Truecaller के सीईओ ऋषित झुनझुनवाला ने मंगलवार को कहा कि कंपनी भारत में स्पैम कॉल और मैसेज की समस्या को हल करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है। पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि ट्रूकॉलर स्पैम को रोकने के लिए TRAI , इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ मिलकर समाधान निकालना चाहता है। झुनझुनवाला ने कहा, “अगर ट्राई के अधिकारों को बढ़ाया जाता है, तो यह MeitY के अधिकार क्षेत्र में आने वाले नियमों में दखल देने जैसा होगा।”
पिछले शुक्रवार को ट्राई ने कहा था कि कोई भी ऐप 1600 सीरीज से आने वाली कॉल को ब्लॉक नहीं कर सकता, क्योंकि इस नंबर सीरीज का इस्तेमाल सरकारी विभागों और अधिकृत संस्थाओं द्वारा लोगों से संपर्क करने के लिए किया जाता है। ट्रूकॉलर का कहना है कि ट्राई के नियमों के बावजूद धोखेबाज लोग 1600 और 140 से शुरू होने वाले नंबरों का गलत इस्तेमाल करके लोगों से संपर्क कर रहे हैं। कंपनी ने बताया कि उसके कॉलर पहचान ऐप के लगभग 5.25 लाख यूजर्स हर दिन ऐसी कॉल को स्पैम के रूप में चिह्नित करते हैं। डेडिकेटड नंबर सीरीज (Dedicated Number Series) को लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ गलत लोगों ने इसका गलत इस्तेमाल करने के तरीके खोज लिए हैं
झुनझुनवाला ने कहा, “यह समझना जरूरी है कि यह टैग किसी भी नंबर के साथ आसानी से नहीं जुड़ता। यह केवल कुछ खास नंबरों पर तब लगाया जाता है, जब लाखों यूजर्स उन नंबरों की शिकायत करते हैं और हमारे सिस्टम उन शिकायतों, ब्लॉक करने की जानकारी और कॉल करने के पैटर्न का विश्लेषण करते हैं। किसी नंबर सीरीज को व्हाइटलिस्ट कर देना, ताकि ऐप यूजर्स की प्रतिक्रिया दिखा ही न सकें, इसका समाधान नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा, “जब लाखों यूजर्स किसी कॉल को अनचाही या संदिग्ध बताकर रिपोर्ट करते हैं, तो उस जानकारी को यूजर्स तक पहुंचने से रोकना पारदर्शिता बढ़ाने के बजाय उसे कम करता है।”
झुनझुनवाला ने पीटीआई से कहा, “हम नियामकों की भूमिका का सम्मान करते हैं और ऐसे कदमों का समर्थन करते हैं, जो वास्तव में यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाते हैं। लेकिन अगर ट्राई के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाकर किसी आईटी कंपनी को यह तय करने के लिए मजबूर किया जाता है कि वह यूजर्स को कौन-सी जानकारी दिखाए और अपना निजी डेटा दूरसंचार कंपनी की रजिस्ट्री के साथ साझा करे, तो यह MeitY के अधिकार क्षेत्र में आने वाले नियमों में दखल जैसा होगा।”
झुनझुनवाला ने कहा कि अगर नियमों में ऐसा बदलाव किया गया और यह साफ नहीं किया गया कि किस विभाग के पास अधिकार है, तो आगे चलकर यह एक उदाहरण बन जाएगा। इससे भारत में काम करने वाली दूसरी आईटी कंपनियों पर भी ऐसे विभागों के नियम लागू हो सकते हैं, जिनके पास असल में उनका नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका असर भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में कानूनी स्पष्टता और निवेशकों के भरोसे पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
कंपनी ने कहा कि वह संबंधित सरकारी विभागों के संपर्क में है और उसने भारत के लाखों यूजर्स से मिले डेटा और जानकारी भी उनके साथ साझा की है। उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि इतने महत्वपूर्ण फैसले सबूतों और उपभोक्ताओं के अनुभवों के आधार पर लिए जाने चाहिए।” झुनझुनवाला ने कहा कि यूजर्स की रिपोर्टिंग, नेटवर्क से मिली जानकारी और सरकारी कार्रवाई इन तीनों को एक-दूसरे की जगह लेने के बजाय मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सबसे अच्छा समाधान यह होगा कि नियामक संस्थाएं गलत काम करने वालों के खिलाफ जल्दी कार्रवाई कर सकें और साथ ही लोगों को संदिग्ध या अनचाही कॉल के बारे में समय पर जानकारी देते रहे। उन्होंने कहा, “ हमारा मानना है कि जब यूजर्स को अनचाही कॉल के बारे में अन्य लोगों द्वारा दी गई जानकारी मिलती है, तो उन्हें इसका फायदा होता है। इसलिए हम ‘Frequently Blocked’ टैग दिखाना जारी रखेंगे।” इस टैग को दिखाना नियमों के अनुसार है और यह अभी भी यूजर्स की सुरक्षा करता है।
ट्रूकॉलर ने कहा कि उसने परामर्श प्रक्रिया के तहत अपनी राय आधिकारिक रूप से संबंधित अधिकारियों को दे दी है और वह आगे भी उनके साथ बातचीत जारी रखेगा। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता हमेशा कानूनी लड़ाई (मुकदमेबाजी) के बजाय रचनात्मक बातचीत रही है। हमें उम्मीद है कि लगातार संवाद और तथ्यों पर आधारित चर्चा से ऐसा समाधान निकल सकता है, जो उपभोक्ताओं की सुरक्षा के साथ-साथ नए विकास और तकनीक को भी बढ़ावा दे। एक जिम्मेदार कंपनी की तरह, नियमों की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ हम सभी विकल्पों पर विचार करेंगे, लेकिन फिलहाल हमारा मुख्य ध्यान सहयोग और मिलकर काम करने पर है।