भारत के दूरसंचार क्षेत्र के संगठन ने कहा कि दूरसंचार के मामले में ब्रिक्स देशों की प्रतिबद्धता यह बताती है कि कनेक्टिविटी एक अहम राष्ट्रीय इन्फ्रास्ट्रक्चर है। साथ ही, ब्रिक्स का इंटरऑपरेबल सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स की मांग करना भारत के भरोसेमंद स्रोतों वाले नजरिये को भी दिखाता है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के निदेशक जनरल एसपी कोछड़ ने एक बयान में कहा, नई दिल्ली घोषणापत्र में दूरसंचार को शांति और आर्थिक विकास के लिए जरूरी बताया गया है।
इससे उस बात की पुष्टि होती है जो भारतीय ऑपरेटर लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि कनेक्टिविटी एक अहम राष्ट्रीय इन्फ्रास्ट्रक्चर है। इंटरऑपरेबल आईसीटी सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स की मांग उद्योग के भरोसेमंद स्रोतों वाले नजरिये से मेल खाती है, जिसे यह उद्योग पहले ही अपना चुका है।
दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ। हालांकि सदस्य देशों ने सम्मेलन के पहले ही दिन सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को स्वीकार किया था। भारत के दूरसंचार नियम केवल भरोसेमंद स्रोतों या सरकार द्वारा विशिष्ट सुरक्षा मानकों के आधार पर मंज़ूरी प्राप्त इकाइयों के उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
घोषणापत्र को अंगीकार करते हुए ब्रिक्स देशों ने खुले, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) की जरूरत का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने हर देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और इस क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। इन देशों ने आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा के लिए वैश्विक और साझा नियम बनाने और उन्हें लागू करने पर भी सहमति जताई। इसके अलावा, उन्होंने आईसीटी के संभावित गलत इस्तेमाल जैसे साइबर अपराध, गलत जानकारी और डीपफेक से निपटने के लिए मिलकर कोशिश करने की अपील की।
ब्रिक्स देशों ने आईसीटी और अन्य तकनीकों के गलत इस्तेमाल से पैदा सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए मिलकर कोशिश करने की बात कही। इन खतरों में डेटा सुरक्षा, साइबर अपराध, गलत जानकारी, नफरत फैलाने वाले भाषण और डीपफेक शामिल हैं। घोषणापत्र में सप्लाई चेन की सुरक्षा के लिए वैश्विक और साझा नियम बनाने और उन्हें लागू करने का भी जिक्र किया गया है।
ब्रिक्स देशों ने आईसीटी उत्पादों और सिस्टम के विकास और सुरक्षा के लिए व्यापक, संतुलित और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाने, साथ ही सप्लाई चेन की सुरक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर काम करने वाले साझा नियमों और मानकों को विकसित और लागू करने पर भी जोर दिया। सीओएआई ने कहा, नेटवर्क की मजबूती के लिए समुद्र के नीचे केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को अहम मानने का फैसला भी उतना ही स्वागतयोग्य है। एआई के मामले में सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता पर वैश्विक सहयोग उन एआई -नेटिव नेटवर्क के अनुरूप है जिन्हें ऑपरेटर पहले से ही बना रहे हैं। फोरम ने सभी ब्रिक्स सदस्यों से बीआईएफएन के लिए एक राष्ट्रीय शाखा को नॉमिनेट करने का भी आग्रह किया।