भारत के वाणिज्य विभाग ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में 4 दिनों तक चली ‘सार्थक और भविष्योन्मुखी चर्चाओं’ के बाद भारत और अमेरिका के वार्ताकारों ने अंतरिम व्यापार समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत बातचीत आगे बढ़ाने में प्रगति की है।
बयान के मुताबिक, ‘अंतरिम समझौते के ब्योरे को अंतिम रूप देने और व्यापक बीटीए के तहत बातचीत आगे बढ़ाने के लिए भारतीय पक्ष अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ आमने-सामने की बैठकों के लिए वाशिंगटन गया था। बैठकें रचनात्मक और सकारात्मक भावना के साथ हुईं, जिनमें सार्थक और भविष्योन्मुखी चर्चाओं से प्रमुख मसलों पर प्रगति हुई है। दोनों पक्षों ने इस गति को बनाए रखने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।’
वाणिज्य विभाग ने बताया कि बाजार तक पहुंच, गैर शुल्क उपाय, व्यापार की तकनीकी बाधाएं, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, निवेश संवर्धन, आर्थिक सुरक्षा संरेखण और डिजिटल व्यापार जैसे कई क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
मुख्य व्यापार वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल 20 से 24 अप्रैल के बीच अमेरिका के अधिकारियों के साथ एक और दौर की चर्चा के लिए वाशिंगटन डीसी गया था।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा था कि अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता में भारत एक ऐसी व्यवस्था को अंतिम रूप देना चाहता है, जिसके माध्यम से वह अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अमेरिकी बाजार में तरजीही पहुंच सुरक्षित कर सके।
उन्होंने कहा, ‘हमने उनके साथ मुक्त व्यापार समझौते को करीब अंतिम रूप दे दिया है। हम उसे सजाने संवारने का प्रयास कर रहे हैं और ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे भारत अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अमेरिका में तरजीही बाजार पहुंच प्राप्त कर सके। भारतीय दल वाशिंगटन में रहते हुए इन पहलुओं पर चर्चा करेगा।’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा था कि भारत और अमेरिका एक संतुलित और एक दूसरे के लिए लाभकारी व्यापार समझौते तक पहुंचने के मकसद से रचनात्मक बातचीत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘ये बातचीत चल रही है और सकारात्मक है। दोनों पक्ष एक संतुलित, दोनों के लिए लाभदायक और भविष्योन्मुखी व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसमें एक-दूसरे की चिंताओं और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया है। इसमें 2030 तक 500 अरब डॉलर के व्यापार करने का लक्ष्य है।’
अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने 20 फरवरी को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के देश विशेष पर जवाबी शुल्क लागू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के उपयोग का अधिकार रद्द कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का एक समान अधिभार लगाया था।