प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएम-ईएसी) की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र और ओडिशा में महिलाओं के लिए शुरू की गई नकद हस्तांतरण योजनाओं से महिलाओं की बचत और खर्च करने की क्षमता में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, उनके परिवार के अन्य सदस्यों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिला। यह अध्ययन ‘भारत में महिलाओं के लिए बिना शर्त नकद अंतरण योजनाएं: महाराष्ट्र और ओडिशा से साक्ष्य’ शीर्षक से प्रकाशित किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश के 15 से अधिक राज्यों ने महिलाओं के लिए ऐसी नकद हस्तांतरण योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं पर हर साल लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इससे लगभग 12 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा है।
इस अध्ययन में महाराष्ट्र की ‘मुख्यमंत्री माझी लडकी बहिन योजना’ और ओडिशा की ‘सुभद्रा योजना’ के लाभार्थियों के बैंक खातों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन में यह देखा गया कि महाराष्ट्र में चल रही योजना के कारण लाभार्थी महिलाओं के बैंक खाते में महीने के अंत में औसत शेष राशि 84 फीसदी बढ़ी यानी लगभग 6,884 रुपये की वृद्धि हुई। महिलाओं का मासिक खर्च 46 फीसदी बढ़ा यानी लगभग 1,349 रुपये अधिक खर्च किए गए।
वहीं दूसरी ओर ओडिशा की सुभद्रा योजना के कारण लाभार्थियों के बैंक खातों का बैलेंस 45 फीसदी बढ़ा, यानी लगभग 6,887 रुपये की वृद्धि हुई। वहीं मासिक खर्च 28 फीसदी बढ़ा यानी लगभग 1,920 रुपये की बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘नकद हस्तांतरण वाली इन योजनाओं से महिलाओं ने एक ओर अपनी दैनिक घरेलू जरूरतों पर खर्च किया, वहीं दूसरी ओर अच्छी-खासी राशि बचत के रूप में भी रखी। इससे उनकी आर्थिक सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसे उपलब्ध होने की क्षमता मजबूत हुई।’
अध्ययन में यह भी पाया गया कि महाराष्ट्र की मासिक नकद अंतरण योजना में महिलाओं ने मिलने वाले हर अतिरिक्त 1 रुपये में से लगभग 90 पैसे खर्च किए जबकि बाकी राशि बचत के रूप में रखी। इससे पता चलता है कि कम आय वाले परिवारों को नकदी की काफी जरूरत रहती है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि इन योजनाओं का लाभ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
महाराष्ट्र में लाभार्थी महिलाओं के परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों में महीने के अंत का बैलेंस 23 फीसदी बढ़ा जबकि उनके खर्च में 49 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
ओडिशा में अध्ययन से पता चला कि लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी होने पर उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खर्च में लगभग 1.9 फीसदी की कमी आई। रिपोर्ट के अनुसार, इससे यह संकेत मिलता है कि महिलाओं को मिली नकद सहायता पर उनका खुद का नियंत्रण बना रहा। साथ ही, पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत और सुरक्षित हुई। यानी परिवार बचत करने में सक्षम हुआ और जरूरत के समय आर्थिक चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकता है।