केंद्रीय वित्त व कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ग्रोथ के बड़े इंजन हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने में एक जैसी ढांचागत चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है।
सीतारमण ने जयपुर में संगोष्ठी ‘सदस्य देशों में निजी पूंजी जुटाने में न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘चुनौती सिर्फ पूंजी की उपलब्धता की नहीं है बल्कि भरोसा, स्थिरता, अनुमान लगाने की क्षमता और भरोसेमंद दीर्घावधि ढांचा बनाने की भी है। यह सदस्य देशों में निजी क्षेत्र की लगातार भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी हैं।’
भारत सरकार का विश्वास है कि सार्वजनिक पूंजी को निवेश बढ़ाने के तौर पर काम करना चाहिए, वह निजी निवेश का विकल्प नहीं हो। लिहाजा सरकार ने इस सिद्धांत के समर्थन में कई सुधार किए हैं, जैसे वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीपी), हाईब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम), ऋण बढ़ाने के तरीके, इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट), नैशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) और पीएम गति शक्ति।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट ने मौजूदा वित्त वर्ष में निजी क्षेत्र के निवेश को आसान बनाने के लिए कई खास उपाय किए। इनमें नए समर्पित माल गलियारे, नए हाई-स्पीड रेल गलियारे, नए राष्ट्रीय जलमार्ग को शुरू करना और कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम (सीसीपीएस) शामिल हैं।
मंत्री ने कहा कि मल्टीलैटरल डेवलपमेंट बैंक भी निवेश के जोखिम को कम करने, परियोजना की बैंक-योग्यता बढ़ाने और निवेशकों का भरोसा मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाई जा सकती है।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘भारत सरकार ने लगातार जारी सार्वजनिक पूंजी खर्च और सहायक ढांचागत सुधारों के जरिए अपने आधारभूत ढांचे के पारिस्थितिकीतंत्र को मजबूत किया है।’ एक दशक पहले की तुलना में सार्वजनिक निवेश में महत्त्वपूर्ण रूप से वृद्धि हुई है। यह राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स सिस्टम, डिजिटल आधारभूत ढांचे और एनर्जी नेटवर्क में उत्पादक राष्ट्रीय परिसंपत्ति बनाने की सोची-समझी रणनीति को दिखाता है।’
आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने संगोष्ठी में अपने स्वागत भाषण में कहा कि ऐस दौर में डेवलपमेंट फाइनैंस आगे बढ़ रहा है जहां बड़े पैमाने पर काम करने के साथ-साथ मजबूती भी जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘पूंजी जुटाना सिर्फ अच्छे हालात पर निर्भर नहीं हो सकता।’ उन्होंने कहा, ‘इसे ऐसे ढांचे पर आधारित होना चाहिए जो लंबे समय तक टिके रहें। ऐसे ढांचे को मजबूत करने में ही मल्टीलैटरल सहयोग स्थायी मूल्य जोड़ सकता है।’