Press Note 3: उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नियमों में कुछ ढील देने की अधिसूचना जारी की है। हालांकि सरकार भारत में निवेश करने वाली कंपनियों के ओपशिप स्ट्रक्चर, खासकर चीन और भारत से लैंड बॉर्डर साझा करने वाले देशों के निवेश पर नजर बनाए रखेगी।
डीपीआईआईटी की ओर से 15 मार्च को जारी प्रेस नोट 2 (2026) के अनुसार, अब भारत से जमीन सीमा साझा करने वाले देशों के निवेशकों को 10 फीसदी तक नॉन-कंट्रोल्ड हिस्सेदारी के साथ ऑटोमैटिक रूट के जरिए निवेश करने की अनुमति होगी। यानी इसके लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं होगी, लेकिन यह निवेश संबंधित क्षेत्र की सीमा (सेक्टोरल कैप) के अधीन रहेगा। हालांकि जिस भारतीय कंपनी में यह निवेश होगा, उसे इस निवेश की पूरी जानकारी उद्योग विभाग को देनी होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी भारतीय कंपनी में पहले से विदेशी निवेश मौजूद है और भविष्य में कंपनी के स्वामित्व में बदलाव होता है तथा नया बेनिफिशियल ओनर किसी जमीन सीमा साझा करने वाले देश से है, तो उस स्थिति में सरकार की मंजूरी जरूरी होगी।
सरकार ने बेनिफिशियल ओनर की परिभाषा भी तय की है। इसके अनुसार वही इकाई बेनिफिशियल ओनर मानी जाएगी जो निवेश पर वास्तविक नियंत्रण रखती है। यह परिभाषा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के अनुरूप तय की गई है।
यह बदलाव Press Note 3 (2020) में संशोधन करके किया गया है। यह नियम छह साल पहले कोविड-19 महामारी के दौरान लागू किया गया था ताकि भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोका जा सके। उस नियम के अनुसार भारत से जमीन सीमा साझा करने वाले देशों के निवेशकों को केवल सरकार की मंजूरी के रास्ते से ही निवेश करने की अनुमति थी। भारत से जमीन सीमा साझा करने वाले देशों में चीन, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, म्यांमार, पाकिस्तान और भूटान शामिल हैं।
डीपीआईआईटी के अनुसार यह बदलाव विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगा। यह निर्णय 10 मार्च को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा भारत से जमीन सीमा साझा करने वाले देशों, खासकर चीन, से निवेश पर कुछ प्रतिबंधों में ढील देने की घोषणा के बाद लिया गया है।
सरकार ने दो मुख्य बदलाव किए हैं। पहला, चीन और अन्य पड़ोसी देशों के निवेशकों को 10 फीसदी तक नॉन-कंट्रोल्ड हिस्सेदारी के साथ ऑटोमैटिक रूट से निवेश की अनुमति दी गई है। दूसरा, कुछ क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों की प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी करने की व्यवस्था की गई है ताकि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिल सके।