कोरोनावायरस वैश्विक महामारी के मद्देनजर अधिकतर परिवार अपने जरूरत की वस्तुओं की ऑनलाइन खरीदारी करने के लिए मजबूर हुए हैं। कई लोगों ने एक नई आदत के रूप में अपना लिया है जिसे साल 2020 के बाद भी बरकरार रहने के आसार हैं। वर्ष 2020 के दौरान हम सभी के जीवन में बहुत सारे बदलाव आए और उनमें से एक प्रमुख बदलाव है फल-सब्जियों एवं राशन को खरीदने का तरीका। कोविड-19 की रोकथाम के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के बाद ऑनलाइन न केवल टियर-1 शहरों बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी किराने की वस्तुओं की खरीदरी के लिए ग्राहकों का एक पसंदीदा माध्यम बन गया। कोविड वैश्विक महामारी के कारण पैदा हुई नई परिस्थितियों में ई-कॉमर्स के बाद ई-ग्रोसरी क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियों की दिलचस्पी बढऩे लगी है। टाटा, रिलायंस और एमेजॉन जैसी प्रमुख कंपनियां इस क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही हैं।
रिलायंस अपने जियोमार्ट के साथ ग्रोसरी कारोबार को आगे बढ़ा रही है जबकि चर्चा है कि टाटा समूह बिगबास्केट में 2 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर बहुलांश हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत के अंतिम चरण में है। ई-ग्रोसरी क्षेत्र में अपनी उल्लेखनीय बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश में जुटीं इन बड़ी कंपनियों के साथ ही मौजूदा कंपनियों का मानना है कि 2021 में यह तगड़ी प्रतिस्पर्धा वाला खुदरा क्षेत्र होगा जहां सभी के विकास और विस्तार के लिए पर्याप्त गुंजाइश होगी। ग्रोफर्स के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी अल्बिंदर धींडसा ने कहा, ‘यह देखते हुए हमने खुद को एक अनोखी स्थिति में पाया कि हमने पिछले सात वर्षों के दौरान ग्रोसरी विशेष के लिए आपूर्ति शृंखला का निर्माण किया है। यह हमें प्रतिस्पर्धा में आगे रखता है। हमें ऑनलाइन ग्रोसरी में निवेश बढ़ता दिख रहा है।’ उन्होंने कहा कि इस ऑनलाइन ग्रोसरी फर्म ने मार्च में लॉकडाउन के बाद से अपने प्लेटफॉर्म पर 64 फीसदी पहली बार के खरीदारों को देखा है।
टाइगर ग्लोबल के निवेश वाली कंपनी बिगबास्केट ने पिछले छह वर्षों के दौरान हर साल बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा देखी है। बिगबास्केट का भी मानना है कि नए साल में प्रतिस्पर्धा की धार कहीं अधिक तेज होगी। बिगबास्केट के प्रमुख (राष्ट्रीय श्रेणी) शेषु कुमार तिरुमाला ने कहा, ‘शॉपिंग चैनल चुनने में मूल्य ग्राहकों के लिए एक प्रमुख मापदंड होगा जबकि किराना वस्तुओं के चयन में सुविधा, वर्गीकरण और ताजे उत्पादों की गुणवत्ता उल्लेखनीय भूमिका होगी।’ गुर्मेट गार्डन के सह-संस्थापक एवं सीईओ अर्जुन बालाजी ने कहा कि बाजार में विजेता वही होंगे जिनके पास श्रेणियों के लिए समग्रता का दृष्टिकोण होगा और जो तेजी से बढ़ रहे ग्राहकों के लिए गुणवत्ता एवं सुरक्षा के मोर्चे पर विशेष पेशकश कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस क्षेत्र में सामान्य बने रहने वालों को सफलता नहीं मिल सकती है। रेडसीर और बिगबास्केट की रिपोर्ट के अनुसार, देश में ई-ग्रोसरी बाजार का कुल बाजार 2019 में 1.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2020 के अंत में करीब 3 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। सालाना 57 फीसदी की वृद्धि दर के साथ यह बाजार 2024 में करीब 18 अरब डॉलर का होगा।
यूरोमॉनिटर की रिपोर्ट में कहा गया है कि 500 अरब डॉलर के कुल खुदरा बाजार में ग्रोसरी की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है। इसलिए खुदरा विक्रेताओं के लिए ऑनलाइन ग्रोसरी में सबसे अधिक संभावना दिखेगी। अपने विशाल आकार और बार-बार खरीदारी के कारण यह किसी भी किसी भी खुदरा कंपनी के लिए एक प्रमुख बाजार होगा। देश में ऑनलाइन खरीदारी की पैठ अभी भी 0.4 फीसदी से कम है जो कंपनियों के लिए उच्च वृद्धि दर हासिल करने का जबरदस्त अवसर देता है। एवेंडस कैपिटल के कार्यकारी निदेशक एवं सह प्रमुख (डिजिटल एवं प्रौद्योगिकी) करण शर्मा ने कहा, ‘ऑनलाइन ग्रोसरी बाजार में अगले 4 से 5 वर्षों के दौरान दस गुना वृद्धि के लिए स्पष्ट संभावनाएं दिख रही हैं। हम उम्मीद करते हैं कि वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स में निवेश और आपूर्ति शृंखला में एकीकरण संबंधी गतिविधियां दिखेंगी जिनसे वृद्धि को रफ्तार मिलेगी।’
ढींडसा के अनुसार ऑनलाइन ग्रोसरी एक तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है जहां निवेश की आकर्षक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा, ‘हम मुनाफा कमा रहे हैं और परिचालन को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए कंपनी के पास पर्याप्त नकदी के साथ मजबूत बहीखाता है।’