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BS Manthan 2026: चीन से निवेश आएगा, लेकिन इस शर्त पर- FM सीतारमण ने किया साफ

बीएस मंथन 2026 में Nirmala Sitharaman ने राज्यों द्वारा बजट खर्च में राजनीतिक बाधाओं, विनिवेश की रणनीति, चीन निवेश पर सख्त जांच और आर्थिक सुधारों पर सरकार का स्पष्ट रुख रखा।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- February 25, 2026 | 1:44 PM IST

BS Manthan 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने बुधवार को राजधानी में आयोजित बीएस मंथन कार्यक्रम में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय समन्वय, विनिवेश नीति, निजी क्षेत्र की भागीदारी और चीन से आने वाले निवेश पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बजट में तय की गई राशि का पूरा उपयोग न हो पाना कई बार आर्थिक कारणों से ज्यादा राजनीतिक कारणों से जुड़ा होता है।

राज्यों में बजटीय राशि के कम उपयोग पर क्या बोलीं वित्त मंत्री

वित्त मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत 50 वर्ष के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया है। इसके बावजूद कुछ सुधारों से जुड़ी शर्तों पर राज्यों की प्रतिक्रिया अलग अलग रही है।

उनका कहना था कि कुछ राज्यों ने इन योजनाओं को तेजी से अपनाया, जबकि कुछ ने राजनीतिक कारणों से दूरी बनाए रखी। यदि किसी योजना से उन्हें राजनीतिक लाभ नहीं दिखता, तो वे उसमें रुचि नहीं लेते। इससे बजट में प्रावधान होने के बावजूद धनराशि का पूरा उपयोग नहीं हो पाता।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार संसद और विभिन्न राज्यों के मंचों पर योजनाओं के लाभ समझाने का प्रयास करती है, लेकिन अंततः निर्णय राज्यों के हाथ में होता है।

विनिवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर सरकार की सोच

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की सुधार नीति केवल पारंपरिक विनिवेश तक सीमित नहीं है। कई रणनीतिक क्षेत्रों में निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों को अवसर दिए गए हैं और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर जैसे क्षेत्रों में भी निजी भागीदारी का रास्ता खोला गया है।

विनिवेश पर उन्होंने माना कि यह प्रक्रिया बाजार परिस्थितियों और अन्य प्रशासनिक पहलुओं पर निर्भर करती है। किसी निर्णय के बाद भी उसे लागू करने में समय लगता है। सरकारी प्रक्रियाएं चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ती हैं।

चीन से निवेश पर सख्त निगरानी

चीन से आने वाले निवेश पर उन्होंने दोहराया कि यह प्रेस नोट 3 के तहत सख्त जांच के दायरे में आता है। सरकार निवेश के पीछे मौजूद वास्तविक लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित करती है।

उन्होंने कहा कि केवल व्यावसायिक पहलू ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य रणनीतिक हित भी ध्यान में रखे जाते हैं। भारत की आर्थिक संरचना चीन से अलग है, इसलिए निवेश नीति में भी अलग दृष्टिकोण अपनाया जाता है।

कराधान को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भारत की संप्रभु शक्ति का विषय है और इसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

व्यापक आर्थिक सुधारों पर क्या कहा

टैरिफ युक्तिकरण के विषय में वित्त मंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया धीरे धीरे और वस्तु आधारित आधार पर की जाती है। एक साथ सभी क्षेत्रों में बदलाव करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि घरेलू उत्पादकों और आयातकों दोनों के हितों का संतुलन जरूरी है।

उन्होंने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति बजट अनुमानों के अनुरूप है। घरेलू निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है और पूंजी बाजार में भारतीय निवेशकों की भूमिका मजबूत हुई है।

द्विपक्षीय निवेश संधियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इन समझौतों पर बातचीत देश की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप की जा रही है। निवेश केवल संधियों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि समग्र आर्थिक वातावरण भी महत्वपूर्ण होता है।

कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा

कृषि क्षेत्र को उन्होंने भारत की समग्र सुरक्षा से जोड़ा। उनके अनुसार कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने एग्री स्टैक जैसी पहलों को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।

एआई सम्मेलन में विरोध पर टिप्पणी

हाल ही में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर वित्त मंत्री ने इसे अनुचित बताया। उनका कहना था कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में विरोध प्रदर्शन देश की छवि को प्रभावित करते हैं।

सीतारमण मजबूत विपक्ष की आवश्यकता स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय प्रयासों को कमजोर करना उचित नहीं है। एआई जैसे उभरते क्षेत्र में भारत की संभावनाओं को देखते हुए सभी पक्षों को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

First Published : February 25, 2026 | 1:44 PM IST