बिजली के क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी टाटा पावर कंपनी (टीपीसी) भी नकदी की किल्लत से परेशान है।
कंपनी अपनी नई परियोजनाओं के लिए रकम जुटाने के वास्ते अल्ट्रा मेगा बिजली परियोजना में अपनी हिस्सेदारी को बेचने जा रही है। यह कदम उठाने वाली देश की वह पहली कंपनी होगी।
कंपनी सूत्रों ने बताया कि कोस्टल गुजरात पावर और मायथॉन पावर में हिस्सेदारी बेचने का कंपनी का इरादा है। कोस्टल गुजरात पावर को मुंद्रा यूएमपीपी स्थापित करने का ठेका मिला है, जबकि मायथॉन पावर टाटा पावर और दामोदर वैली कॉर्पोरशन के साझे उपक्रम वाली कंपनी है। इसमें टाटा पावर की 76 फीसदी हिस्सेदारी है।
इस रकम का इस्तेमाल कंपनी 5,660 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत क्षमता हासिल करने के लिए करेगी। टाटा समूह में एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया, ‘टाटा पावर ने कर्ज के तौर पर 15,570 करोड़ रुपये जुटा लिए हैं और उसे अगले साल तक 2,300 करोड़ रुपये की और जरूरत है। इसके लिए समूह का इरादा मुंद्रा, मायथॉन और टाटा की दूरसंचार कंपनियों में से हिस्सेदारी बेचने का है।’
सूत्रों ने बताया कि अभी कंपनी यह तय नहीं कर सकी है कि मुंद्रा और मायथॉन में कितनी हिस्सेदारी बेची जानी चाहिए। टाटा पावर के प्रवक्ता ने बताया, ‘कंपनी कई विकल्पों पर विचार कर रही है। लेकिन अभी तक किसी भी विकल्प पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।’
सरकार का इरादा देश में लगभग 10 अल्ट्रा मेगापावर संयंत्र लगाने का है। इसी के कंपनी को मुंद्रा संयंत्र का ठेका मिला था। बाकी तीन ठेके रिलायंस पावर को मिले हैं। हालांकि अभी तक रिलायंस इन परियोजनाओं के लिए रकम नहीं जुटा पाई है।
मुंबई के एक विश्लेषक ने बताया, ‘मौजूदा आर्थिक हालात में परियोजनाओं का सही मूल्यांकन हो पाना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन लगातार बढ़ती मांग के कारण ऊर्जा क्षेत्र पर मंदी का खास असर नहीं पड़ा है। फिलहाल इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती है ऐसा खरीदार ढूंढ़ना जो इस समय भी निवेश करने का इच्छुक हो।’
टाटा पावर समूह की ही कंपनियों टाटा टेलिसर्विसेज और टाटा टेलिसर्विसेज महाराष्ट्र में मौजूद अपनी हिस्सेदारी बेचने पर भी विचार कर रही है। दो महीने पहले कंपनी ने तरजीही वारंट लाने की योजना रद्द कर दी थी। इसके जरिये उसके पास कम से कम 1,900 करोड़ रुपये जुटाने का मौका था।
पिछले अप्रैल में कंपनी ने 17,000 करोड़ रुपये वाली मुंद्रा परियोजना के लिए इक्विटी के जरिए 4,250 करोड़ रुपये, व्यावसायिक ऋण के जरिए 7,200 करोड़ रुपये और लगभग 5,550 करोड़ रुपये ऋण के जरिए उगाहने की घोषणा की थी।
फिलहाल कंपनी पांच बड़ी बिजली परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसमें मुंद्रा, मायथॉन, जोजोबेरा, टाटा स्टील के साथ मिलकर जमशेदपुर, ट्रॉम्बे और हल्दिया परियोजानाएं शामिल हैं। ट्रॉम्बे परियोजना का काम पूरा हो चुका है। सूत्रों ने बताया कि कंपनी की मुंद्रा और मायथॉन परियोजना का भी 20 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
नकदी की जरूरत
रकम के लिए कंपनी बेचेगी यूएमपीपी में हिस्सेदारी
कं पनी ने जुटा लिए हैं 15,570 करोड़ रुपये
अगले साल पड़ेगी 2,300 करोड़ रुपये की जरूरत
समूह की दूसरी कंपनियों से भी बेचेगी अपनी हिस्सेदारी