अगस्त महीने में भारत की वाणिज्यिक वस्तुओं के निर्यात में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1.15 प्रतिशत की गिरावट आई है। वाणिज्य विभाग के व्यापार संबंधी शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि इंजीनियरिंग के सामान, कपड़ा, रत्न एवं आभूषण के साथ प्लास्टिक के उत्पादों की मांग में गिरावट की वजह से ऐसा हुआ है। उद्योग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा कि रूस यूक्रेन के बीच टकराव की वजह से भूराजनीतिक जोखिम पैदा हुआ और इसका असर भारत के निर्यात पर पड़ा है, जो महामारी के झटकों से उबरने की कवायद कर रहा है और लगातार निर्यात में तेजी दर्ज की है।
चीन, यूरोपीय संघ, अमेरिका जैसे भारत के कुछ बड़े निर्यात बाजार में मंदी के कारण कमजोर मांग, महंगाई दर अधिक होने, के साथ कुछ जिंसों पर निर्यात प्रतिबंध के परिणामस्वरूप वस्तुओं के निर्यात में गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि रत्न और आभूषण क्षेत्र को छोड़कर, निर्यात की मूल्य में गिरावट का कारण स्टील, सूती धागों और प्लास्टिक की कीमतों में कमी है।
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के महानिदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अजय सहाय ने कहा, ‘हम जो रुझान देख रहे हैं उसमें उच्च मुद्रास्फीति के कारण कम मूल्य वाले उत्पादों के ऑर्डर हमें मिल रहे हैं। आगे हमें इन उत्पादों के मूल्य में थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है और निर्यात की मात्रा बरकरार रहेगी। स्थिर मात्रा का रोजगार और रोजगार सृजन पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।’जेम्स ऐंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के अध्यक्ष विपुल शाह कहते हैं कि हॉन्कॉन्ग में कोविड पाबंदियों के कारण रत्न और आभूषण के उत्पादों के निर्यात में कमी देखी गई है।