहां कारोबार करना आसान हो गया है, लेकिन असली परेशानी कारोबार की ऊंची लागत है। भारत में कर्ज महंगा है। निजी कंपनियों को मिलने वाला कर्ज देश की कुल अर्थव्यवस्था का सिर्फ 50 प्रतिशत है। जबकि अमेरिका में यह 220 प्रतिशत, चीन में 180 प्रतिशत और यूरोप में 165 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि जब तक कर्ज सस्ता नहीं होगा, बिजली कम कीमत पर नहीं मिलेगी और जमीन लंबे समय के लिए सही दर पर उपलब्ध नहीं होगी, तब तक भारत बड़े स्तर पर उत्पादन नहीं बढ़ा पाएगा।

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भारतीय डेटा से बने भारतीय एआई

BS Manthan में कांत ने कहा कि सरवम एआई एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन उसकी असली ताकत डेटा से ही आएगी। भारत के पास 1.4 अरब लोगों की डिजिटल पहचान है, मजबूत डिजिटल व्यवस्था है और बड़ी संख्या में इंजीनियर हैं। लेकिन सिर्फ डेटा होना काफी नहीं है, उसका सही इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर भारत के लोग सरवम एआई का ज्यादा उपयोग नहीं करेंगे, तो यह दुनिया की बड़ी कंपनियों से मुकाबला नहीं कर पाएगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में एआई ऐसा होना चाहिए जो कई भाषाओं में काम करे और धीमे इंटरनेट पर भी ठीक से चले। 22 आधिकारिक भाषाओं वाले देश में एआई को हर भाषा में आसानी से काम करना होगा, तभी वह देशभर में उपयोगी साबित होगा।

एआई के लिए ऊर्जा और पर्यावरण जरूरी

कांत ने कहा कि एआई और डेटा सेंटर चलाने में बहुत ज्यादा बिजली और पानी लगता है। इसलिए इन्हें साफ और नवीकरणीय ऊर्जा से चलाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत ने करीब 260 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता तैयार कर ली है। लेकिन सिर्फ उत्पादन काफी नहीं है। बिजली सही जगह तक पहुंचे, इसके लिए बेहतर ट्रांसमिशन व्यवस्था और स्मार्ट ग्रिड की जरूरत है, ताकि ऊर्जा बर्बाद न हो।

चीन से क्या सीख सकता है भारत?

BS Manthan में कांत ने कहा कि चीन ने सस्ती जमीन, सस्ती बिजली और आसान कर्ज देकर बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाया। उसने बड़ी संख्या में श्रमिकों, खासकर महिलाओं को रोजगार दिया और बड़े उद्योगों के आसपास पूरा ढांचा खड़ा किया। भारत लोकतांत्रिक देश है, लेकिन लागत कम करने और राज्यों के स्तर पर सुधार करने से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

अमेरिका के टैरिफ पर क्या करें?

अमेरिका की बदलती व्यापार नीति पर कांत ने कहा कि भारत को जल्दबाजी में कदम नहीं उठाना चाहिए। स्थिर और स्पष्ट नीति पर जोर देना चाहिए। इंतजार और समझदारी भरा रुख लंबे समय में बेहतर होगा।

4 ट्रिलियन से 30 ट्रिलियन डॉलर का सपना

कांत ने कहा कि आज भारत की अर्थव्यवस्था करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की है। आने वाले दशकों में इसे 30 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना लक्ष्य होना चाहिए।

इसके लिए उन्होंने चार मुख्य बातें बताईं:

  • टिकाऊ शहरीकरण
  • बड़े पैमाने पर विनिर्माण और प्रतिस्पर्धा
  • मानव विकास में सुधार
  • कम से कम 12 राज्यों का कई वर्षों तक 10 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ना

निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश की भूमिका

BS Manthan में कांत ने कहा कि भारत तभी बढ़ेगा जब निजी उद्योग बढ़ेगा। सरकार दिशा दे सकती है, लेकिन असली विकास निजी क्षेत्र करता है। विदेशी निवेश से तकनीक, पूंजी और वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि एप्पल के उत्पादन से लाखों महिलाओं को रोजगार मिला है।

औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र की रेखा धुंधली होगी

कांत ने कहा कि आने वाले समय में औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र का फर्क कम होगा। गिग अर्थव्यवस्था बढ़ेगी और ठेका पेशेवर भी बड़ी भूमिका निभाएंगे। उनके अनुसार, भारत के लिए यह समय चुनौती नहीं, बल्कि बड़ा अवसर है – बशर्ते देश अपनी नीतियों और लागत ढांचे को मजबूत करे।

First Published : February 25, 2026 | 11:23 AM IST