संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूनिडो) ने अपने टेक्नीकल असिस्टेंस प्रोग्राम (टीएपी) के समाप्त होने से पहले उड़ीसा में राज्य सरकार के समक्ष सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के विकास के लिए एक कार्यक्रम चलाए जाने का प्रस्ताव रखा है।
इंडस्ट्रियल पॉलिसी रिजोल्यूशन, 2001 के प्रावधानों के मुताबिक टीएपी इस साल 31 मार्च को समाप्त हो रहा है। इस संबंध में यूनिडो ने राज्य के उद्योग विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है और राज्य सरकार ने 2010 से 2015 तक इसके कंट्री एसिस्टेंस प्रोग्राम के तहत इस परियोजना के लिए डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी) से सहायता के लिए अपनी सिफारिश दे दी है।
अधिकारियों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर सालाना त्रिपक्षीय बैठक में चर्चा की गई। यह बैठक 16 मार्च को भारत सरकार, उड़ीसा सरकार और डीएफआईडी के बीच हुई। इस कार्यक्रम में चार घटक प्रमुख रूप से शामिल हैं।
ये घटक हैं – एमएसएमई पॉलिसी, इंडस्ट्रियल प्रमोशन एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उड़ीसा (इपिकोल) के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाना, सिंगल विंडो मैकेनिज्म (एसडब्ल्यूएम) और डायरेक्टोरेट ऑफ इंडस्ट्रीज (डीओआई), राज्य में एमएसएमई कौशल विकास और एमएसएमई प्रोत्साहन और व्यापार विकास कार्यक्रम।
पॉलिसी कार्यक्रमों में यूनिडो शर्तों और प्रोत्साहनों, औद्योगिक निवेश, एसएमई पार्क विकास के लिए सार्वजनिक-निजी निवेश और पॉलिसी इंजीनियरिंग कार्यक्रमों से संबद्ध एमएसएमई सलाह मुहैया कराएगा।
इपिकोल और डीओआई के लिए टीम उड़ीसा के संस्थागत सुदृढ़ कार्यक्रमों के तहत यूनिडो ने निवेश प्रोत्साहन गतिविधियों और सिंगल विंडो मैकेनिज्म के लिए टीम उड़ीसा की संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाए जाने का प्रस्ताव रखा है। इसी तरह एसएमई के लिए कौशल विकास, उद्यमिता विकास, ‘तकनीकी प्रोत्साहन, उन्नयन और पुनर्गठन’ (टीयूआर) कार्यक्रम, सप्लायर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एसडीपी) और एसएमई ट्रेड कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम (टीसीपी) भी चलाए जाएंगे।
इसके अलावा यूनिडो ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) या फिर बिल्ड-ऑन-ट्रांसफर (बीओटी) के जरिये एसएमई निर्माण और औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाए जाने का भी प्रस्ताव रखा है। जहां ये कोशिशें एसएमई पार्क में घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करेंगी, वहीं एसएमई के सामूहिक विकास को काफी हद तक बढ़ावा मिलेगा।
एसएमई सब-कॉन्ट्रेक्टिंग एक्सचेंज के जरिये संपर्क कायम किया जाएगा और एल्युमीनियम, इस्पात, सीमेंट, पेट्रो-रसायन जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित सहायक पार्कों में लघु एवं मझोले उद्योगों के लिए एसएमई ट्रेड एग्सपोर्ट प्रमोशन प्रोग्राम के माध्यम से विपणन सहायता मुहैया कराई जाएगी।
प्रस्ताव में एसएमई वित्त और गारंटी योजनाओं से संबद्ध क्लीनर उत्पादन कार्यक्रम चलाए जाने की भी संभावना तलाशी गई है। योजना के तहत अनुमानित खर्च लगभग 30 करोड़ रुपये आएगा। यूनिडो के परियोजना प्रबंधक (उड़ीसा) अलेजैंड्रो वेरा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमने एमएसएमई विकास कार्यक्रम की रूपरेखा उड़ीसा सरकार को भेज दी है और इस बारे में जल्द ही कोई फैसला लिए जाने की संभावना है।’
उन्होंने कहा कि कृषि खाद्य प्रसंस्करण और इस्पात, एल्युमीनियम, सीमेंट, पेट्रोलियम, पेट्रो-रसायन और विद्युत क्षेत्र जैसे क्षेत्रों में सहायक उद्योगों पर इस कार्यक्रम में अधिक जोर दिया जाएगा। अगर डीएफआईडी इस कार्यक्रम के लिए कोष के लिए सहमत हो जाता है तो राज्य में एसएमई के लिए विकास की राह आसान हो जाएगी।