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वाहनों पर शुल्क रियायत का पेच

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Last Updated- December 11, 2022 | 3:00 PM IST

भारत और ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता के अंतिम चरण में पहुंच गए हैं। ऐसे में यात्री वाहन बनाने वाली भारतीय कंपनियों ने व्यापार समझौते के तहत आयातित वाहनों पर सीमा शुल्क में भारी कमी किए जाने को लेकर चिंता जताई है। 
सरकार द्वारा आयोजित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के दौरान कार विनिर्माताओं ने कहा कि यात्री कारों के लिए शुल्क दरों में कमी किए जाने से यूरोपीय संघ के प्रतिस्पर्धी देशों के लिए एक मिसाल कायम होगी। इससे अंतत: घरेलू उद्योग को नुकसान होगा क्योंकि भारत अन्य देशों के साथ भी एफटीए पर बातचीत कर रहा है।
इस मामले से अवगत तीन लोगों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि प्रतिस्पर्धी देशों द्वारा शुल्क में रियायत दिए जाने से सरकार के मेक इन इंडिया अ​भियान को झटका लग सकता है।
यह एक महत्त्वपूर्ण मामला है क्योंकि कलपुर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सहित वाहनों पर शुल्क में रियायत ब्रिटेन की एक प्रमुख मांग है। दोनों देश इस व्यापार समझौते को अक्टूबर के अंत तक अंतिम रूप देना चाहते हैं। भारत का रुख स्पष्ट है कि वह इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए शुल्क दरों में कमी करने के लिए उत्सुक नहीं है क्योंकि वह एक उभरता हुआ उद्योग है। एक व्य​क्ति ने बताया कि सरकार को वा​णि​ज्यिक वाहन श्रेणी में कंपनियों अथवा कलपुर्जा विनिर्माताओं के किसी विरोध का सामना नहीं करना पड़ा है।
समझा जाता है कि वा​णि​ज्य विभाग ने उद्योग से कहा है कि अ​धिकतम संभावित शुल्क रियायत के लिए आमराय सुनिश्चित  की जाए। शुल्क में कटौती के लिए उद्योग जिस सीमा तक सहमत होगा, सरकार उसी आधार पर ब्रिटेन में कपड़ा जैसे श्रम बहुल क्षेत्रों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनि​श्चित करने के लिए बातचीत करने में समर्थ होगी।
वार्ता से अवगत वाहन उद्योग के एक अ​धिकारी ने कहा कि शुल्क में अचानक भारी कटौती करने के बजाय उद्योग चरणबद्ध तरीके से शुल्क घटाने पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘बेहतर बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए हमारा नजरिया खुला है लेकिन इसे एक कैलिब्रेटेड तरीके से किया जाना चाहिए।’
फिलहाल तैयार आयातित वाहनों पर सीमा शुल्क 60 से 100 फीसदी के दायरे में है जो वाहन श्रेणी पर निर्भर करता है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वाहन विनिर्माताओं के संगठन सायम शुल्क में कितना राययत देने के पक्ष में है।
​तैयार उत्पादों के मामले में उद्योग कहीं अ​धिक सतर्क दिख रहा है जबकि वाहन कलपुर्जा के लिए उनका रुख नरम है। वाहन उद्योग के एक अ​धिकारी ने कहा कि यह एक वै​श्विक रुझान है। सायम के महानिदेशक राजेश मेनन ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

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First Published - September 25, 2022 | 10:56 PM IST

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