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सर्वकालिक निचले स्तर पर आया रुपया

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डॉलर सूचकांक मजबूत होने से रुपये में आई गिरावट

Last Updated- December 05, 2023 | 10:47 PM IST
Reserve Bank of India's dollar sale helped the rupee recover from the new low of 84.76 रिजर्व बैंक के डॉलर बिक्री से रुपये में आया सुधार, 84.76 के नए निचले स्तर से उबरने में मिली मदद

रुपया आज सर्वकालिक निचले स्तर 83.39 पर पहुंच गया। डीलरों ने कहा कि डॉलर सूचकांक में वृद्धि होने से भारतीय मुद्रा में गिरावट आई है। इससे पहले 30 नवंबर को रुपये ने इस स्तर को छुआ था। सोमवार को रुपया 83.37 डॉलर पर बंद हुआ था। बाजार भागीदारों ने कहा कि आयातकों की ओर से डॉलर की निरंतर मांग ने स्थानीय मुद्रा पर और दबाव डाला है।

10 नवंबर को रुपये में रिकॉर्ड गिरावट देखी गई जब यह एक दिन में डॉलर के मुकाबले 83.48 तक टूट गया था। प्रमुख छह मुद्राओं में डॉलर की ताकत को मापने वाला डॉलर सूचकांक सोमवार के 103.31 से बढ़कर 103.65 हो गया। दिसंबर में रुपये में और गिरावट होने की संभावना है क्योंकि डॉलर की मांग जारी रहने का अनुमान है।

करूर वैश्य बैंक के ट्रेजरी प्रमुख वीआरसी रेड्डी ने कहा, ‘आयातकों की ओर से लगातार अच्छी मांग बनी है। भले ही रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की बिक्री की गई है, फिर भी हमने अंत में रुपये में गिरावट देखी है।’ उन्होंने कहा कि साल के अंत तक मैं डॉलर के मुकाबले रुपया को करीब 83.5 से 83.6 के बीच देख रहा हूं।

बाजार भागीदारों का अनुमान है कि विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप ने रुपये को और अधिक गिरने से बचाया है। एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, ‘रुपये में आज गिरावट डॉलर सूचकांक की वजह से रही। मगर, राष्ट्रीयकृत बैंकों ने केंद्रीय बैंक के लिए करीब 83.40 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर डॉलर बेचे। इससे रुपये को मदद मिली।’

नवंबर में जहां उभरते देशों की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले मजबूत हो गईं वहीं रुपया इसमें पिछड़ गया। इसका मुख्य कारण आयातकों के बीच डॉलर की मजबूत मांग रही। मौजूदा वित्त वर्ष में रुपया में 1.5 फीसदी की गिरावट आई है और कैलेंडर वर्ष में यह अब तक 0.8 फीसदी कमजोर हुआ है।

हालांकि, मजबूत विदेशी प्रवाह के कारण कैलेंडर वर्ष के शुरुआती छह महीनों में रुपया 0.16 फीसदी मजबूत हुआ था। नवंबर में रुपया 0.2 फीसदी कमजोर हुआ जबकि इसी अवधि के दौरान डॉलर सूचकांक में करीब 4 फीसदी की गिरावट आई। नतीजतन, महीने के दौरान रुपया अन्य एशियाई देशों के मुकाबले सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रही।

रुपया एकमात्र ऐसी मुद्रा रही जो कमजोर हुई जबकि अन्य देशों की मुद्रा में तेजी दिखी। सीआर फॉरेक्स के प्रबंध निदेशक अमित पबारी ने कहा, ‘निफ्टी के नई ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद रुपया पटरी से उतरता दिख रहा है और अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। तेल और सोने के आयातकों की ओर से डॉलर की मजबूत मांग के कारण व्यापार घाटा बढ़ गया है, जिससे रुपया भी 83 से 83.40 के दायरे तक सीमित हो गया है।’

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First Published - December 5, 2023 | 10:47 PM IST

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