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टावर पर शुरू हुआ मुकाबला

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Last Updated- December 10, 2022 | 9:59 PM IST

मोबाइल टावर कारोबार में नई कॉल सुनाई पड़ रही है। अभी तक इंडस टावर, रिलायंस इन्फ्राटेल और भारती इन्फ्राटेल का ही दबदबा रहा है।
इंडस टावर मे भी दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों वोडाफोन-एस्सार, भारती एयरटेल और आइडिया सेल्युलर साझेदार हैं। देश के 2,00,000 लाख टावर के बाजार में इन तीनों कंपनियों की 90 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सेदारी है।
दूरसंचार दिग्गजों से जुड़ी कंपनियों को अब टावर लगाने वाली स्वतंत्र कंपनियों से कड़ी चुनौती मिल रही है। टावर कारोबार में अब अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन (एटीसी), क्विपो टेलीकॉम और जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड जैसी कंपनियां आक्रामक तरीके से अपने कारोबार के विस्तार में जुट गई हैं।
दरअसल देश में मौजूद दिग्गज दूरसचांर कंपनियों को चुनौती देने के लिए जल्द ही आधा दर्जन नये ऑपरेटर बाजार में आने की तैयारी कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक अगले तीन-चार साल में देश में 1,00,000 मोबाइल टावरों की और जरूरत पड़ेगी और अनुमान है कि इसमें से 60 फीसदी टावर स्वतंत्र कंपनियां लगाएंगी।
महज साल भर पहले कई दूरसंचार फर्मों ने मूल्यांकन बढ़ाने के लिए अपनी टावर लगाने वाली इकाइयों को बाकायदा एक कंपनी की शक्ल दी थी। सरकार द्वारा इस मामले में पूंजी के खर्च को कम करने के लिए इन कंपनियों को टावर साझेदारी का रास्ता दिया। इस वजह से कंपनियों को टावर कारोबार में काफी संभावनाएं नजर आने लगीं।
इन कंपनियों का रवैया भी खासा आक्रामक है। एटीसी ने भले ही एक हफ्ते पहले ही परिचालन शुरू किया हो लेकिन इस दौरान ही उसने एक्सेल टेलीकॉम से 1,700 टावर लगाने का अनुबंध 7,00 करोड रुपये में हासिल किया है।
कंपनी के उपाध्यक्ष अमित शर्मा कहते हैं, ‘हम नये सर्किलों पर जोर दे रहे हैं और बेहतरीन सेवा मुहैया कराने की कोशिशों में लगे हैं। हमारे पास एक अरब डॉलर की नकदी है, इसलिए टावर लगाने या फिर किसी कंपनी के अधिग्रहण के लिए नकदी का कोई संकट नहीं है। ‘
दूरसंचार में जल्द उतरने वाली कंपनी यूनिटेक वायरलेस के कार्यकारी निदेशक राजीव बावा कहते हैं,’टावर के लिए हमें बड़े खिलाड़ियों की बजाय स्वतंत्र फर्म  ज्यादा मुफीद लग रही हैं।’
बड़ी कंपनियों का ही दबदबा है टावर कारोबार में
स्वतंत्र टावर कंपनियां बढ़ा रही हैं कारोबार
एयरटेल, वोडाफोन-एस्सार, आइडिया, रिलायंस से जुड़ी फर्मों का 90 फीसदी हिस्सा
तीन-चार साल में जरूरत पड़ेगी 1 लाख नए टावरों की

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First Published - March 29, 2009 | 9:31 PM IST

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