देश की छठी सबसे बड़ी दवा कंपनी वॉकहार्ट लिमिटेड बायोटेक्नोलॉजी उत्पाद खंड को बेचने की योजना बना रही है।
इस बाबत कंपनी रणनीतिक निवेशक के तौर पर विदेशी दवा कंपनियों के साथ बातचीत भी रही है। इस प्रक्रिया में 12 से 18 महीने लगेंगे।
वॉकहार्ट के अध्यक्ष हबील खोराकीवाला ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि कंपनी उन शीर्ष 10 विदेशी दवा कंपनियों में से किसी एक को चुनेगी, जो इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने का माद्दा रखती है।
उन्होंने कहा कि इस मसले पर बातचीत जारी है, लेकिन इसके बारे में कुछ विशेष बताना जल्दबाजी होगी। कंपनी बायोटेक दवाओं के लाइसेंस लेने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। वॉकहार्ट 3400 करोड़ रुपये के कर्ज में दबी हुई है और इसने कॉर्पोरेट ऋण पुनर्संरचना (सीडीआर) के जरिये कर्ज भी लिया है।
सीडीआर प्रक्रिया के तहत कर्ज मिलने में 3 से 4 महीने का वक्त लग जाता है। ऐसा माना जा रहा है कि कर्ज मिलने पर कंपनी की हालत में सुधार हो सकता है, क्योंकि यह 2 से 5 वर्ष तक की अवधि के लिए है। वॉकहार्ट ने बायोटेक रिसर्च पार्क में 300 से 500 करोड रुपये का निवेश किया है।
इसकी उत्पादन क्षमता दुनियाभर की बड़ी गैर पेटेंट बायो फार्मा की कुल मांग का 10 से 15 फीसदी है। खोराकीवाला कहते हैं, ‘इन्सुलिन को छोड़कर हमलोग दूसरी हर गैर पेटेंट बायो दवा में आगे हैं।’
कंपनी बायोवैक-बी (हेपेटाइटिस बी का टीका), वेपॉक्स (एनीमिया के इलाज में प्रयुक्त दवा), वॉसुलिन (इंसुलिन उत्पाद) बनाती है। वॉकहार्ट ने वॉसुलिन के लिए 45 देशों में उत्पाद पंजीकरण भी करा लिया है। कंपनी ने हाल ही में एक दवा ग्लैरिटस भी लॉन्च की है, जो मानव इंसुलिन के तौर पर इस्तेमाल की जाती है।
वॉकहार्ट दुनिया की पहली कंपनी थी, जिसने इस दवा को पहले पहल लॉन्च किया था। दुनियाभर में इस दवा की बिक्री 2 अरब डॉलर है। बायोसिमिलर्स या बायोटेक दवाओं का कॉपी कैट वर्जन का बाजार काफी बढ़ रहा है। इसका बाजार दुनियाभर में 30 से 30 अरब डॉलर का है।
दुनिया की तमाम बड़ी दवा कंपनियां फाइजर, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन, मर्क ऐंड को इस खंड से आमदनी बढ़ाने के अवसरों को गंभीरता से ले रही है।
कंपनी उन शीर्ष 10 विदेशी दवा कंपनियों में से किसी एक को चुनेगी, जो इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने का माद्दा रखती है
कंपनी बायोटेक दवाओं के लाइसेंस लेने के विकल्प पर भी कर रही है विचार