सोलहवें वित्त आयोग ने संकेत दिया कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) राज्यों द्वारा सब्सिडी के वर्गीकरण के तरीके को मानने के लिए बाध्य नहीं हो सकते हैं। आयोग ने सीएजी से आग्रह किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी राज्यों में सब्सिडी का प्रस्तुतीकरण ‘एकसमान और तुलनीय’ हो।
इस बारे में सीएजी को लिखे एक पत्र को बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी देखा है। इसमें आयोग ने कहा कि सभी खर्चों को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत करना संभव न हो, फिर भी रिपोर्टिंग में एकरूपता जरूरी है। इसमें यह भी कहा गया कि वित्तीय खाते में सब्सिडी को एक अलग विवरण में दिखाया जाता है, इसलिए विवरण में क्या शामिल होगा और क्या नहीं तय करते समय ऑडिटर इसके लिए बाध्य नहीं हो सकते कि राज्य सब्सिडी और हस्तांतरण के तहत खर्चों को कैसे वर्गीकृत कर रहे हैं।
हाल के दिनों में इस मुद्दे ने काफी ध्यान खींचा है और यह सार्वजनिक बहस का भी विषय रहा है क्योंकि राज्य अक्सर खास तौर पर विधान सभा चुनावों से पहले मुफ्त चीजों और योजनाओं की झड़ी लगा देते हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने बीते रविवार को पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुच्चेरी में विधान सभा चुनावों के तारीखों की घोषणा की है।
अपने पत्र में वित्त आयोग ने बजट से इतर उधारी के मुद्दे को भी उठाया और सुझाव दिया कि इन्हें वित्तीय खातों में दिखाया जाना चाहिए। ये खाते असल में राज्यों की वास्तविक प्राप्तियों और खर्चों का ऑडिट किया हुआ वार्षिक विवरण होते हैं। आयोग ने कहा कि इस तरह का खुलासा राजकोषीय स्थिरता के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण होगा। साथ ही स्वतंत्र रिपोर्टिंग इन पर लगाम लगाने में काफी मददगार साबित होगी, खासतौर पर इसलिए क्योंकि अब केंद्र सरकार राज्यों के लिए उधार की सीमा तय करते समय इन उधारों को भी ध्यान में रखती है।
कर के बंटवारे के मामले में आयोग ने उठाई गई चिंता कि वित्त आयोगों द्वारा सुझाए गए प्रतिशत के अनुसार तय की गई सटीक राशि, केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को असल में हस्तांतरित नहीं की जाती है को स्पष्ट करते हुए आयोग ने इसे ‘बेबुनियाद’ बताया और समझाया कि हस्तांतरण शुरुआती अनुमानों पर आधारित होते हैं और बाद में जब खाते को अंतिम रूप दिया जाता है और ऑडिट किए गए आंकड़े उपलब्ध होते हैं तो उनमें जरूरी बदलाव किए जाते हैं।
आयोग ने बताया कि सीएजी को अनुच्छेद 279 के तहत करों की शुद्ध आय को प्रमाणित करने की आवश्यकता है लेकिन यह प्रमाणन सार्वजनिक नहीं किया जाता है। आयोग ने सिफारिश की कि पारदर्शिता के हित में यह आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
इसमें यह भी बताया गया कि 2026-27 के केंद्रीय बजट में इसी तर्ज पर प्राप्ति बजट में एक अलग परिशिष्ट-4सी शामिल किया गया है। परिशिष्ट-4सी संविधान के अनुच्छेद 279 के अनुसार सीएजी द्वारा प्रमाणित शुद्ध प्राप्तियों के आंकड़ों का प्रकटीकरण विवरण है।