शेयर बाजार

बाजारों ने भू-राजनीतिक जोखिमों को ध्यान में नहीं रखा, घरेलू मांग बनेगी सुरक्षा कवच

भारतीय शेयर बाजार भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखला में उलटफेर और केंद्रीय बजट और तिमाही आय जैसे आगामी घरेलू घटनाक्रम के बीच नए साल में प्रवेश कर गए हैं

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निकिता वशिष्ठ   
Last Updated- January 13, 2026 | 9:36 PM IST

भारतीय शेयर बाजार भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखला में उलटफेर और केंद्रीय बजट और तिमाही आय जैसे आगामी घरेलू घटनाक्रम के बीच नए साल में प्रवेश कर गए हैं। एडलवाइस म्युचुअल फंड के अध्यक्ष और मुख्य निवेश अधिकारी (इक्विटी) त्रिदीप भट्टाचार्य ने निकिता वशिष्ठ को ईमेल साक्षात्कार में बताया कि भारत वैश्विक झटकों से अप्रभावित है या नहीं, अन्य उभरते बाजारों की तुलना में उसकी स्थिति क्या है और घरेलू मांग आधारित वृद्धि किस प्रकार सुरक्षा कवच दे सकती है। मुख्य अंश:

2026 में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से भारतीय शेयर बाजार कितने प्रभावित होंगे?

सीधे कारोबारी संबंध सीमित होने के कारण भारतीय शेयर बाजार रूस-यूक्रेन या वेनेजुएला तनाव के सीधे असर से कुछ हद तक सुरक्षित हैं, जिससे फंडामेंटल प्रभावों को कम करने में मदद मिली है। लेकिन तेज भू-राजनीतिक झटकों के दौरान बाजार का रुझान अस्थिर हो सकता है। लिहाजा इस पर नजर रखना आवश्यक है। हालांकि कुछ जोखिम प्रीमियम दिखाई दे रहे हैं, फिर भी व्यापक मूल्य निर्धारण प्रक्रिया अधूरी है, विशेष रूप से दरों के प्रति संवेदनशील और वैश्विक स्तर पर जुड़े सेक्टरों में। पोजीशनों के लिए जोखिम की निरंतर निगरानी आवश्यक बनी हुई है।

अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले भारत की स्थिति के बारे में आपका क्या आकलन है?

हालांकि 2025 में भारत का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों से कमजोर रहा। यह ऐसा वर्ष था जिसमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से लाभान्वित होने वाले देशों का दबदबा रहा। लेकिन ऐसा लगता है कि 2026 में एआई को लेकर उत्साह कम होने के साथ ही भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती है। भारत का घरेलू मांग पर आधारित वृद्धि का मॉडल और वैश्विक चक्रीय क्षेत्रों पर कम निर्भरता इस चरण में मजबूती प्रदान करती है।

एआई-विरोधी बाजार के रूप में इसके प्रति धारणा एआई वाली थीम से हटने के दौरान सुरक्षा कवच का काम करती है। इसके अलावा, सरकारी प्रोत्साहन और ऋण वृद्धि में सुधार के कारण मजबूत उपभोग परिदृश्य बना है जो दूसरे वैश्विक देशों की तुलना में आय स्थिरता मुहैया कराता है। दूसरे देश वैश्विक व्यापार के व्यवधानों और प्रौद्योगिकी आधारित चक्रीयता के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं।

बजट और तिमाही आय जैसी बड़ी घटनाओं के दौरान निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को दोबारा कैसे संतुलित करना चाहिए?

ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि भू-राजनीतिक समाचारों का बाज़ारों पर अक्सर अल्पकालिक असर पड़ता है। महहत्त्वपूर्ण घटनाओं के दौरान रणनीतिक परिसंपत्ति आवंटन बनाए रखें, हड़बड़ी में निर्णय लेने से बचें और केवल तभी दोबारा संतुलित करें जब फंडोमेंटलों में बड़ा बदलाव हो। बजट के जोखिमों में रणनीतिक कटौती हो सकती है, लेकिन मुख्य आवंटनों में दीर्घकालिक जोखिम/लाभ के उद्देश्य दिखने चाहिए।

इस साल के वजट से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं? किन क्षेत्रों को बजट घोषणाओं से लाभ या हानि हो सकती है?

बजट में राजकोषीय विवेक और वृद्धि को सहारा देने के बीच संतुलन की संभावना है। अगर आठवें केंद्रीय वेतन आयोग से संबंधित घोषणाएं सार्थक रूप से लागू होती हैं तो उपभोग क्षेत्र को रणनीतिक लाभ हो सकता है, लेकिन हमें उम्मीद है कि रक्षा क्षेत्र को संरचनात्मक लाभ होगा, जिसे उच्च पूंजी आवंटन और आत्मनिर्भर भारत एजेंडा के तहत निरंतर प्रोत्साहन मिलेगा।

अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बीच वस्त्र, परिधान और रत्न एवं आभूषण जैसे चुनिंदा निर्यात उद्योगों को लक्षित राहत मिल सकती है। कुल मिलाकर, बजट से घरेलू मांग और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलनी चाहिए, जो टैरिफ आधारित वैश्विक माहौल में भारत की तैयारियों को दर्शा सकती है।

क्या वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही की आय से उपभोग की बहाली के शुरुआती संकेत मिलेंगे?

वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में ऑटोमोबाइल और आभूषण जैसे उच्च मूल्य वाले विवेकाधीन क्षेत्रों के उपभोग में सुधार के शुरुआती संकेत उभरे हैं। हमें वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में व्यापक संकेत मिलने की उम्मीद है। कंज्यूमर स्टेपल /रोजमर्रा की मांग वाली श्रेणियों और होटलों में उच्च ऑक्यूपेंसी दरें व्यापक उछाल का पता चल सकता है क्योंकि ग्रामीण और शहरी खर्च में वृद्धि के साथ-साथ लक्जरी उपभोग में भी बेहतर रफ्तार दिख रही है। घरेलू आय में क्रमिक सुधार और लक्षित नीतिगत लाभ से समग्र सुधार को मजबूती मिलनी चीहिए।

वैश्विक आर्थिक शक्ति में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है और आपूर्ति श्रृंखलाएं बन रही हैं, तो दीर्घकालिक पूंजी और वृद्धि को आकर्षित करने के लिहाज से भारत की स्थिति कितनी अच्छी है?

वैश्विक अर्थव्यवस्था अगले दशक में एकध्रुवीय से बहुध्रुवीय ढांचे की ओर जा रही है और आर्थिक नेतृत्व अमेरिका से आगे बढ़कर कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, विशेष रूप से भारत तक बढ़ रहा है। यह बदलाव भारत के लिए संरचनात्मक रूप से सकारात्मक है क्योंकि इससे समय के साथ निरंतर पूंजी प्रवाह को समर्थन मिलना चाहिए। लेकिन, जैसे-जैसे वैश्विक मुद्राएं और पूंजी बाजार इस नई वास्तविकता के अनुरूप ढलेंगे, और अगर नीति निर्माताओं ने सावधानी से प्रबंध नहीं किया तो यह परिवर्तन विघटनकारी हो सकता है।

First Published : January 13, 2026 | 9:31 PM IST