प्रमुख औषधि कंपनी एलेंबिक फार्मास्युटिकल्स की सह-स्वामित्व वाली क्लीनिकल स्टेट बायोफार्मास्युटिकल फर्म रिजेन फार्मास्युटिकल्स एजी को उसकी एक खाने वाली दवा के लिए अमेरिकी औषधि नियामक यूएसएफडीए से मंजूरी मिली है। इसका इस्तेमाल लिम्फोमा के उपचार में किया जा सकता है। इस मंजूरी से कंपनी के कैंसर दवा कारोबार को और रफ्तार मिलेगी।
अम्ब्रैलिसिब में रिफ्रैक्टरी मार्जिनल जोन लिम्फोमा (एमजेडएल) से ग्रस्त वयस्क रोगियों अथवा दोबारा बीमार होने वाले रोगियों के उपचार में इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। इसका इस्तेमाल उन रोगियों पर किया जा सकता है जिनमें कम से कम एक एंटी-सीडी20 आधारित रेजिमेन मिले हैं और रिफ्रैक्टारी फोलिक्यूलर लिम्फोमा (एफएल) से ग्रस्त ऐसे वयस्क रोगी जो तीन स्टिेमिक थेरेपी ले चुके हैं।एलेंबिक फार्मा के प्रबंध निदेशक प्रणव अमीन के अनुसार, इस दवा के अलावा खास बात यह है कि अगली पीढ़ी की नई खाने वाली फॉस्फोइनोसिटाइड 3 किनस (पीआई3के) डेल्टा भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई पहली नई रसायनिक पदार्थ है जिसे यूएसएफडीए की मंजूरी मिली है।
अम्ब्रैलिसिब को अगले महीने के आरंभ में अमेरिकी बाजार में उतारने की योजना है। इसकी खोज रिजेन फार्मा द्वारा की गई थी और बाद में 2012 में खोजी गई नई दवा (आईएनडी) के तहत नैसडैक में सूचीबद्ध टीजी थेराप्यूटिक्स को लाइसेंस दिया गया था। रिजेन फार्मास्युटिकल्स में एलेंबिक फार्मास्युटिकल्स की 50 फीसदी हिस्सेदारी है और शेष हिस्सेदारी कंपनी के अध्यक्ष एवं सीईओ डॉ. स्वरूप वकलंका की है। साल 2014 में रिजेन फार्मास्युटिकल्स और टीजी थेराप्यूटिक्स ने लाइसेंसिंग समझौता किया था।