टाटा समूह अंतत: भारत के ऑनलाइन ग्रोसरी क्षेेत्र में उतरने जा रहा है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने आज ऑनलाइन ग्रोसरी कंपनी बिगबास्केट की बहुलांश हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने की मंजूरी टाटा डिजिटल को दे दी।
सीसीआई ने टाटा संस के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक टाटा डिजिटल को सुपरमार्केट ग्रोसरी सप्लाइज प्राइवेट लिमिटेड की कुल शेयर पूंजी का 64.3 फीसदी तक अधिग्रहीत करने की अनुमति दी। साथ ही बिगबास्केट के ऑनलाइन खुदरा कारोबार का परिचालन करने वाली इनोवेििटव रिटेल कॉन्सेप्ट प्राइवेट लिमिटेड पर भी उसका नियंत्रण रहेगा।
इस मंजूरी के बाद टाटा डिजिटल निवेशकों अलीबाबा व अन्य को निकासी का रास्ता देगी, जिसके पास कंपनी की करीब 29 फीसदी हिस्सेदारी है। अन्य निवेशकों में अबराज समूह (16.3 फीसदी) और आईएफसी (4.1 फीसदी) शामिल हैं। टाटा ने यह हिस्सेदारी करीब 9,300 करोड़ रुपये (करीब 1.2 अरब डॉलर) में करने की योजना को अंतिम रूप दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, सह-संस्थापक व सीईओ समेत आला प्रबंधन कंपनी के साथ बने रहेंगे और ब्रांड भी वही रहेगा। टाटा के लिए यह भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में शुरुआत होगी। इस महीने टाटा डिजिटल ने ऑनलाइन फार्मेसी 1 एमजी में भी निवेश किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा डिजिटल ने 1एमजी में 100 करोड़ रुपये अनिवार्य परिवर्तनीय ऋणपत्रों के जरिए लगाए हैं।
बिगबास्केट के प्रवर्तक के. गणेश ने काफी उत्साहजनक ढंग से सौदे को अंतिम रूप देने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, तेजी से बढऩे वाली नई पीढ़ी की कंपनियों की आलोचना में से एक यह है कि वैल्यू क्रिएशन व पूंजी में बढ़ोतरी विदेशी निवेशकों व संस्थानों के जरिए हुए हैं, जबकि इनका परिचालन भारत में होता है। यह देखना अहम है कि भारतीय कारोबारी घराने प्रमुख क्षेत्रों में इंटरनेट, तकनीक सक्षम कारोबारी मॉडल के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं। जोमैटो के आईपीओ की खबर के साथ भारतीय निवेशकों के लिए यह भी अच्छी खबर है। टाटा सबसे अच्छी साख वाली ब्रांड में से एक है और बिगबास्केट के लिए यह काफी कुछ लाएगा।
स्टेटिस्टा रिसर्च के मुताबिक, 2019 में बिगबास्केट के पास भारत में ऑनलाइन ग्रोसरी की सबसे ज्यादा 35 फीसदी हिस्सेदारी थी। अन्य प्रतिस्पर्धियों मसलन एमेजॉन व ग्रोफर्स उससे बहुत पीछे नहीं थी। उस साल ऑनलाइन ग्रोसरी की मार्केट वैल्यू करीब 100.7 अरब रुपये थी।
जनवरी 2021 में जारी रेडसीर रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ग्रोसरी बाजार 850 अरब डॉलर का है और भारत में कुल खुदरा खर्च में ग्रोसरी की हिस्सेदारी 66 फीसदी है। भारत में ग्रोसरी बाजार के करीब 95 फीसदी की अगुआई स्थानीय किराना स्टोर कर रहे हैं, जो ग्राहकों को सुविधाजनक व स्थानीय स्तर पर दी जाने वाली सेवा की उनकी क्षमता पर चल रही है।
बड़े नामों टाटा, एमेजॉन, रिलायंस, वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट की इस क्षेत्र में मौजूदगी रही है, लेकिन ई-ग्रोसरी सबसे प्रतिष्ठित खुदरा क्षेत्रों में से एक के तौर पर उभरी है। चूंकि अहम कंपनियां सामने हैं, ऐसे में बिगबास्केट को इसमें अग्रणी बने रहने के लिए काफी रकम की दरकार होगी। यह कहना है विशेषज्ञों का। ऐसे में उनका कहना है कि टाटा के साथ रणनीतिक साझेदारी का मतलब बनता है। सुपरमार्केट ग्रोसरी ने 2020 में 611 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान दर्ज किया, जो एक साल पहले के 572 करोड़ रुपये के नुकसान से 6.7 फीसदी ज्यादा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 20 में राजस्व में 36 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की। यह जानकारी बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म टॉफ्लर से मिली।