केंद्र सरकार प्रधानमंत्री (पीएम) विश्वकर्मा योजना का दूसरा चरण 17 सितंबर को शुरू कर सकती है। इसमें पारंपरिक कारीगरों और शिल्पियों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। घटनाक्रम से अवगत एक शख्स ने इसकी जानकारी दी।
17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। इसी तारीख को विश्वकर्मा जयंती भी मनाई जाती है। इस योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को बिना किसी गारंटी के कर्ज मुहैया कराना, कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक औजार, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और बाजार से जोड़ने जैसी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराना है।
एक सरकारी अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘योजना का दूसरा चरण 17 सितंबर को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया जाएगा। इसमें कारीगर समुदाय के लिए कर्ज की सुविधा को और बेहतर किया जाएगा।’ अधिकारी ने कहा कि इस बारे में प्रधानमंत्री शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में ऐलान कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने शनिवार को लाल किले पर होने वाले 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना के 100 लाभार्थियों को ‘विशेष अतिथि’ के तौर पर आमंत्रित किया है।
पीएम विश्वकर्मा योजना के दूसरे चरण के बारे में जानकारी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।
योजना के तहत तीन चरणों की जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद करीब 3 करोड़ आवेदकों का सफलतापूर्वक पंजीकरण हो चुका है। इसके तहत 6 लाख से अधिक लोगों को रेहन के बिना 5,259 करोड़ रुपये का कर्ज वितरित किया जा चुका है।
पंजीकरण और कर्ज लेने वाले लाभार्थियों की संख्या के बीच बड़ा अंतर योजना के क्रियान्वयन की प्रमुख चुनौती बनकर सामने आया है। 10 अक्टूबर, 2025 को हुई योजना की राष्ट्रीय संचालन समिति की बैठक में कर्ज मंजूरी और वितरण बढ़ाने के लिए कई उपायों को मंजूरी दी गई थी। इनमें लंबित आवेदनों की दोबारा समीक्षा, ईएमआई का बोझ कम करने के लिए 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के छोटे कर्ज देने और जागरूकता शिविरों तथा कौशल प्रशिक्षण केंद्रों में बैंकों की भागीदारी बढ़ाने जैसे उपाय शामिल थे।
बैंकों को उन मामलों की भी दोबारा समीक्षा करने को कहा गया था, जिन्हें लाभार्थियों से संपर्क नहीं हो पाने के कारण खारिज कर दिया गया था। कर्ज लेने से इनकार करने वाले लाभार्थियों को लिखित में इसकी जानकारी देने को कहा गया था। एमएसएमई मंत्रालय ने वित्तीय सेवा विभाग के साथ मिलकर 12 क्षेत्रीय भाषाओं में एसएमएस संदेश भेजने और एमएसएमई तथा बैंक के कॉल सेंटरों से फोन के माध्यम से संपर्क करने का अभियान भी तेज कर दिया है।
वर्तमान में, लाभार्थी को पिछले 5 वर्षों में केंद्र या राज्य सरकारों की समान ऋण-आधारित योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि, मुद्रा योजना का लाभार्थी नहीं होना चाहिए।
कर्ज की पहली किस्त के तहत सरकार 1 लाख रुपये तक का ऋण 5 फीसदी की रियायती ब्याज दर पर देती है। पहली किस्त का पूरा भुगतान करने के बाद दूसरी किस्त के रूप में लाभार्थी 2 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकता है। पहली किस्त को 18 महीने में चुकाना होता है जबकि दूसरी किस्त के भुगतान के लिए 30 महीने का समय मिलता है।
योजना के दूसरे चरण में सरकार लाभार्थियों को मिलने वाली कर्ज की राशि बढ़ा सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान इस योजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि आने वाले दिनों में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर पारंपरिक शिल्प और कारीगरी में कुशल लोगों, खास तौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के लोगों को लाभ पहुंचाने वाली योजना शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा था कि बढ़ई, सुनार, राजमिस्त्री, धोबी, नाई और ऐसे ही पारंपरिक काम करने वाले अन्य परिवारों को ‘विश्वकर्मा योजना’ के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा। उन्होंने बताया था कि इस योजना की शुरुआत 13,000 से 15,000 करोड़ रुपये के बजट से की जाएगी।