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वृद्धि अनुमान में नहीं किया बदलाव

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Last Updated- December 11, 2022 | 2:55 PM IST

भारत की वस्तुओं व सेवाओं की विदेश से मांग सुस्त रहने के बीच आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) और रेटिंग एजेंसी एसऐंडपी ने आज वित्त वर्ष 2023 के लिए भारत का वृद्धि अनुमान क्रमशः 6.9 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। हालांकि उन्होंने वृद्धि कम होने के जोखिम का उल्लेख किया है।
रेटिंग एजेंसी ने एशिया प्रशांत के अपने हाल के अनुमान में कहा है कि भारत में सेवाओं की खपत में तेज वापसी हो रही है और रिकवरी और निवेश में तेज बढ़ोतरी जारी है। ओईसीडी ने अपने आर्थिक परिदृश्य में कहा है, ‘विदेश से मांग में सुस्ती एक अहम वजह है, जिससे वित्त वर्ष 2021-22 में सालाना वृद्धि 8.7 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2023-24 में 5.75 प्रतिशत रहने का अनुमान है। लेकिन कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अभी भी यह तेज वृद्धि है।’
एसऐंडपी ने कहा है कि भारत की कोविड-19 से घरेलू रिकवरी वित्त वर्ष 2023 में वृद्धि को जारी रखेगी। इसने कहा है, ‘हमने भारत की वृद्धि का परिदृश्य वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 7.3 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष के लिए 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है, हालांकि वृद्धि दर नीचे जाने का जोखिम है।’
एसऐंडपी ने यह ध्यान में रखा है कि भारत में प्रमुख महंगाई घट रही है, लेकिन यह चेतावनी भी दी है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 2022 के अंत तक रिजर्व बैंक द्वारा तय ऊपरी सीमा से ऊपर बनी रहेगी क्योंकि मौसम की मार पड़ने से गेहूं और चावल के दाम बढ़ रहे हैं। 
बढ़ी हुई महंगाई के कारण रिजर्व बैंक नीतिगत दर बढ़ा सकता है। इस समय वैश्विक स्तर पर ब्याज दर में बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी वजह से धन बाहर जा रहा है और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आ रही है। ओईसीडी ने कहा है कि एशिया के प्रमुख उभरते बाजारों जैसे भारत और इंडोनेशिया में प्रमुख महंगाई दर ज्यादा है। इसने कहा है, ‘लेकिन मौद्रिक नीति में सख्ती और कमजोर वैश्विक मांग की वजह से 2022 के अंत तक महंगाई दर लक्ष्य के नजदीक लाने में सफलता मिलेगी।’
चीन के बारे में एसऐंडपी ने कहा कि वित्त वर्ष 23 तक उसकी आर्थिक रिकवरी रुकी रह सकती है क्योंकि कोविड-19 की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है और प्रॉपर्टी सेक्टर कमजोर चल रहा है। 

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First Published - September 26, 2022 | 10:40 PM IST

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