संसदीय समिति ने सरकार को ग्राम पंचायतों के राजस्व स्रोतों को मजबूत करने और वित्तीय विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब पंचायतें अभी भी मुख्य रूप से बाहरी हस्तांतरण यानी अनुदान पर निर्भर हैं और अपने राजस्व स्रोतों को जुटाने की उनकी क्षमता सीमित बनी हुई है।
समिति ने सरकार को पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के कामकाज की व्यापक समीक्षा करने और ‘अगली पीढ़ी के पंचायत सुधारों’ के लिए एक रोडमैप तैयार करने का भी निर्देश दिया है। जिससे विकेंद्रीकरण, वित्तीय स्थिरता और नागरिक की भागीदारी को और मजबूत किया जा सके।
बुधवार को संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने कहा कि पिछले तीन दशकों में पीआरआई लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरे हैं, लेकिन अब भी कई संरचनात्मक चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति का मानना है कि तीन दशक से अधिक के अनुभव के बाद अब केवल संस्थाओं के गठन तक सीमित रहने की बजाय उनकी प्रभावशीलता, जवाबदेही और समावेशी एवं टिकाऊ विकास देने की क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान देने का समय आ गया है।’
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि पंचायती राज मंत्रालय राज्यों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श कर पंचायती राज संस्थाओं के कामकाज की व्यापक समीक्षा करें।