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कोयला मंत्रालय का बड़ा कदम: भूमिगत कोयला गैसीकरण के लिए जारी हुए नए और सख्त दिशानिर्देश

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कोयला मंत्रालय ने भूमिगत कोयला गैसीकरण के नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिससे कोयले को सिंथेटिक गैस में बदलकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी

Last Updated- April 07, 2026 | 10:40 PM IST
Coal
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

कोयला मंत्रालय ने भूमिगत कोयला गैसीकरण परियोजनाओं की खनन योजना तैयार के नए दिशानिर्देश आज जारी किए। इसका उद्देश्य न्यूनतम सतही प्रभाव के साथ गैसीकरण तकनीक का उपयोग करके कोयले और लिग्नाइट को सिंथेटिक गैस में परिवर्तित करके उसे निकालने के लिए अनुकूलित करना और नियामक अनुपालन तय करना है।

कोयला गैसीकरण तकनीक  मौजूदा कोयला संसाधनों का उपयोग कर सिंथेटिक गैस का उत्पादन करती है। इसका उद्योगों में उपयोग होता है। इसे भारत की जीवाश्म ईंधन आपूर्ति की दिक्कतों के प्रमुख विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, भारत की जीवाश्म ईंधन की दिक्कतें मौजूदा ईरान संकट में भी उजागर हुई हैं। इन दिशानिर्देशों में कहा गया है कि परियोजना प्रस्तावक मंत्रालय को अनिवार्य रूप से प्रस्तावित खनन योजना प्रस्तुत करेगा। यह प्रस्तावित योजना उस ब्लॉक के लिए भूवैज्ञानिक रिपोर्ट, जलभूवैज्ञानिक अध्ययन रिपोर्ट और पायलट अध्ययन के आधार पर तैयार की जाएगी।

मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा, ‘भूवैज्ञानिक रिपोर्ट की तैयारी के लिए यदि पहले विस्तृत अन्वेषण नहीं किया गया है तो कोयला या लिग्नाइट ब्लॉक का अन्वेषण मौजूदा मानदंडों के अनुसार किया जाएगा। परियोजना प्रस्तावक भूभौतिकीय सर्वेक्षण भी कर सकता है और ड्रिल किए गए बोरहोल से प्राप्त आंकड़ों से तालमेल स्थापित कर सकता है।’

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First Published - April 7, 2026 | 10:07 PM IST

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