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डेटा संरक्षण विधेयक को वापस लेना सही निर्णय

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Last Updated- December 11, 2022 | 5:03 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएन श्रीकृष्ण का कहना है कि सरकार ने देश के पहले डेटा संरक्षण विधेयक को वापस लेकर सही किया और अब इसकी सभी आलोचनाओं पर विचार करने की जरूरत है। न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण ने इस विधेयक का पहला मसौदा लिखने वाले विशेषज्ञों की समिति का नेतृत्व किया था।
सरकार ने करीब पांच वर्षों के विचार-विमर्श के बाद बुधवार को निजी डेटा संरक्षण विधेयक (पीडीपी), 2019 को वापस लेने का फैसला लिया था। सरकार ने कहा कि इसे व्यापक रूपरेखा के साथ बदल दिया जाएगा और जिसका समकालीन डिजिटल गोपनीयता कानूनों के साथ तालमेल होगा।
न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण ने कहा, ‘इस बार सरकार को इंटरनेट कार्यकर्ताओं, विदेशी कंपनियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सभी आलोचनाओं पर विचार करना चाहिए कि विधेयक में डेटा गोपनीयता के अ​धिकार का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया।’ पीडीपी विधेयक को दिसंबर 2019 में लोकसभा में पेश किया गया था। इसे बाद में एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया, जिसने दिसंबर 2021 में लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की।
उन्होंने कहा कि 2019 में सरकार जो विधेयक लाई थी उसकी काफी आलोचना हुई थी। उसमें संशोधन करने के बजाय उसे वापस लेना और  उसके जगह पर नया विधेयक लाना सही कदम है। विधेयक ने बड़ी टेक कंपनियों को चिंतित कर दिया था और इसकी वकालत करने वालों ने कहा कि यह सरकार को व्यापक अधिकार देता है।
यह व्यक्तिगत डेटा को परिभाषित करता है, डेटा सुरक्षा प्राधिकरण (डीपीए) के लिए आधार प्रदान करता है, और डेटा उपयोग के लिए एक नीतिगत ढांचा प्रदान करता है। नागरिक समाज समूहों, इंटरनेट कार्यकर्ताओं और विदेशी कंपनियों ने कहा कि डेटा गोपनीयता के बजाय यह सरकार के हितों पर केंद्रित है।
यह विधेयक जुलाई 2018 की रिपोर्ट के पहले मसौदे पर आधारित था, जिसे न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने पेश किया था।
सरकार ने इस विधेयक को वापस लेते हुए कहा कि जेपीसी ने इसमें  81 संशोधन सुझाए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने ट्वीट कर कहा कि जेपीसी ने 12 अन्य सुझाव भी दिए हैं।
जेपीसी ने व्यक्तिगत और गैर-व्यक्तिगत डेटासेट के लिए एकल कानून बनाने की भी सिफारिश की, लेकिन न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण इससे असहमत थे। उन्होंने कहा कि मैं पहले ही कह चुका हूं कि यह गलत है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित मौलिक अधिकारों में केवल व्यक्तिगत डेटा और व्यक्तिगत गोपनीयता शामिल है।
 

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First Published - August 5, 2022 | 11:05 AM IST

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