लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि केंद्र सरकार के मंत्रालयों को संशोधित व्यय अनुमानों को पूरा करने के लिए फरवरी से मार्च 2026 की अवधि में आवंटन का 26 फीसदी खर्च करने की जरूरत होगी। कुछ मंत्रालयों के लिए तो यह अंतर बहुत बड़ा है।
जनवरी तक खर्च की गई रकम और संशोधित अनुमान के बीच सबसे अधिक अंतर कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के लिए है जो 93 फीसदी है। अधिकारियों ने कहा कि यह असल में निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष (आईईपीएफ) प्राधिकरण के लिए आरक्षित कोष में 7,500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हस्तांतरित किए जाने के कारण दिख रहा है यानी यह एक समायोजन है। मगर जल शक्ति मंत्रालय के मामले में भी यह अंतर 72 फीसदी तक है और उसे फरवरी से मार्च 2026 में 29,766 करोड़ रुपये खर्च करना होगा।
उदाहरण के लिए, जल जीवन मिशन के लिए, 67,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे लेकिन खर्च नहीं किए गए क्योंकि जल संसाधन विभाग ने एक समीक्षा अभ्यास शुरू किया था। संशोधित अनुमान योजना के लिए 16,944 करोड़ रुपये का व्यय दिखाते हैं। सीजीए के आंकड़ों से पता चला कि जल शक्ति मंत्रालय ने जनवरी 2026 तक 11,670 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
सरकार के नकद प्रबंधन दिशानिर्देशों के अनुसार मंत्रालयों को मार्च तिमाही के लिए अपने बजट अनुमानों के 33 फीसदी से अधिक और वित्त वर्ष के अंतिम महीने के लिए 15 फीसदी से अधिक खर्च करने से बचना चाहिए।
संशोधित अनुमान का उच्चतम अनुपात खर्च करने वाले मंत्रालयों में रेलवे है, जिसने जनवरी 2026 तक 98 फीसदी उपयोगिता प्राप्त कर ली है। सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 87 फीसदी व्यय किया है।
संचार और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय जनवरी 2026 तक क्रमशः 93 और 92 फीसदी उपयोगिता के साथ शीर्ष खर्च करने वाले मंत्रालयों में से हैं।
कृषि और किसान कल्याण जैसे अन्य महत्त्वपूर्ण मंत्रालय को अंतिम दो महीनों में संशोधित अनुमान का 34 फीसदी खर्च करने की आवश्यकता है और रक्षा मंत्रालय को 21 फीसदी खर्च करने की आवश्यकता है।
कई मंत्रालयों (6,000 करोड़ रुपये से ऊपर के आवंटन के साथ) के पास जनवरी तक इस वित्तीय वर्ष के अंतिम दो महीनों में खर्च करने के लिए अपने भंडार में अधिक शेष रकम है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में अभी भी 46 फीसदी खर्च होना बाकी है, जबकि ग्रामीण विकास मंत्रालय को संशोधित अनुमानों का 45 फीसदी खर्च करना बाकी है।
शहरी विकास और महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों को जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में संशोधित अनुमानों का 43 फीसदी खर्च करना होगा।
क्वांटिको रिसर्च के अर्थशास्त्री विवेक कुमार ने कहा, ‘कुल मिलाकर व्यय संशोधित अनुमान के अनुरूप हैं। कमजोर प्रदर्शन करने वाले मंत्रालय लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएंगे जबकि जिन मंत्रालयों ने लक्ष्य को पार कर लिया है वे उससे आगे जा सकते हैं।’
दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, कम नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद ने राजकोषीय घाटे को थोड़ा बढ़ा दिया है और ऋण अनुपात को थोड़ा अधिक कर दिया है। इससे आगे की राह कठिन हो सकती है। 345.47 लाख करोड़ रुपये के नॉमिनल जीडीपी की वजह से वित्त वर्ष 2026 के लिए राजकोषीय घाटा 10 आधार अंक बढ़कर 4.5 फीसदी हो जाएगा।
कुमार ने कहा, ‘अगर सरकार वित्त वर्ष 2026 में 4.4 फीसदी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर टिके रहना चाहती है तो मार्च में समग्र व्यय में थोड़ी कटौती करनी होगी, बशर्ते कि यह जरूरत किसी तरह अतिरिक्त राजस्व सृजन से पूरी हो जाए। मगर मौजूदा परिस्थितियों में यह कुछ हद तक मुश्किल लग रहा है।’