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अमेरिकी टैरिफ की धमकी के बीच भारत का बड़ा कदम, बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक

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अमेरिका द्वारा अतिरिक्त शुल्क लगाने की धमकी के बीच भारत ने पहली बार आईएलओ नियमों के तहत बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है

Last Updated- July 14, 2026 | 10:06 PM IST
forced labour imports
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिका द्वारा धारा 301 जांच के तहत 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी के बीच भारत ने बंधुआ मजदूरी के जरिए तैयार होने वाली वस्तुओं के भारत में आयात को रोकने के लिए एक अधिसूचना जारी की है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 13 जुलाई की अधिसूचना में कहा, ‘बंधुआ मजदूरी के उपयोग से पूरी तरह या आंशिक रूप से उत्पादित या निर्मित वस्तुओं का आयात निषिद्ध है।’ इसमें कहा गया है, ‘बंधुआ मजदूरी के तहत वे सभी काम आते हैं, जो किसी व्यक्ति को दंड या धमकी देकर कराए गए हों और उसके लिए व्यक्ति ने स्वेच्छा से काम करने की पेशकश नहीं की हो, जैसा कि अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के बंधुआ मजदूरी कन्वेंशन के तहत परिभाषित किया गया है।’

 वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यह पहला मौका है, जब भारत ने बंधुआ मजदूरी से संबंधित आयात को रोकने के लिए एक मानदंड जारी किया है। हालांकि उन्होंने इस बात पर टिप्पणी नहीं की कि सरकार आयात  और बंधुआ मजदूरी के बीच संबंध कैसे निर्धारित करेगी।

हाल के वर्षों में चीन के शिनजियांग प्रांत के कपास, वस्त्र, परिधान और सौर पैनलों में उपयोग किए जाने वाले पॉलीसिलिकन उत्पादन जैसे क्षेत्रों को बंधुआ मजदूरी से जोड़ा गया है। यह प्रांत उइगरों का निवास है, जो शिनजियांग का सबसे बड़ा जातीय समूह है, और अमेरिका के उइगर बंधुआ मजदूरी रोकथाम अधिनियम के तहत शिनजियांग से जुड़े सामानों को बंधुआ मजदूरी में शामिल माना जाता है।

ईवाई इंडिया के ट्रेड पॉलिसी लीडर अज्ञेश्वर सेन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के बंधुआ मजदूरी संधि की परिभाषा को हूबहू अपनाकर भारत उसी अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के साथ खुद को जोड़ रहा है, जिसका पालन अमेरिका घरेलू स्तर पर करता है ।

यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) के कार्यालय ने जून में बंधुआ मजदूरी पर मसौदा जांच रिपोर्ट जारी की थी। प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां 6 जुलाई को बंद हो गईं, और अमेरिका को अभी तक आई टिप्पणियों पर विचार करने के बाद शुल्क पर अंतिम निर्णय लेना है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को कहा था कि अंतिम रिपोर्ट इस महीने अपेक्षित है। बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने के नियमों को आंशिक रूप से लागू करने का श्रेय देते हुए धारा 301 के तहत जांच के बाद पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मेक्सिको, कनाडा सहित कुछ अर्थव्यवस्थाओं पर 10 प्रतिशत के कम शुल्क का प्रस्ताव किया गया था।

 दिल्ली स्थित थिंक-टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि यह आदेश आयात पर तत्काल प्रतिबंध के बजाय  कानूनी ढांचा स्थापित करता है। श्रीवास्तव ने कहा, ‘इसका असर इस बात पर निर्भर होगा कि सरकार कैसे जांच करती है व बंधुआ मजदूरी स्थापित करने के लिए आवश्यक साक्ष्य कैसे जुटाए जाते हैं और अंततः यह किन उत्पादों को लक्षित करता है।’

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First Published - July 14, 2026 | 9:59 PM IST

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